वैदिक संपत्ति 316* *[चतुर्थ खण्ड] जीविका , उद्योग और ज्ञानविज्ञान – (वैदिक आर्यों की सभ्यता )*

IMG-20240413-WA0025

*
(यह लेख माला हम पंडित रघुनंदन शर्मा जी की वैदिक सम्पत्ति नामक पुस्तक के आधार पर सुधि पाठकों के लिए प्रस्तुत कर रहे हैं ।)

प्रस्तुति: – देवेंद्र सिंह आर्य
( चेयरमैन ‘उगता भारत’ )

गताक से आगे …

वैदिक आर्यों की सभ्यता

हमने अभी गत पृष्ठों में वेदमन्त्रों की शिक्षा का जो सारांश दिखलाया है, वह केवल वेदों की शोभा, प्रतिष्ठा और महत्त्व बढ़ाने के ही लिए नहीं है, प्रत्युत यह बतलाने के लिए है कि वेदों की इसी शिक्षा के द्वारा वैदिक आर्यों ने अपनी एक विशेष सभ्यता स्थिर की है, जो आदि सृष्टि से लेकर आज पर्यंत जीवित है। हमने जो मनुष्यों की स्वाभाविक इच्छाओं से लेकर मोक्षसुखपर्यंत वेदमन्त्रों की शिक्षा का क्रम दिया है, इसी अन्तिम पारलौकिक मोक्षप्राप्ति की सुदृढ़ भूमिका पर आर्यों ने अपनी सभ्यता की इमारत स्थिर की है। उन्होंने अपना अन्तिम ध्येय मोक्ष को ही माना है। परन्तु स्मरण रखना चाहिये कि मोक्ष भी इसी संसार के द्वारा ही प्राप्त होता है,, इसलिए मुमुक्षु को इस संसार के तत्त्व का और उसके उचित उपयोग का ज्ञान प्राप्त करना अनिवार्य होता है। संसार का तत्त्वज्ञान और इसका उचित उपयोग ही मोक्ष का साधक है, इसीलिए आर्यों ने संसार का उपयोग करते हुए मोक्ष प्राप्त करने की विधि को अपनी सभ्यता का मूल ठहराया है और उस विधि को चार भागों में अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष के नामों से विभक्त किया है।

अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष

अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष आर्यों की सभ्यता की आधारशिलाएँ हैं। इन में मनुष्य की वे समस्त अभिलाषाएँ अन्तर्भूत हो जाती हैं, जिनका उल्लेख हमने वेदों के मन्त्रसंग्रह के आदि में किया है। क्योंकि मनुष्य के शरीर में अवश्यकताओं को चाहनेवाले चार ही स्थान हैं और ये चारों प्रदार्थं उनकी पूर्ति कर देते हैं। मनु भगवान् अपने एक श्लोक में कहते हैं कि-

अद्भिर्गात्राणि शुर्ध्यान्त मनः सत्येन शुर्य्यात ।

विद्यातपोभ्यां भूतात्मा बुद्धिनिन शुध्यति ।। (मनुस्मृति)

अर्थात् पानी से शरीर सत्य से मन, विद्या और तप से आत्मा तथा ज्ञान से बुद्धि शुद्ध होती है। इस श्लोक में शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा की गणना अलग अलग की गई है। हम देख रहे हैं कि इन चारों की जहाँ पानी आदि अलग अलग चार पदार्थों से शुद्धि होती है, वहाँ इन शरीरादि चारों अंगों को अलग अलग चार पदार्थों की आवश्यकता भी होती है। ये चारों आवश्यक पदार्थ अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष ही हैं।

