-जनता के हित के लिए लाया जाने वाला जनहित वाद है। जहां केाई व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह के मौलिक अधिकारों के अतिक्रमण के कारण विधिक क्षति होती है, और वे सामाजिक या आर्थिक अयोग्यता के कारण न्यायालय जाने में असमर्थ हैं। तो कोई भी व्यक्ति अनुच्छेद-32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय व अनुच्छेद-226 के तहत […]
Author: अमन आर्य
आज का चिंतन-02/04/2014
हम सब कर रहे हैं आत्महत्या किश्तों-किश्तों में – डॉ. दीपक आचार्य 9413306077 dr.deepakaacharya@gmail.com अपने जीवन के महत्त्व से अपरिचित होकर आजकल हम जो कुछ कर रहे हैं वह जीवन न होकर मृत्यु का मार्ग है जिस पर हम सारे के सारे बिना सोचे-समझे आँखें मूँद कर आगे बढ़ते ही चले जा रहे हैं। हमारे […]
आज का चिंतन-31/03/2014
आओ प्रकृति के साथ मनाएँ सनातन नव वर्ष अपना – डॉ. दीपक आचार्य 9413306077 dr.deepakaacharya@gmail.com यों तो साल भर में अनेक नव वर्ष विभिन्न स्वरूपों में आते-जाते रहते हैं जिनका अपना-अपना वजूद है, परंपराएं हैं और मनाने के अंदाज हैं। एक वे नव वर्ष हैं जो इंसान अपनी सहूलियत से स्थापित करता है और उसे मनाकर आनंद […]
वर्षा शर्मामूसासी परिवार का सदस्य केला बहुत प्राचीन फल है। 326 ईसा पूर्व में सिंधु घाटी में केले का उल्लेख मिलता है। इसका वनस्पति नाम मूसा पारादिसिआका लिनिअस है। हमारे देश में यह सर्वत्र तराई वाले स्थानों, मंदिरों, धार्मिक स्थानों में खूब मिलता है। मांगलिक कार्यों में इसकी बड़ी उपयोगिता है। यह धार्मिक कृत्यों तोरण, […]
शिक्षा एक बार फिर नही बनी चुनावी मुद्दा
रमेश पाण्डेयशिक्षा देश और समाज की उन्नति का आईना हुआ करती है। भारत की आजादी के 65 वर्ष बाद यहां की आबादी साढ़े तीन गुना बढ़कर 1.20 अरब हो गई है। बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षकों के करीब छह लाख पद रिक्त हैं। सर्व शिक्षा अभियान पर हर साल 27 हजार करोड़ रुपए खर्च किए […]
आज का चिंतन-28/03/2014
न पालें किसी से शत्रुता प्रतिशोध देता है अंधकार – डॉ. दीपक आचार्य 9413306077 dr.deepakaacharya@gmail.com आमतौर पर लोग अपने भ्रमों और आशंकाओं में जीते हुए किसी न किसी को अपना शत्रु मान लिया करते हैं और फिर उसके साथ वैचारिक प्रदूषण तथा मानसिक ध्रुवीकरण को अंजाम देने के लिए जी तोड़ कोशिशों में लगे […]
राकेश कुमार आर्यभारत के पूर्व कृषि मंत्री रहे डा. बलराम जाखड़ ने कहा था कि ”गाय का गोबर मल नही खाद है, जिसका मूल्य भारतीय किसान भली प्रकार जानता है। कृषि वैज्ञानिकों ने अन्वेषण करने के उपरांत यह निष्कर्ष निकाला है कि गोबर के सेन्द्रिय खाद के प्रयोग से भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ती है। […]
आज का चिंतन-27/03/2014
समाज और देश सर्वोपरि समय, धन या श्रम का दान करें – डॉ. दीपक आचार्य 9413306077 dr.deepakaacharya@gmail.com समाज सेवा से लेकर देश और दुनिया भर की बातें करने वालों की हमारे यहाँ भरमार है। उपदेशकों और निर्देशकों की बाढ़ आयी हुई है। सब अपने-अपने ढंग से समाज के नवनिर्माण और देश की बातें करते हैं। समाज के […]
मुजफ्फर हुसैनमांसाहार के दो रूप हैं-एक तो उसका भक्षण करना और दूसरा उसका व्यापार करना। अपने स्वाद अथवा उदरपूर्ति के लिए उसका उपयोग अत्यंत सीमित और निजी कारोबार में लग गये। नॉर्वे, स्वीडन, डेनमार्क यानी स्कैंडेनिवयन देश दूध और मांस के धंधे में अग्रणी बने। बाद में ऑस्टे्रलिया और न्यूजीलैंड भी इस श्रेणी में आ […]
सामान्य ज्ञान-6
-मूर्ख शिष्य को पढ़ाने से दुष्टस्त्री का भरण पोषण करने से और दुखी जनों के साथ व्यवहार करने से बुद्घिमान मनुष्य भी दुख उठाता है।-कटु भाषिणी और दुराचारिणी स्त्री, धूर्त स्वभाव वाला मित्र उत्तर देने वाला नौकर और सर्प वाले घर में रहना-ये सब बातें मृत्यु स्वरूप है, इसमें कोई संदेह नही है।-बुद्घिमान मनुष्य को […]