जब एक व्यक्ति ने हमसेसमाजवाद का प्रश्न उठायातो हमने उसे बताया, आबाद समाजऔर बर्बाद समाज के अलावातीसरा भी है एक समाजजो है दोनों का उस्ताद,उसे ही समाजवाद कहते हैंजिसमें केवल नेता लोग रहते हैं।सर्वेक्षणबाढ़पीडि़तों की सहायतार्थ जनता के हाथ जोडऩे लगेऔर स्वयं दौरे पर दौर व हवाई सर्वेक्षण करसत्ताकोष का भंडा फोडऩे लगे। -गाफिल स्वामी
Author: अमन आर्य
विकास कुमार गुप्ताहमारा देश 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ। लेकिन हमारी जनता आजाद गुलाम की मानिंद जिन्दगी बसर करने पर मजबूर है, और यह सब हमारी सरकार की कुनीतियों एवं अनदेखी का परिणाम है। हमारे थाने अंग्रेजों के समय के थानों से भी खतरनाक हैं वो इसलिए क्योंकि अंग्रेजों की लाठी खाने पर कम […]
गाजियाबाद के पूर्व मेयर दिनेशचंद गर्ग को यहां के गणमान्य लोगों ने अपनी भावपूर्ण श्रद्घांजलि अर्पित की। उनकी अरिष्टि पर पहुंचे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा कि श्री गर्ग जैसे शालीन और भद्र पुरूष समाज की शोभा होते हैं, उनके रहते व्यक्ति स्वयं को गौरवान्वित अनुभव करते हैं। श्री सिंह ने कहा […]
हिंदुस्थान निर्माण दल की गोष्ठी संपन्न
गाजियाबाद। हिंदुस्थान निर्माण दल की ओर से यहां हनुमान मंदिर में शिवाजी की जयंती पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया।इस अवसर पर हिंदुस्तान निर्माण दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. हरपाल सिंह चौहान ने कहा कि जो लोग किसी भी प्रकार से देशद्रोह की गतिविधियों में संलिप्त हैं उन लोगों का सामाजिक बहिष्कार किया जाना […]
राकेश कुमार आर्यहिंदू पद पादशाही के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म 19 फरवरी 1630 को हुआ था। यह अजीब संयोग है कि 19 फरवरी को शिवाजी का जन्मदिवस है तो 20 फरवरी (1707) औरंगजेब का मृत्यु दिवस है। आजीवन औरंगजेब को नाकों चने चबाने वाले शिवाजी महाराज के कारण ही मुगल साम्राज्य की नींव […]
शिवकुमार गोयलश्री वि.सं. विनोद जी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के पत्रकारों के पितामह के रूप में पूरे देश में चर्चित रहे। वे एक ऐसे तेजस्वी, निर्भीक व मिश्नरी पत्रकार थे, जिन्होंने अपनी लेखनी के माध्यम से न केवल स्वस्थ पत्रकारिता के आदर्श उपस्थित किये अपितु राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए समय समय पर आने […]
सभी प्राणियों के जीवन का आधार-ओउम्
दीनानाथ बत्रा‘ऊँ’ में जादू है, प्रभाव है, ऐसा गुण है, जो उसका जाप करने वाले साधक का मन एकाग्र और वश में कर देता है। उसके गायन से हमारी भावनाएं, हमारे विचार एक सामंजस्य पूर्ण स्थिति में पहुंच जाते हैं, उसके द्वारा आत्मा को शांति और विश्रांति मिलती है, हृदय उस दशा में पहुंच जाता […]
एक: अभागा(?) भारत संसार का, कोई भी देश, भाषा की दृष्टि से भारत जैसा भाग्यवान नहीं है; पर साथ-साथ यह भी जान ले कि संसार का कोई भी देश भारत जैसा अभागा भी नहीं है, मानसिक गुलाम नहीं है, मतिभ्रमित नहीं है, हीन ग्रंथि से पीडित नहीं है, और पश्चिमी रंग में रँगा नहीं है। […]
देश-द्रोह का बदला-4
शांता कुमारगतांक से आगे….वह सामने से हट गया। नरेन्द्र भागकर प्राण बचाने का प्रयत्न करने लगा। अब तक नरेन्द्र काफी दूर निकल गया था। कन्हाई भी अपनी पिस्तौल से बिलकुल तैयार था। नरेन्द्र को भागते देख वह भूखे सिंह की भांति उसकी ओर लपका। नरेन्द्र जोर जोर से चिल्लाता शोर मचाता भाग रहा था। मार […]
व्यंजन अक्षर अभी तक हमने हिंदी वर्णमाला के स्वर कहे जाने वाले अक्षरों के विषय में कुछ समझने का प्रयास किया है। अब हम व्यंजनों के विषय में चर्चा करते हैं। जिन वर्णों को बोलते समय स्वरों की सहायता लेनी पड़े उन्हें व्यंजन कहते हैं। इनकी संख्या 33 है। ये स्वरों की सहायता से बोले […]