दुनिया का सबसे महंगा चुनाव और भारतीय अर्थव्यवस्था

election-2024 (1)

– ललित गर्ग –
विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत के लोकसभा चुनाव 2024 अनेक दृष्टियों से यादगार, चर्चित, आक्रामक एवं ऐतिहासिक होने के साथ-साथ अब तक का सबसे महंगा एवं दुनिया का सबसे खर्चीला चुनाव है। सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज की हालिया रिपोर्ट के अनुसार इस बार का चुनावी खर्च एक लाख बीस हजार करोड़ रुपये के खर्च के साथ दुनिया का सबसे महंगा चुनाव होने की ओर अग्रसर है। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के खर्च की तुलना में इस बार दुगुना खर्च होगा। चुनाव प्रक्रिया अत्यधिक महंगी एवं धन के वर्चस्व वाली होने से राजनीतिक मूल्यों का विसंगतिपूर्ण एवं लोकतंत्र की आत्मा का हनन होना स्वाभाविक है। चुनाव जनतंत्र की जीवनी शक्ति है। यह राष्ट्रीय चरित्र का प्रतिबिम्ब होता है। जनतंत्र के स्वस्थ मूल्यों को बनाए रखने के लिए चुनाव की स्वस्थता, पारदर्शिता, मितव्ययता और उसकी शुद्धि अनिवार्य है। चुनाव की प्रक्रिया गलत होने पर लोकतंत्र की जड़े खोखली होती चली जाती हैं। करोड़ों रुपए का खर्चीला चुनाव, अच्छे लोगों के लिये जनप्रतिनिधि बनने का रास्ता बन्द करता है और धनबल एवं धंधेबाजों के लिये रास्ता खोलता है। इन चुनावों में अर्थ का अनुचित एवं अतिशयोक्तिपूर्ण खर्च का प्रवाह जहां चिन्ता का कारण बन रहा है, वहीं समूची लोकतांत्रिक प्रणाली को दूषित करने का सबब भी बन रहा है। इस तरह की बुराई एवं विकृति को देखकर आंख मंूदना या कानों में अंगुलियां डालना दुर्भाग्यपूर्ण है, इसके विरोध में व्यापक जनचेतना को जगाना जरूरी है। यह समस्या या विकृति किसी एक देश की नहीं, बल्कि दुनिया के समूचे लोकतांत्रिक राष्ट्रों की समस्या है।
18वीं लोकसभा चुनाव में हर राजनैतिक दल अपने स्वार्थ की बात सोच रहा है तथा येन-केन-प्रकारेण ज्यादा से ज्यादा वोट प्राप्त करने की अनैतिक तरकीबें निकाल रहा है। एक-एक प्रत्याशी चुनाव का प्रचार-प्रसार करने में करोड़ों रुपयों का व्यय करता है। यह धन उसे पूंजीपतियों, उद्योगपतियों, राजनीतिक दलों एवं प्रायोजकों से मिलता है। चुनाव जीतने के बाद वे उद्योगपति उनसे अनेक सुविधाएं प्राप्त करते हैं। इसी कारण सरकार उनके अनुचित दबाव के विरुद्ध कोई आवाज नहीं उठा पाती और अनैतिकता एवं आर्थिक अपराध की परम्परा को सिंचन मिलता रहता है। यथार्थ में देखा जाए तो जनतंत्र अर्थतंत्र बनकर रह जाता है, जिसके पास जितना अधिक पैसा होगा, वह उतने ही अधिक वोट खरीद सकेगा। लेकिन इस तरह लोकतंत्र की आत्मा का ही हनन होता है, इस सबसे उन्नत एवं आदर्श शासन प्रणाली पर अनेक प्रश्नचिन्ह खड़े होते हैं।
सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज रिपोर्ट के मुताबिक आमतौर पर चुनाव अभियान के लिए धन अलग-अलग स्रोतों से अलग-अलग तरीको से उम्मीदरवारों और राजनीतिक दलों के पास आता है। राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को चुनाव खर्च के लिए मुख्य रूप से रियल इस्टेट, खनन, कारपोरेट, उद्योग, व्यापार, ठेकेदार, चिटफण्ड कंपनियां, ट्रांसपोर्टर, परिवहन ठेकेदार, शिक्षा उद्यमकर्ता, एनआआई, फिल्म, दूरसंचार जैसे प्रमुख स्रोत है। इस साल डिजिटल मीडिया द्वारा प्रचार बहुत ज्यादा हो रहा है। राजनीतिक दल पेशेवर एजेंसिया की सेवाएं ले रहे हैं। इनसे सबसे अधिक राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों द्वारा प्रचार अभियान, रैली, यात्रा खर्च के साथ-साथ सीधे तौर पर गोपनीय रूप से मतदाताओं को सीधे नकदी, शराब, उपहारों का वितरण भी शामिल है। देश में 1952 में हुए पहले आम चुनाव की तुलना में 2024 में 500 गुणा अधिक खर्च होने का अनुमान है। प्रति मतदाता 6 पैसे से बढ़कर आज 52 रुपये खर्च होने का अनुमान है। हालांकि रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव में होने वाले वास्तविक खर्च और अधिकारिक तौर पर दिखाए गए खर्चे में काफी अंतर है। रिपोर्ट के मुताबिक 2019 के लोकसभा चुनाव में देश के 32 राष्ट्रीय और राज्य पार्टियों द्वारा आधिकारिक तौर पर सिर्फ 2,994 करोड़ रुपये का खर्च दिखाया। इनमें दिखाया गया कि राजनीतिक दलों ने 529 करोड़ रुपये उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने के लिए दिए थे। रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव में राजनीतिक दलों द्वारा निर्वाचन आयोग में पेश खर्च का ब्यौरा और वास्तविक खर्च के साथ-साथ उम्मीदवारों द्वारा अपने स्तर पर किए जा रहे खर्चे में काफी अंतर है। अमेरिकी चुनाव पर नजर रखने वाली एक वेबसाइट के रिपोर्ट का हवाला देते हुए, सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज के अध्यक्ष एन भास्कर राव ने कहा कि यह 2020 के अमेरिकी चुनावों पर हुए खर्च के लगभग बराबर है, जो 14.4 बिलियन डॉलर यानी 1 लाख 20 करोड़ रुपये था। उन्होंने कहा कि दूसरे शब्दों में कहें तो भारत में 2024 में दुनिया का सबसे बड़ा चुनाव अब तक का सबसे महंगा चुनाव साबित होगा।
भारत में होने वाले चुनाव में हो रहे बेसुमार खर्च की तपीश समूची दुनिया तक पहुंच रही है। समूची दुनिया के तमाम देशांे में भारत के चुनाव को न केवल दम साध कर देखा जा रहा है बल्कि इन चुनाव के खर्चों एवं लगातार महंगे होते चुनाव की चर्चा भी पूरी दुनिया में व्याप्त है। लोकसभा चुनाव में भाजपा, कांग्रेस, सपा, बसपा, तूणमूल कांग्रेस आदि दलों एवं उनके उम्मीदावारों ने मतदाताओं को प्रभावित करने के लिये तिजोरियां खोल दी है। यह चुनाव राष्ट्रीय मसलों के मुकाबले राजनीतिक दलों के हित सुरक्षित रखने के वादे पर ज्यादा केंद्रित लग रहा है और टकराव के मुद्दे थोड़े ज्यादा तीखे हैं। लेकिन अगर मुद्दों से इतर अभियानों की बात करें तो यह खबर ज्यादा ध्यान खींच रही है कि इस बार चुनाव अब तक के इतिहास में सबसे खर्चीला साबित होने जा रहा है। इस चुनावों के अत्यधिक खर्चीले होने का असर व्यापक होगा। चुनाव के तवे को गर्म करके अपनी रोटियां संेकने की तैयारी में प्रत्याशी वह सब कुछ कर रहे हैं, जो लोकतंत्र की बुनियाद को खोखला करता है। काफी लंबे और जटिल प्रक्रिया के तहत चलने वाले चुनाव में जनता के बीच समर्थन जुटाने के लिए उम्मीदरवार जितने बड़े पैमाने पर अभियान चलाते हैं, उसमें उन्हें स्थानीय कार्यकर्ताओं से लेकर सामग्रियों और जनसंपर्कों तक के मामले में कई स्तरों पर खर्च चुकाने पड़ते हैं। यों किसी भी देश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत होने वाले चुनावों में ऐसा ही होता है, लेकिन भारत में इसी कसौटी पर खर्च में कई गुना ज्यादा होना चिन्ता का सबब बनना चाहिए।
