इंदिरा गांधी ने वन और पर्यावरण रक्षा कानून बनाये थे, ताकि केंद्र सरकार इनकी रक्षा को कदम उठा सके। इसे लागू करने के लिए वन एवं पर्यावरण मंत्रलय स्थापित किया गया था। लेकिन इंदिरा गांधी के अनुयाइयों के नेतृत्व में पर्यावरण मंत्रलय का कार्य यह रह गया है कि वन रक्षा कानून को तोड़-मरोड़ कर […]
Month: November 2012
ऐसे नहीं होगी वनों की रक्षा
इंदिरा गांधी ने वन और पर्यावरण रक्षा कानून बनाये थे, ताकि केंद्र सरकार इनकी रक्षा को कदम उठा सके। इसे लागू करने के लिए वन एवं पर्यावरण मंत्रलय स्थापित किया गया था। लेकिन इंदिरा गांधी के अनुयाइयों के नेतृत्व में पर्यावरण मंत्रलय का कार्य यह रह गया है कि वन रक्षा कानून को तोड़-मरोड़ कर […]
मानवाधिकारों का दर्शन
वी. एम. तारकुंडेमानवाधिकारों की रक्षा और इन्हें आगे बढ़ाने की दृष्टि से राष्ट्र संघ ने बहुमूल्य कार्य किये। राष्ट्र संघ ने स्त्रियों का व्यापार रोकने, विवाह की उम्र बढ़ाने, विभिन्न देशों में बाल कल्याण को सुनिश्चित करने तथा हजारों शरणार्थियों के पुनर्वास के कदम उठाए। लेकिन मानवाधिकारों को आगे बढ़ाने की दृष्टि से राष्ट्र संघ […]
मानवाधिकारों का दर्शन
वी. एम. तारकुंडेमानवाधिकारों की रक्षा और इन्हें आगे बढ़ाने की दृष्टि से राष्ट्र संघ ने बहुमूल्य कार्य किये। राष्ट्र संघ ने स्त्रियों का व्यापार रोकने, विवाह की उम्र बढ़ाने, विभिन्न देशों में बाल कल्याण को सुनिश्चित करने तथा हजारों शरणार्थियों के पुनर्वास के कदम उठाए। लेकिन मानवाधिकारों को आगे बढ़ाने की दृष्टि से राष्ट्र संघ […]
अन्ना आंदोलन की उपज अरविंद केजरीवाल सत्ता के गलियारों में आज अपनी सशक्त उपस्थिती दर्ज करा चुके हैं । लगभग दो साल चला उनका ये संघर्ष अपनी अंतिम परिणीती को प्राप्त कर चुका है । अर्थात स्वयं को एक राजनेता के रूप में पहचान दिलाने का । हांलाकि उनके इस सफर में कई पुराने साथी […]
अन्ना आंदोलन की उपज अरविंद केजरीवाल सत्ता के गलियारों में आज अपनी सशक्त उपस्थिती दर्ज करा चुके हैं । लगभग दो साल चला उनका ये संघर्ष अपनी अंतिम परिणीती को प्राप्त कर चुका है । अर्थात स्वयं को एक राजनेता के रूप में पहचान दिलाने का । हांलाकि उनके इस सफर में कई पुराने साथी […]
सत्तावन के बाद पहली चिनगारी-4
गतांक से आगे…..तीन वर्ष पहले उस महान क्रातिकारी की आत्मा जेल के सींखचों से ऊब गयी थी। उसे शिवाजी का स्मरण हो आया, उसे भगवान कृष्ण का स्मरण हो आया। जिन्होंने जेल के बंधन को तोड़, अपने जीवन के मार्ग को प्रशस्त किया था। तब उसके हृदय ने उससे पूछा था, क्या मेरा जन्म जेल […]
सत्तावन के बाद पहली चिनगारी-4
गतांक से आगे…..तीन वर्ष पहले उस महान क्रातिकारी की आत्मा जेल के सींखचों से ऊब गयी थी। उसे शिवाजी का स्मरण हो आया, उसे भगवान कृष्ण का स्मरण हो आया। जिन्होंने जेल के बंधन को तोड़, अपने जीवन के मार्ग को प्रशस्त किया था। तब उसके हृदय ने उससे पूछा था, क्या मेरा जन्म जेल […]
मनमोहन जी! सुनहरे कल की कल्पना छलावा है
भारत के प्रधानमंत्री, आदरणीय मनमोहन सिंह जी। बतौर प्रधानमंत्री आपके लंबे शासनकाल के अनुभव के बाद एक नागरिक के रूप में अब हम आपके लिए कह सकते हैं आप कल्पना लोक में विचरण करनेवाले प्राणी हैं। आपका वास्तविक धरातल से कोई लेना देना नहीं है। रामलीला मैदान में कल भी आपने सुनहरे कल का छलावा […]
मनमोहन जी! सुनहरे कल की कल्पना छलावा है
भारत के प्रधानमंत्री, आदरणीय मनमोहन सिंह जी। बतौर प्रधानमंत्री आपके लंबे शासनकाल के अनुभव के बाद एक नागरिक के रूप में अब हम आपके लिए कह सकते हैं आप कल्पना लोक में विचरण करनेवाले प्राणी हैं। आपका वास्तविक धरातल से कोई लेना देना नहीं है। रामलीला मैदान में कल भी आपने सुनहरे कल का छलावा […]