गतांक से आगे….दुनिया ने अब तक दो महायुद्घ देखे हैं। तीसरा महायुद्घ कब होगा, यह तो फिलहाल कहना कठिन है। लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि तीसरा महायुद्घ पानी के लिए होगा। चीन के चार सौ नगरों में पानी का अभाव है। चीन अपने पानी की कमी को पूरा करने के लिए हिमालय के ग्लेशियरों […]
Author: अमन आर्य
आज का चिंतन-11/02/2014
हर कोई नहीं पा सकता अग्निधर्मा लोगों का साथ – डॉ. दीपक आचार्य 9413306077 dr.deepakaacharya@gmail.com एक-दूसरे के साथ रहना और निभाना वैचारिक और व्यवहारिक धरातल पर निर्भर है। जिन लोगों में वैचारिक समानता होती है, जिनका व्यवहार, चरित्र और कर्म समान है उनमें प्रतिस्पर्धा भी होती है, प्रतिद्वन्दि्वता भी, और सजातीय आकर्षण- विकर्षण भी। कई लोग ऎसे हैं जो […]
आज का चिंतन-09/02/2014
मोहपाश में नज़रबंद न रहें दुनिया को जानें-पहचानें – डॉ. दीपक आचार्य 9413306077 dr.deepakaacharya@gmail.com यों तो संसार और मुक्ति को एक-दूसरे का विरोधाभासी कहा जाता है लेकिन सत्य यह भी है कि संसार को जाने बिना मुक्ति संभव नहीं है। जहाँ संसार को जान लेने और समझ लेने की यात्रा का अंत होता है वहीं से […]
आज का चिंतन-08/02/2014
संसार भरा पड़ा है दुःख देने वाले नालायकों से – डॉ. दीपक आचार्य 9413306077 dr.deepakaacharya@gmail.com संसार में चित्त और जीवन को प्रभावित करने वाले दो ही कारक मुख्य हैं – सुख और दुःख। सुख प्राप्त होने पर मनुष्य खुश होता है जबकि दुःख प्राप्त हो जाने की स्थिति में वह खिन्न हो उठता है। हर मनुष्य […]
गतांक से आगे…हिंद महासागर में इंडोनेशिया और उसके आसपास के टापुओं से मछलियां और चीन, जापान तथा अन्य पूर्वी एशिया के देशों के खाने में उपयोग होने वाले जलचर इतनी बड़ी संख्या में पकड़े गये हैं कि उनका सफाया हो गया है। इसे दुनिया में डीप फिशिंग क्षेत्र कहा जाता है। विश्व में यह भाग […]
आज का चिंतन-06/02/2014
त्याग और सेवा ही है शाश्वत संबंधों की बुनियाद – डॉ. दीपक आचार्य 9413306077 dr.deepakaacharya@gmail.com संबंध दो प्रकार के हैं। एक सम सामयिक और क्षणिक संबंध होते हैं जिनमें आकस्मिक कार्य या स्वार्थ से लोग एक-दूसरे से जुड़ जाया करते हैं और कार्य या स्वार्थ सध जाता है तो संबंध अपने आप समाप्त हो जाते […]
वीर सावरकर के आदर्श शिवाजी थे
प्रो. देवेन्द्र स्वरूपपहला 30 अगस्त 1911 को लिखा दूसरा 13 नवंबर 1913 को तीसरा 10 सितंबर 1914 को चौथा 2 अक्टूबर 1917 को पांचवा 24 जनवरी 1920 को छठा 31 मार्च 1920 को। क्या उन्होंने कभी सोचा कि सावरकर के बार बार दया की याचिका करने पर भी अंग्रेज शासकाकें ने उनको जेल से रिहा […]
आज का चिंतन-05/02/2014
ज्ञान बाँटने के बाद छोड़ दें संसार की सेवा के लिए – डॉ.दीपक आचार्य 9413306077 dr.deepakaacharya@gmail.com ज्ञान ऎसा कारक है जिसे अपने पास नहीं रखकर उन लोगों को बांट दिया जाना चाहिए जो इसे चाहते हैं। अपने पास जो कुछ है वह समुदाय और संसार का है और इसलिए हमेशा यह ध्यान रखना चाहिए कि […]
आज का चिंतन-03/02/2014
आदर-सम्मान की भूख स्वाभाविक है मगर इसके लायक तो बनें – डॉ. दीपक आचार्य 9413306077 dr.deepakaacharya@gmail.com आजकल सभी तरफ सम्मान के भूखों और आदर के प्यासों की तादाद बढ़ती ही जा रही है। जो इसके लायक हैं वे भी इस दौड़ में आगे ही आगे भागते जा रहे हैं और जो लायक नहीं हैं वे भी […]
डा. इन्द्रा देवी शब्दकोश का सबसे मार्मिक शब्द मॉं है। मातृ, मदर, आई बेबे, माती, नैने, अम्मी आदि इसके पर्यायवाची हैं। पृथ्वी को माता और आकाश को पिता कहा जाता है। पृथ्वी पर रहने वाले समस्त जन इनके पुत्र हैं राष्ट्र भक्ति का परिचय भी भारत माता के रूप मेें ही देते है। स्वामी दयानन्द […]