दुनिया की आर्थिक बदहाली एवं युद्ध की विभीषिका से चौपट काम-धंधों एवं जीवन संकट में लोकसभा के चुनाव कहां कोई आदर्श प्रस्तुत कर पा रहे हैं? इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है, जो लोग चुनाव जीतने के लिए इतना अधिक खर्च कर सकते हैं तो वे जीतने के बाद क्या करेंगे, पहले अपनी जेब को भरेंगे, अर्थव्यवस्था पर आर्थिक दबाव बनायेंगे। और मुख्य बात तो यह है कि यह सब पैसा आता कहां से है? कौन देता है इतने रुपये? धनाढ्य अपनी तिजोरियां तो खोलते ही है, कई कम्पनियां हैं जो इन सभी चुनावी दलों एवं उम्मीदवारों को पैसे देती है, चंदे के रूप में। चन्दा के नाम पर यदि किसी बड़ी कम्पनी ने धन दिया है तो वह सरकार की नीतियों में हेरफेर करवा कर लगाये गये धन से कई गुणा वसूल लेती है। इसीलिये वर्तमान देश की राजनीति में धनबल का प्रयोग चुनाव में बड़ी चुनौती है। सभी दल पैसे के दम पर चुनाव जीतना चाहते हैं, जनता से जुड़े मुद्दों एवं समस्याओं के समाधान के नाम पर नहीं। कोई भी ईमानदारी और सेवाभाव के साथ चुनाव नहीं लड़ना चाहते हैं। राजनीति के खिलाड़ी सत्ता की दौड़ में इतने व्यस्त है कि उनके लिए विकास, जनसेवा, सुरक्षा, महामारियां, युद्ध, आतंकवाद की बात करना व्यर्थ हो गया है। सभी पार्टियां जनता को गुमराह करती नजर आती है। सभी पार्टियां नोट के बदले वोट चाहती है। राजनीति अब एक व्यवसाय बन गई है। सभी जीवन मूल्य बिखर गए है, धन तथा व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए सत्ता का अर्जन सर्वाेच्च लक्ष्य बन गया है। लोकसभा चुनाव की सबसे बड़ी विडम्बना एवं विसंगति है कि यह चुनाव आर्थिक विषमता की खाई को पाटने की बजाय बढ़ाने वाले साबित होने जा रहे हैं। आखिर कब तक चुनाव इस तरह की विसंगतियों पर सवार होता रहेगा?

Comment:

betpark
mavibet giriş
grandpashabet
grandpashabet
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet
betpark giriş
imajbet güncel
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
imajbet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
imajbet güncel
bettilt giriş
bettilt giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
imajbet güncel giriş
imajbet giriş
imajbet güncel
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
safirbet giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
savoycasino giriş
savoycasino giriş
savoycasino giriş
savoycasino giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
holiganbet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betnano güncel
betnano güncel giriş
bettilt giriş
imajbet güncel
imajbet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
imajbet güncel
casibom
casibom
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
imajbet güncel giriş
grandpashabet
grandpashabet
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
bettilt giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet
grandpashabet
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
Grandpashabet giriş
safirbet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
norabahis giriş
imajbet giriş
norabahis giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
norabahis giriş
artemisbet giriş
artemisbet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
artemisbet giriş
norabahis giriş
artemisbet giriş
imajbet giriş
holiganbet güncel