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चमचे चुगलखोर-भाग-तीन

सूरज चढ़ता देख किसी का, मन ही मन तू जलता है।हृदय हंसता है तब तेरा जब किसी का सूरज ढलता है। अतुलित शक्ति तुझ में इतनी, दे शासन तक का पलट तख्ता।तेरी कारगर चोटों से, मीनारें गिरीं बेहद पुख्ता। मतलब इतने प्रशंसक तू, निकले मतलब आलोचक तू।उल्लू सीधा करने के लिए, कोई कथा सुनाये रोचक […]

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चमचे चुगलखोर-भाग-दो

बिना हंसी हंसता रहता, और हां में हां कहता रहता।जिस हांडी में खाता है। तू उसी में छेद करता रहता। बनता है तू बाल नाक का, है छुपा हुआ आस्तीन सांप।डसता जिसको, बचता नही वो, दुर्दशा देख जाए रूह कांप। तू ऐसा तीर चलाता है, दिल छलनी सा हो जाता है।जहां प्रेम की गंगा बहती […]

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चमचे चुगलखोर

जय हो चमचे चुगलखोर, तेरे जादू में बड़ा जोर।जय हो चमचे चुगलखोर, भूतल पर जितने प्राणी हैं, तू उन सबमें है कुछ विशिष्ट।चुगली और चापलूसी करके, बनता है कत्र्तव्यनिष्ठ। जितने जहां में उद्यमी हैं, उपेक्षा उनकी कराता है।बात बनाकर चिकनी चुपड़़ी, हर श्रेय को पाता है। पर प्रतिष्ठा समाप्त कर, अपनी की नींव जगाता है।स्वार्थसिद्घि […]

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