राजनीति कितनी गंदी है, नेता कितने गंदे हैं।तन के उजले मन के काले, काले इनके धंधे हैं।।इक दूजे पर सारे नेता, उंगली खूब उठाते हैं।खुद को समझें धुला दूध का, और को भ्रष्ट बताते हैं।।बुढिय़ा गुडिय़ा सांप नेवला, सब कुछ भाषण में बकते।कुत्ता कुतिया हाथी गदहा, कहने से भी ना थकते।।गंदी बोली भाषा ही […]
Author: अमन आर्य
क्या सचमुच असफल रहा अन्ना आन्दोलन
डॉ. राजेश कपूर अन्ना आन्दोलन की सबसे बड़ी विजय जनमत को जगाने की है। 96त्न जनमत का समर्थन एक अभूतपूर्व सफलता है जिसे नकारने के षड्यंत्र मीडिया पूरी ताकत से कर रहा है। देश की सबसे बड़ी त्रासदी है कि जनता सोई हुई है और सबसे बड़ी सफलता है इस सोये जनमत को जगाना। इसमें […]
14 व 15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि समय 12 बजे वह घड़ी थी जिसने भारत को युगांतरकारी परिवर्तन की ओर बढ़ा दिया था। पुराने से नये में प्रवेश करा दिया था। यही वो क्षण थे, जिसके लिए हमने सैकड़ों वर्ष तक संघर्ष किया था। आज वह संघर्ष अपने लक्ष्य पर पहुंच गया था। किंतु यह […]
राकेश कुमार आर्यअमरीका के एक प्रसिद्घ नाटककार ने महात्मा बुद्घ पर एक नाटक का फिल्मांकन करना चाहा, जिसके लिए उसने अखबारों में विज्ञापन दिया कि सिद्घार्थ के चरित्र के फिल्मांकन के लिए उसे योग्य व्यक्ति की आवश्यकता है। नाटककार के पास बहुत से नाम आये, जिस व्यक्ति का नाम उस नाटक के लिए चयनित किया गया, […]
आजादी की यह कैसी वर्षगांठ:चक्रपाणि
अखिल भारत हिंदू महासभा के राष्ट्रीय स्वामी चक्रपाणि जी महाराज ने कहा है कि देश आज अत्यंत निराशाजनक परिस्थितियों से गुजर रहा है। पूर्वोत्तर भारत में आसाम जो कभी प्राग्ज्योतिषपुर अर्थात जहां सूर्य की ज्योति सबसे पहले प्रकाशित होती है, वहां आज हिंदू समाज के लाखों लोग बेघर हुए पड़े हैं। स्वामी महाराज ने देश […]
Time to wait and watch
Finally,team anna decided to form a political party.after acting as the pressure group for more than a year,team anna decided to join politics after acknowledging the public opinion.The declaration came after ending their fast at Jantar Mantar,though this decision bring good news for more than half a nation,but at the same time,there are some people […]
दिल्ली स्थित अपने घर में खुदकुशी करनेवाली एयरहोस्टेस गीतिका शर्मा ने मरने से पहले अपने सुसाइड नोट में अपनी मौत के लिए सीधे सीधे हरियाणा के एक नेता गोपाल गोयल कांडा और अरुणा चड्ढा को जिम्मेदार ठहराया है। गीतिका शर्मा ने अपने सुसाइड नोट में सीधे तौर पर इन दोनों का नाम लेते हुए कहा […]
खुल गई मुट्ठी खाक की
टीम अन्ना द्वारा ‘व्यवस्था परिवर्तन’ का नारा लगाते-लगाते ‘सत्ता-परिवर्तन’ और सत्ता को अपने हाथ में लेने का निर्णय एक अंधी सुरंग में प्रवेश है, जहां से लक्ष्य के और दूर होते जाने की संभावना बढ़ती जाती है। सरकार और दूसरे राजनीतिक दल इस पूरी टीम को इसी चुनावी जाल में फंसाने में सफल रहे क्योंकि […]
पत्रकारिता पेशे में अपेक्षा के अनुरूप पैसा नहीं मिलने और कामकाज की स्वतंत्रता के अभाव में देश में प्रशिक्षित होने के बाद भी एक चौथाई पत्रकार पत्रकारिता को अपना पेशा नहीं बनाते। मीडिया स्टडीज ग्रुप और जन मीडिया जर्नल ने भारतीय जनसंचार संस्थान के 1984-85 से लेकर 2009-10 शैक्षणिक सत्र के छात्रों की प्रतिक्रिया के […]
मीडिया में गिरा अन्ना का बाजार भाव
अप्रैल 2011, अगस्त 2011 और अब जुलाई-अगस्त 2012। अन्ना के आंदोलन के करीब 16 महीने के उतार चढ़ाव में टेलीवीजन मीडिया ने अन्ना के आंदोलन का बाजार भाव बढ़ाया भी और गिरा भी दिया। अगस्त 2011 में जहां अन्ना की अगस्त क्रांति को मीडिया ने अपने प्राइम टाइम का 90 फीसदी कवरेज दिया था वहीं […]