दादरी। ( देवेंद्र सिंह आर्य छाँयसा) प्रतिभा यदि महलों की चाकर होती तो कोई भी दीपक गरीब की झोपड़ी में जगमगाने से मना कर देता, पर ऐसा नहीं है। दीपक दीपक है और जब वह अपना प्रकाश बिखेलता है तो बिना किसी फर्क के बिखेरता है। वह अपनी रोशनी रूपी प्रतिभा के लिए किसी का […]