सद्गुरु जग्गी वासुदेव यदि आप किसी चीज को देखते हैं और उसकी छाप संपूर्णता में चाहते हैं और यदि आप खुद को कम कर लेते हैं तो आप महसूस करेंगे कि जो कुछ आप देख रहे हैं, वह धीरे-धीरे बढऩा शुरू हो जाता है और फिर वह जीवंत हो जाता है। दर्शन शब्द का मतलब […]
Author: अमन आर्य
अशोक प्रवृद्ध भारतीय संस्कृति और दर्शन की परम्परा से गृहीत भारतीय वाङ्मय में गुरु को ब्रह्म से भी अधिक महत्व प्रदान किया गया है ।गुरु को प्रेरक, प्रथम आभास देने वाला, सच्ची लौ जगाने वाला और कुशल आखेटक कहा गया है, जो अपने शिष्य को उपदेश की वाणों से बिंध कर उसमें प्रेम की पीर […]
स्वामी विवेकानंद, जिंदगी को बहुत ही अध्यात्मिक तरीके से जीना पसंद करते थे। उनकी दिनचर्या पर गौर किया जाए तो उनका हर एक कार्य दुसरे से हटकर और विशेष होता था। आइए जानते है उनके जीने के मुख्य सफल सूत्र… स्वयं के प्रति ईमानदार रहें। खुद पर यकीन रखेंगे तो दुनिया जीत सकते हैं। इस […]
डॉ. अश्विनी महाजन भारत सरकार द्वारा वर्ष 2011 में हुई जनगणना के आर्थिक, सामाजिक और जाति की गणना के आंकड़े हाल ही में प्रकाशित किए गए हैं। ये आंकड़े भारत में गरीबों की वर्तमान दुर्दशा की कहानी बयान कर रहे हैं। चिंता का विषय केवल यह नहीं है कि गरीबों की हालत खराब है, बल्कि […]
जन-गण-मन मंगलदायक जय हे
नीलाक्ष विक्रम राष्ट्रगान के एक शब्द अधिनायक को लेकर नई बहस शुरू है। बहस और अदालती मामले पहले भी सुर्खियां बने हैं। इस बार राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद पर बैठे दो लोगों में इस मुद्दे पर मतभिन्नता है। अधिनायक शब्द हटाने या न हटाने को लेकर राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह और त्रिपुरा के राज्यपाल […]
मुम्बई हमले की पहली बलि चढी याकूब मेनन की
अशोक प्रवृद्ध सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा फांसी की सजा बरकरार रखे जाने के बाद 30 जुलाई गुरुवार की सुबह 1993 में हुए मुम्बई बम धमाकों के मामले में दोषी पाए गए याकूब मेमन को नागपुर की जेल में जेल आईजी, जेलर, मजिस्ट्रेट, डॉक्टर, जल्लाद के अतिरिक्त दो गवाह, दो कांस्टेबल मौजूदगी में फांसी दे दी […]
इनके संयोग से जन्म लिया, इनमें ही होना है विलीन। जीव, ब्रह्मा, प्रकृति, अजर है, सृष्टि की ये शक्ति तीन। है अरबों सौर परिवार यहां, उन पर भी जीवन संभव है। किंतु अपना विस्तीर्ण ब्रह्माण्ड, ये कहना अभी असंभव है। बोलो सूरज चंदा बोलो, तुम से भी बड़े सितारे हैं। सृष्टि से प्रलय, प्रलय से […]
घृणा, ईष्र्या, हिंसा, शत्रु, जिनको गले लगाता है।प्रेम, त्याग, सहचर्य, अहिंसा, मित्रों से नाक चढ़ाता है। घृणा है जननी युद्घों की, जो करती सृष्टि का अनिष्ट।जब हृदय में ये पनप उठे, तो काटती है संबंध घनिष्ठ। ये प्रेय मार्ग का गह्वर है, जिसे तू समझ रहा आनंद।घृणा पीओ, प्रेम को बांटो, कह गये ईशा और […]
कलाम ऐसे बने थे राष्ट्रपति
मे. वीरसिंह आर्य जिस समय कलाम देश के राष्ट्रपति थे उस समय मुझे उनके गृह जनपद स्थित उनके अपने घर को देखने का और उनके बड़े भाई से मिलने का अवसर मिला था। वह लम्हा मेरी जिंदगी का यादगार लम्हा साबित हुआ। आज भी मुझे जब उनके भाई के द्वारा बताये गये कुछ संस्मरण याद […]
धन की सनक से ध्वस्त होती शिक्षा
प्रो. एनके सिंह एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं पहले यह परंपरा थी कि शिक्षण संस्थाओं का नेतृत्व पेशेवर लोग करते थे। यदि व्यापारी इसमें निवेश भी करता था तो निवेश के बाद इसका प्रशासन और अकादमिक निर्णय लेने का अधिकार योग्य और पेशेवर लोगों को सौंप दिया जाता था। इसी के साथ […]