राकेश कुमार आर्यजब नक्सलवादी हिंसा 6 मार्च 2010 को छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में हमारे 76 जवानों को शहीद कर दिया तो उसके पश्चात सारा देश इस हिंसा के विरूद्घ आवाज उठाने लगा कि इन हिंसक और अत्याचारी नक्सली राक्षसों के विरूद्घ देश की सुरक्षा के हित में कठोर कदम उठाये जायें। परंतु हमारे गृहमंत्री पी […]
Author: अमन आर्य
सोनिया गांधी के दामाद का फर्जीवाड़ा
रॉबर्ट वाड्रा ने सैकड़ों करोड़ की संपत्ति अर्जित की है। कहां से आए इतने पैसे? पिछले चार सालों में रॉबर्ट वाड्रा ने एक के बाद एक 31 संपत्तियां खरीदी हैं जिसमें से अधिकांश दिल्ली और उसके आस-पास के इलाकों में हैं। इन संपत्तियों को खरीदने में वाड्रा को करोड़ो रुपए चुकाने पड़े हैं।रॉबर्ट वाड्रा और […]
माटी-मानुष के लिए एफडीआई का विरोध
तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी का वर्तमान केंद्र सरकार से समर्थन वापसी का निर्णय अपने आप में न केवल एक अभूतपूर्ण निर्णय था अपितु 1 अक्टूबर को दिल्ली की जंतर-मंतर पर उनके द्वारा की गयी रैली में उमड़ी भीड़ को देखकर यह अंदाजा लगाया जा सकता है आज भी उनके लिए माटी-मानुष कितना महत्वपूर्ण है […]
सिद्धार्थ शंकर गौतमवर्तमान पीढ़ी के लिए गांधी दर्शन और उनके आदर्शों पर चलना ठीक वैसा ही है जैसे नंगे पैर दहकते अंगारों पर चलना। चूंकि गांधी द्वारा दिखाया गया सत्य और नैतिकता का मार्ग अत्यंत दुष्कर है व बदलते सामाजिक व आर्थिक ढांचे में खुद को समाहित नहीं कर सकता लिहाजा यह उम्मीद बेमानी ही […]
भारतीय संस्कृति, दयानंद और संविधान के मूल अधिकारगतांक से आगे संसार में क्षुद्र से क्षुद्र कोई ऐसा प्राणी न मिलेगा, जो अपनी गतिविधि में प्रतिबंध को पसंद करे। सभी चाहते हैं कि उनकी गति निर्वाध रहे। वेद में मार्ग के संबंध में प्रार्थना है कि वह अनृक्षर अर्थात कांटों से रहित हो। कांटे मार्ग की बाधा […]
राकेश कुमार आर्यभगवान कृष्ण की गीता और हमारे वेद व्यक्ति को निष्काम कर्म का सदुपदेश देते हैं। निष्काम कर्म वे हैं जिन्हें व्यक्ति लोककल्याण के भाव से करता है और करने के बाद भूल जाता है। जब निष्कामता का यह भाव शासन का आधार बन जाता है तो वह शासन लोककल्याण कारी शासन बन जाता […]
आचार्य ब्र.नंदकिशोरपिता- ‘पा रक्षणे’ धातु से ‘पिता’ शब्द निष्पन्न होता है। ‘य: पाति स पिता’ जो रक्षा करता है, वह पिता कहलाता है। यास्काचार्य प्रणीत निरूक्त में लिखा है-‘पिता पाता वा पालयिता वा’-नि. 4। 21। ”पिता-गोपिता”-नि. 6। 15 पालक, पोषक और रक्षक को पिता कहते हैं।पिता की महिमा व गरिमावैदिक शास्त्रों, मनुस्मृति वाल्मीकि रामायण, महाभारत […]
राजेश कश्यपआजकल राष्ट्रभाषा हिन्दी बेहद नाजुक दौर से गुजर रही है। वैश्विक पटल पर अपनी प्रतिष्ठा को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए विभिन्न चुनौतियों से जूझ रही हिन्दी के समक्ष भारी धर्मसंकट खड़ा हो चुका है। इस धर्मसंकट का सहज अहसास भारत सरकार के गृह मंत्रालय और राजभाषा विभाग की सचिव वीणा उपाध्याय द्वारा गतवर्ष […]
राजनीति के रंग
जूते-घूंसे राजनीति ओछी गंदी है, उलटी सीधी बात चलें।कहीं पै जूते फिकते देखो, कहीं पै घूंसे लात चलें।।राजनीति है बड़ी निकम्मी, घात और प्रतिघात चलें।मुश्किल सच्चे इंसानों की, बोलो किसके साथ चलें।।कुरसी के जयकारेभाषण में कहते हैं नेता, देश के हम रखवाले हैं।मतदाता के हाथ जोड़ते, सब नेता मतवारे हैं।।नेताओं को प्यारी कुरर्सी, कुरसी को […]
सुशासन बाबू के किले में सुरंग
ढोल का पोल खुल गया है। यह कहावत बिहार में चरितार्थ हो रहा है। नीतीश कुमार के सुशासन के गुब्बारे में लगता है कि पिन लग गई है। ऐसा इसलिए कि मजबूत किलेबंदी के बावजूद नीतीश कुमार की लोकप्रियता के मिथ आजकल राष्ट्रीय मीडिया में टूट कर बिखर चुका है। इसकी पृष्ठभूमि पहले से ही […]