रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा तैयार की गई भारत की पहली इंटर कांटीनेन्टल बैलेस्टिक मिसाल अग्नि-5 के सफल परीक्षण के बाद इसे भारत की एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। पूरी तरह से भारत में तैयार हुई अग्नि-5 का महत्व सामरिक व वैज्ञानिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण था। परमाणु क्षमता से लैस होने की वजह से यह मिसाल अब देश का सबसे बड़ा रक्षा कवच बन गया है। डीआरडीओ द्वारा तैयार की गई इस मिसाइल को ‘देश का गौरव’ कहना कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। हमें यह भी भ्रम नहीं पालना चाहिए कि भारत ने यह परीक्षण किसी को कोई संदेश देने के लिए किया है। यह उसकी सामरिक जरूरत है। अलबत्ता इस परीक्षण को सामान्य प्रक्रिया के तहत किया गया परीक्षण ही कहना मुनासिब होगा।

हालांकि अग्नि पांच के प्रक्षेपण के बाद माना जा रहा है कि कहीं इसके बाद एशिया में मिसाइल रेस शुरू न हो जाए। इसकी वजह है, इसका सफल परीक्षण और 5,000 किलोमीटर तक की इसकी मारक क्षमता। लेकिन ज्यादातर भारतीय इससे इत्तफाक नहीं रखते। रेस हमेशा समान स्तर के खिलाडिय़ों के बीच होती है। जहां समानता नहीं होगी, वहां रेस का मतलब नहीं है। बेशक इस परीक्षण के बाद हमेशा की तरह पाकिस्तान भी एकाध मिसाइल का परीक्षण करेगा, पर उसका कोई असर नहीं पडऩे वाला।

यह निर्विवाद है कि जिस देश के पास सुविधा होती है, वही मिसाइल बना सकता है अथवा परीक्षण कर सकता है। जिसके पास ऐसी सुविधा नहीं होगी, वह या तो अन्य देशों से सहयोग लेगा अथवा ऐसी मिसाइलों से बचेगा। पिछले कुछ वर्षों से जिस तरह हमने अपनी सुरक्षा पर ध्यान देना शुरू किया है, अग्नि 5 उसका एक मजबूत पड़ाव है। अब यह कयास लगाना गलत नहीं कि आने वाले एकाध वर्षों में अग्नि पीढ़ी की नई मिसाइल भी हमारे पास हो, जिसकी मारक क्षमता 7,000 अथवा 8,000 किलोमीटर तक होगी। अब इस वृहद तस्वीर में पाकिस्तान के लिए जगह ही कहां बचती है? वह कब तक हमारा अनुकरण करेगा?

इधर इस मिसाइल परीक्षण से पहले और बाद में भी, चीनी मीडिया अपनी शंका जाहिर कर रहा है। उसके सुर ऐसे लग रहे हैं, जैसे उसे इस मिसाइल से आपत्ति हो। पर हमें इसे तवज्जो नहीं देनी चाहिए, क्योंकि यह स्वर मात्र चीनी मीडिया के हैं। चीन की सरकार अधिकृत रूप से ऐसे परीक्षणों का विरोध नहीं करेगी। उसकी परमाणु क्षमता हमसे ज्यादा है और सामरिक दृष्टि से भी वह हमसे ज्यादा मजबूत है। इतना ही नहीं, उसने हमसे ज्यादा मिसाइल परीक्षण किए हैं, जिस पर हमने कभी कोई आपत्ति नहीं जताई। ऐसे में इन बातों का कोई महत्व नहीं है कि अग्नि 5 की जद में शंघाई आती है, अथवा बीजिंग।

दूसरी बात, हमने यह मिसाइल किसी अन्य देश से मुकाबला करने के लिए नहीं बनाई है, बल्कि खुद की रक्षा के लिए इसे विकसित किया है। हमारी यह नीति रही है कि हम किसी भी मुल्क पर पहले हमला नहीं करते। लेकिन इसका यह मतलब भी नहीं है कि हम पर अगर हमला होता है, तो हम चुप बैठेंगे। 

अपना घर संभालने के लिए हमें सामरिक दृष्टि से उन्नत होना ही होगा। और वैसे भी, जब पाकिस्तान और चीन जैसे देश हमारे पड़ोस में हों, तालिबान और अल कायदा जैसी समस्याओं से हम जूझ रहे हों, तो हमारे पास इतनी शक्ति होनी ही चाहिए कि हमें आंख दिखाने वालों का हम मुंहतोड़ जवाब दे सकें।

विरोध करने वालों को समझना चाहिए कि हम उत्तर कोरिया नहीं हैं, जो महज मिसाइल परीक्षण पर ही अपनी सारी पूंजी खर्च कर रहा है और आम लोगों के हितों को कुरबान कर रहा है। हमारा मुल्क एक ऐसा जीवंत लोकतांत्रिक देश है, जहां एक चुनी हुई सरकार है। यह सरकार किसी भी कीमत पर लोकहित को तिलांजलि नहीं दे सकती। चूंकि बाह्य सुरक्षा हमारे लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, लिहाजा इसे मजबूत करने के लिए ही ऐसी मिसाइलों की हमें सख्त जरूरत है।

अग्नि 5 हमारे देश की पहली अंतर महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल है। भारत के अलावा आईसीबीएम की मिसाइल को संचालित करने की क्षमता सिर्फ अमेरिका, रूस, चीन और फ्रांस के पास ही है। हालांकि इस्राइल के पास भी ऐसी ही सुविधा होने की बात दबी जुबान से कही जाती है। बेशक बृहस्पतिवार के परीक्षण के बाद भारत भी इस तथाकथित एलिट क्लब का हिस्सा हो गया है, पर इस क्लब में शामिल होने का तब तक कोई मतलब नहीं है, जब तक हम शक्ति संपन्न नहीं हो जाएं। यह सुखद है कि हम धीरे-धीरे ही सही, इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। 

आने वाले वर्षों में हमें शिखर तक पहुंचना है। ऐसे में हमें अपनी ताकत बढ़ानी ही होगी, जिसमें अग्नि 5 एक महत्वपूर्ण कड़ी है। हालांकि जो काम हम नहीं कर रहे हैं, उसका यह अर्थ नहीं है कि हम उसे नहीं कर सकते। असल में हम उसे करना नहीं चाहते, क्योंकि वह हमारी नीतियों के खिलाफ है। निस्संदेह अगले दस वर्षों में हम दुनिया की शीर्ष चार अर्थव्यवस्था में शुमार होंगे, लिहाजा हमें अपनी सामरिक शक्ति भी बढ़ानी ही होगी, क्योंकि आर्थिक ताकत संपन्न देश के पास सामरिक संपन्नता होनी ही चाहिए। नख-दंत विहीन होने का कोई मतलब नहीं है।

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