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राजनीति

मनमोहन जी! सुनहरे कल की कल्पना छलावा है

भारत के प्रधानमंत्री, आदरणीय मनमोहन सिंह जी। बतौर प्रधानमंत्री आपके लंबे शासनकाल के अनुभव के बाद एक नागरिक के रूप में अब हम आपके लिए कह सकते हैं आप कल्पना लोक में विचरण करनेवाले प्राणी हैं। आपका वास्तविक धरातल से कोई लेना देना नहीं है। रामलीला मैदान में कल भी आपने सुनहरे कल का छलावा दिखाया और बताया कि आपने कड़े आर्थिक फैसले लिए हैं। इन कड़े आर्थिक फैसलों से हमारा भविष्य सुरक्षित और उज्जवल होगा। इस बार एक नागरिक होने के नाते हम आपके किसी दावे पर कोई यकीन करने के लिए तैयार नहीं है। आप पर अविश्वास करने के लिए अब हम नागरिक जन के पास पर्याप्त कारण है। आप कहते है कि हम एफडीआई के माध्यम से सुनहरे कल की तरफ बढ़ रहे है. जबकि हमने तो आपको किसी भी तरफ बढते नहीं देखा. आप बढ़ेंगें भी कैसे आपकी दिशाएं साफ़ नहीं है. आपको याद होगा कि वर्ष 2002 में जब आप राज्यसभा में विपक्ष के नेता थे उस समय आपनें चेयरमैंन फ़ॉरेन ट्रेड कमिटी को एक पत्र लिखा था कि आपको तत्कालीन विदेश मंत्री नें यह आश्वासन दिया है कि रिटेल सेक्टर में फ़ॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट को मंजूरी नहीं दी जायेगी और जब आपकी बारी आयी तो आपने एफडीआई को रिटेल सेक्टर में मंजूरी दे दी. आखिर यह किसके लिए? उस अभिजात्य वर्ग के लिये जिन्हें चाहिए चकाचौंध बाजार, ऊँची-ऊँची इमारतें, मॉल, सेंसेक्स, चमकते शहर, बढती अमीरी या फिर उन गरीबों के लिए जो पंसारी की दूकान से हर हप्ते उधार राशन ले जाकर खाते है और महीना होने के पश्चात दिहाड़ी मिलने पर पंसारी के राशन का बिल चुकाते है. अगर आपके एफडीआई के माध्यम से गरीबी, बदहाली, अशिक्षा, बेरोजगारी और गाँव की बेजारी की तस्वीर नहीं बदलती जो कि दिख रही है. तो देश की 90 फीसदी जनता को आप गुमराह कर रहे है जब आप सत्ता में आये थे तब आपने यही कहा था कि 100 दिन में महंगाई दूर करेंगे इसी झासे में आकार हमने आपको वोट दिया। आप हमेशा ही कड़े फैसले लेने की बात करते है और कहते है कि इस फैसले से हमें सुनहरा कल मिलेगा.
लेकिन कल तो हमेशा ही हमारा कहा जा सकता है. पर वह आज कब आएगा जिसे आप सुनहरा बताते नहीं थकते. कल का वायदा बड़ा आसान है. इसी तरह आपने सुनहरे कल की बात करते हुए 12 त्न नेशनल ग्रोथ के नाम कोल माईन्स की बंदर-बांट करवा दी अब आप क्या उन कंपनियों द्वारा लूट ली गई देश की जनसंपदा को वापस करा सकते है? नहीं न तो एफडीआई से होने वाले संभावित नुकसान के पश्चात देश किसको जवाब तलब करेगा क्या पता कि कल आप कहाँ हों जहां कोई हिसाब पूछ सके सो अब देश को कल की सुनहरी तस्वीर दिखाकर भ्रमित मत करो आप तो आज की बताओ. क्या हमारा आज वास्तव में हमारा है? क्या आप कह सकते हो कि आज हमारा है? हमें तो यही समझ में आता है कि जब आज ही हमारा नहीं है तो कल हमारा कैसे हो जायेगा. आप हमें बताईये कि तेल और गैस का दाम बढाए जानें से सुनहरा कल हमारा होगा या फिर रिलायंस और एस्सार के मालिकों का होगा जैसा कि कोयला खदान आबंटन के मामले में देखा गया 12त्न नेशनल ग्रोथ तो छोडो देश को 10.7 लाख करोड़ की चपत लगी.आपके कृपापात्र उद्योगपतियों नें जनसंपदा को लूटकर अपनी तिजोरी भर ली.
होगा कोई आपके आर्थिक सुधार के अंधी उड़ान का कायल, किन्तु हमें नहीं लगता कि आपका आर्थिक सुधार देश के गरीबों, किसानों, आदिवासियों, मजलूमों, अशिक्षितों, बेरोजगारों के किसी काम आएगा उनका कल सुनहरा हो जाएगा, आज अगर देश की अर्थव्यवस्था डावाडोल है तो उसका कारण आर्थिक नहीं बल्कि राजनैतिक है. आपको याद है जब आपने न्यूक्लियर डील की जिद पकड़ी थी तो आपने कहा था कि इस डील से देशवासियों को सस्ते र्द पर और प्रचुर मात्रा में विजली मिलेगी देश उस कल का इन्तजार कल रहा है वह कल अभी तक नहीं आया सिंगरौली के ग्रामीणों को सुनहरे कल का सपना जो आपने दिखाया था वह अब संघर्ष में बदल गया है. इस पूरे इलाके में जब भारत और विदेशी उद्योगपति और कारपोरेट जगत के बाबू जो कि आपके आर्थिक सुधारों की मलाई काट रहे है, खनन और बिजली संयत्र लगाने में लगे है. अपनी परियोजनाओ को देखने के लिये यहाँ हेलीकाप्टर और अपने निजी जेट से पहुंचते है. हेलीपैड और हवाईअड्डे से परियोजना के कार्यालय तक आने के लिए दुनिया की सबसे बेहतरीन गाडिय़ों का इस्तेमाल करते है. उनको देखकर हम यह सोचने को मजबूर होते है कि कल किसका सुनहरा है? इन ग्रामीण मजदूरों का जो कि दिनभर के काम की एवज में 22 से 56 रुपये तक मुश्किल से पाते है. या जो अधिक हुनरमंद होते है उसे 85 से 125 रुपये तक मिलते हैं. और कतार लगाकर आपको वोट देकर सत्ता के शिखर पर पहुंचाते है. या फिर उनका जो गांव में धूल झोकते एसी गाडिय़ों में औसतन दिनभर में पांच हजार रुपये का तेल फूंक देते हैं. हेलिकाप्टर या निजी जेट के खर्चे तो बात ही मत करो आखिर सुनहरा कल किसका है? क्या आपको नहीं लगता कि आपने अपने ही पार्टी के स्लोगन कांग्रेस का हाथ आम आदमी के साथ को पलट दिया है? आपके इस आर्थिक सुधार से देश को क्या फायदा होने वाला है? आप कहेंगे बहुत फायदा होने वाला है किराना में एफडीआई से 1 करोड़ लोगों को नौकरियां मिलेंगी यानि वे 4 करोड़ लोग जो आज देश के विभिन्न चौक-चौराहों और गलियों में किराना की दुकान खोल कर अपना और अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे है उन्हें मजदूर बनाकर बड़े-बड़े शापिंग मॉल में नौकरी दिला दी जायेगी यानि उन किराना के दुकानदारों को दूकान मालिक से शापिंग मॉल का मजदूर बना दिया जाएगा. आप कहते है कि इससे किसानों का फायदा होगा।

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