अंग्रेजों के शासन से मुक्ति के लिए जिन स्वदेश प्रेमी राष्ट्रभक्तों ने सतत संघर्ष किया-उनमें महात्मा गांधी, महामना पं. मदनमोहन मालवीय, लाला लाजपतराय, राजर्षि पुरूषोत्तम दास टंडन की श्रंखला में ही एक विभूति थे लाला हरदेवसहाय। इस महान विभूति ने अपना सर्वस्व स्वदेश, स्वदेशी व स्वाधीनता के लिए जीवन अर्पित कर भारतीय स्वाधीनता संग्राम के […]
Author: अमन आर्य
भारत-चीन सीमा विवाद जल्द सुलझ सकता है
रक्षामंत्री एके एंटोनी ने कहा है कि चीन के साथ सीमा विवाद संबंधी विवाद को सुलझाने की बातचीत अंतिम चरण में है। रक्षा लेखा विभाग की वार्षिकी के मौके पर आयोजित समारोह में बोलते हुए रक्षामंत्री ने कहा कि हर कोई इस तथ्य से परिचित है कि कई दौर की बातचीत के बाद भी सीमा […]
देश की स्थिति सचमुच चिंताजनक : चक्रपाणि
अखिल भारत हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणि जी महाराज ने कहा है कि वर्तमान समय में मनमोहन सिंह देश के सबसे असफल प्रधानमंत्री साबित हुए हैं। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति कभी अपने विवेक से निर्णय ही नही ले पाया और जिसे एक रिमोट से एक महिला द्वारा दूर से चलाया गया उससे […]
एक सनकी और चिड़चिड़े स्वभाव वाला तुर्क मियां लूटेरा था बख्तियार खिलजी. इसने 1199 इसे जला कर पूर्णत: नष्ट कर दिया। उसने उत्तर भारत में बौद्धों द्वारा शासित कुछ क्षेत्रों पर कब्ज़ा कर लिया था. एक बार वह बहुत बीमार पड़ा उसके हकीमों ने उसको बचाने की पूरी कोशिश कर ली। मगर वह ठीक नहीं […]
राकेश कुमार आर्यअक्टूबर का महीना कई अर्थों में महत्वपूर्ण है, इस माह के प्रारंभ में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी व देश के सबसे अधिक आदरणीय प्रधानमंत्री रहे लालबहादुर शास्त्री की जयंती दो अक्टूबर को आती है, जबकि इसी माह के अंत में देश के लौहपुरूष सरदार बल्लभ भाई पटेल की जयंती और लौह महिला के नाम […]
गतांक से आगे….. जिसका परिणाम निकला कि हमारे संविधानविदों ने और संविधान निर्माताओं ने अस्पृश्यता को देश और समाज के लिए एक कोढ़ माना। इसलिए अस्पृश्यता को मिटाने की और पंथ जाति व लिंग के आधार पर किसी प्रकार की असमानता का व्यवहार न होने देने की दिशा में समाज के लिए एक क्रांतिकारी कदम […]
प्रमोद भार्गव हमारे देश में बीते चौसठ सालों के भीतर जिस तेजी से कृत्रिम, भौतिक और उपभोक्तावादी संस्कृति को बढावा देने वाली वस्तुओं का उत्पादन बढ़ा है उतनी ही तेजी से प्राकृतिक संसाधनों का या तो क्षरण हुआ है या उनकी उपलब्धता घटी है। ऐसे प्राकृतिक संसाधनों में से एक है पानी। ‘जल ही जीवन […]
दिनेश पंतइस वर्ष देश में उम्मीद से कम और अनियमित वर्षा ने ग्लोबल वार्मिंग के बढ़ते खतरे की चिंता को बढ़ा दिया है। विकास और उन्नति के नाम पर औद्योगिकीकरण ने पर्यावरण को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाया है। निवेश के बढ़ते अवसर ने गांव को भी तरक्की के नक्षे पर मजबूती से उकेरा है। गांवों […]
सिद्धार्थ शंकर गौतम18 सितम्बर की शाम जैसे ही यह खबर राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खी बनी कि ममता अपने तमाम मंत्रियों के साथ संप्रग सरकार 2 से समर्थन वापस लेंगी, केंद्र की राजनीति में उन्हें मनाने से लेकर अन्य जोड़-तोड़ के समीकरणों पर माथापच्ची होने लगी। इसी तारतम्य में बुधवार 19 सितम्बर को कांग्रेस कोर कमेटी […]
नेताओं के रंग
नेताओं के रंग निराले। कुरसी के सारे मतवाले।।हाथी, हाथ, साईकिल वाले। वोटर को सब चाहने वाले।।ऐसा राजनीति का ड्रामा। मचा रहे नेता हंगामा।।वोटर भी चालाक बड़ा है। उसे चाहिए दारू दामा।।छुटभैये नेतन की चांदी। सभी बने हैं गांधीवादी।।देश में लूटतंत्र हावी है। जब से पाई है आजादी।।गाफिल कहें चुनावी चक्कर। खेल खिलाता है जी भर […]