लक्ष्मीकांता चावला सुनने में यह वाक्य अच्छा लगता है कि जनता का राज्य, जनता के लिए है। देश के सभी धन-धान्य व साधन बहुजन सुखाय, बहुजन हिताय हैं। वैसा ही कथन कि जैसे कहा जाये कि कानून के आगे सब बराबर हैं। वैसे भी सरकार बनने के बाद जनता से दूरी बना दी जाती है। […]
प्रचार से न होगा कष्ट पीड़ितों का भला