शरीरपोषण के लिये अर्थ की, मनस्तुष्टि के लिये काम की, बुद्धि के लिये धर्म की और आत्मा की शांति के लिये मोक्ष की आवश्यकता होती है। क्योंकि विना भोजनादि (अर्थ) के शरीर निकम्मा हो जाता है, विना काम (स्त्री) के मन निकम्मा हो जाता है, विना मोक्ष (अमरता) के आत्मा निकम्मा हो जाता है और विना वर्म (सत्य और न्याय) के बुद्धि निकम्मी हो जाती है। अर्थ और शरीर का, काम और मन का तथा मोक्ष और बात्मा का सम्बन्ध तो प्रत्यक्ष ही है, इसमें किसी को शंका नहीं हो सकती, परन्तु धर्म और बुद्धि का सम्बन्ध सुनकर संभव है, लोग कहने लगें कि यह बात ठीक नहीं है। क्योंकि संसार के धर्मों को बुद्धि का साथ करते हुए नहीं देखा जाता। परन्तु हम जिस वैदिक धर्म की बात कर रहे हैं, उसकी दशा ऐसी नहीं है। वैदिक धर्म बुद्धिपूर्वक ही है। इसका कारण यही है कि वैदिक धर्म वेदों के द्वारा स्थिर किया गया है और वेद *'बुद्धिपूर्वा वाक् प्रकृतिर्वेदे'* अनुसार बुद्धिपूर्वक हैं, इसलिए इस धर्म पर वह शंका नहीं हो सकती। दूसरी बात यह है कि बुद्धि ज्ञान से सम्बन्ध रखती है। जैसे जैसे ज्ञान की वृद्धि होती है, वैसे ही वैसे बुद्धि का विकास होता है। इसलिए बुद्धि और ज्ञान एक ही वस्तु के दो विभाग है। जिस प्रकार बुद्धि और ज्ञान एक ही वस्तु के दो विभाग हैं उसी तरह घर्म और ज्ञान भी एक ही वस्तु के दो विभाग हैं। क्योंकि देखा जाता है कि जैसे जैसे ज्ञान की वृद्धि होती है वैसे ही वैसे धर्म की भी वृद्धि होती है। घर्म में जितना ही ज्ञानांश होता है और ज्ञान में जितना ही धर्माश होता है, बुद्धि में उतनी ही स्थिरता होती है। इसी सिद्धान्त पर पहुँचकर योरप का प्रसिद्ध विद्वान् हक्स्ले कहता है कि 'सच्चा विज्ञान और तथा धर्म दोनों यमज भाई हैं। इनमें से यदि एक दूसरे से अलग कर दिया जायगा, तो दोनों की मृत्यु हो जायगी। विज्ञान में जितनी ही अधिक धार्मिकता होगी, उतनी ही अधिक उसकी उन्नति होगी। विज्ञान का अभ्यास करते समय मन की धार्मिक वृत्ति जितनी ही अधिक होगी, विज्ञानविषयक खोज उतनी ही अधिक गहरी होगी और उसका आधार में जितना ही अधिक दृढ़ होगा, धर्म का विकास भी उतनाही अधिक होगा। तत्त्ववेत्ताओं ने जो अब तक बड़े बड़े काम किये हैं, उन्हें सिर्फ उनके बुद्धिवैभव का ही फल न समझिये, किन्तु उनकी धार्मिक वृत्ति ही इसमें अधिक कारणीभूत है। इसलिये धर्म का ज्ञान के साथ  और ज्ञान का बुद्धि के साथ घनिष्ट सम्बन्ध है, इसमें सन्देह नहीं।

  जिस प्रकार धर्म से बुद्धि का सम्बन्ध है, उसी तरह धर्म से शरीर का काम से मन का और मोक्ष से आत्मा का भी सम्बन्ध है। इन्हीं अर्थ, धर्म, कामादि में मनुष्य के जीवन, रति, मान, ज्ञान, स्वाय और परलोक सादि की समस्त कामनाओं का समावेश हो जाता है, अर्थात् जीवन की अभिलाषा अर्थ में, स्त्रीपुत्रादि को काम में, मान, ज्ञान और न्याय की धर्म में और परलोक की कामना मोक्ष में समा जाती है। अर्थात् समस्त ऐषणाओं का समावेश अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष में हो जाता है और चारों पदार्थ एक दूसरे के आधार आधेय बन जाते हैं। जिस प्रकार अर्थ अर्थात् भोजनवस्त्रादि के बिना शरीर की स्थिति नहीं रह सकती और न काम अर्थात् रति के विना शरीर उत्पन्न ही हो सकता है और न बिना शरीर और शरीर निर्वाह के मोक्षसाधन ही हो सकता है, उसी तरह विनी मोक्षसाधन के विना मोक्षमार्ग निर्धारण किये अर्थ और काम को भी सहायता नहीं मिल सकती। क्योंकि अर्थ और काम के समस्त पदार्थ प्रायः मनुष्यों, पशुओं और वनस्पतियों से ही प्राप्त होते हैं। ये सभी जीव हैं और कर्मफल भोग रहे हैं। इनका भी उद्धार तभी हो सकता है, जभी ये कर्मफल भोगकर मनुष्यशरीर में आवें और यहाँ मोक्ष का मार्ग खुला हुआ पावें । इसलिए मोक्ष की सच्ची कामनासे ही अर्थ और काम को अर्थात् मनुष्यों, और वनस्पतियों को सहायता मिल सकती है। मोक्ष की सच्ची कामना के बिना अर्थ और काम का उचित उपयोग हो ही नहीं सकता और विना उचित उपयोग के अर्थी स्वार्थी हो जाते हैं और कामनावाले कामी हो जाते हैं, तथा स्वार्थी और कामी मिलकर समाज को नष्ट कर देते हैं।

क्रमश:

Comment:

betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betnano giriş
norabahis giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
Betgaranti Giriş
betgaranti girş
betnano giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
hititbet giriş
imajbet giriş
betasus giriş
betnano giriş
jojobet giriş
betnano giriş
holiganbet giriş
betnano giriş
holiganbet giriş
betasus giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
norabahis giriş
meritking giriş
meritking giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
kulisbet giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
hiltonbet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betnano giriş
kulisbet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betnano giriş
hiltonbet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
hiltonbet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
betpark giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
betpark giriş
bettilt giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
hiltonbet giriş
hiltonbet giriş