क्रांति तीर्थ अमृत महोत्सव आयोजन समिति के प्रदेशव्यापी आयोजनों का मेरठ से हुआ शुभारंभ : क्रांतिकारियों के गांवों को बनाएंगे क्रांति तीर्थ : अश्विनी त्यागी धन सिंह कोतवाल को केंद्र में रखकर बनाया जाए इतिहास परिक्षेत्र : डॉ आर्य

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मेरठ । अमर शहीद क्रांतिकारी धनसिंह कोतवाल के बलिदान दिवस के अवसर पर आर0एस0एस0 की ओर से यहां से क्रांति तीर्थ अमृत महोत्सव आयोजन समिति के प्रदेशव्यापी आयोजनों का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर समिति के प्रांतीय प्रभारी के रूप में उपस्थित हुए अश्वनी त्यागी ने अपने संबोधन में कहा कि क्रांतिकारियों के बलिदानी इतिहास को जानबूझकर इतिहास से विलुप्त किया गया।।अब देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में इस दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किया जा रहा है और जिन बलिदानी क्रांतिकारियों को इतिहास से निकाल दिया गया है उन्हें उचित स्थान देने हेतु अनेक प्रकार के कार्य किए जा रहे हैं। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए यह समिति आज यहां से एक महत्वपूर्ण अभियान की शुरुआत कर रही है।

श्री त्यागी ने कहा कि इस अभियान के अंतर्गत प्रत्येक जिले के क्रांतिकारियों के गांव की मिट्टी लेकर उसे 15 अगस्त को देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को दिया जाएगा । उस मिट्टी को फिर पूरे प्रदेश में उन उन स्थानों पर दे दिया जाएगा जहां जहां से उन्हें एकत्र किया गया था। दी गई मिट्टी के ऊपर एक बरगद का पौधा लगाया जाएगा और उस गांव को क्रांति तीर्थ के रूप में स्थापित किया जाएगा। इससे क्रांतिकारियों को तो सम्मान मिलेगा ही साथ ही क्रांति तीर्थ के रूप में स्थापित हुए गांवों को भी सम्मान प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि क्रांतिकारियों के द्वारा ही देश को आजादी दिलाई गई है। उनके खून बहाने से मिली आजादी की रक्षा करना आज हम सब देशवासियों का नैतिक दायित्व है। इसके लिए रचनात्मक कार्यक्रमों की अहम भूमिका होती है जिससे युवा पीढ़ी को प्रेरणा मिलती है।


इस अवसर पर विशिष्ट वक्ता के रूप में उपस्थित हुए प्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता डॉ राकेश कुमार आर्य ने कहा कि धन सिंह कोतवाल एक इतिहास का नाम है। उन्होंने अपने इस वक्तव्य की व्याख्या करते हुए कहा कि धन सिंह कोतवाल के साथ उस समय बहसूमा परीक्षितगढ़ की रियासत के राजा राम कदम सिंह, मालागढ़ के नवाब वलीदाद खां , बुलंदशहर के बड़े-बड़े जमींदार, आज के गाजियाबाद गौतमबुद्धनगर क्षेत्र के राजा राव उमराव सिंह सहित मथुरा तक के क्षेत्र और बिजनौर के क्रांतिकारियों के साथ-साथ ग्वालियर झांसी तक के क्रांतिकारी थे । इसके अतिरिक्त सहारनपुर मुजफ्फरनगर और इसी प्रकार कई अन्य पड़ोसी जिलों व प्रदेशों के लोग भी उनके साथ जुड़े थे। डॉ आर्य ने कहा कि झांसी की रानी लक्ष्मीबाई वीर तात्या टोपे आदि के साथ-साथ धन सिंह कोतवाल के साथ स्वामी दयानंद जी की विशेष प्रेरणा काम कर रही थी।
उन्होंने कहा कि आज हम अपने देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मांग करते हैं कि धन सिंह कोतवाल के इस महान कार्य के दृष्टिगत उन्हें केंद्र में रखते हुए इस पूरे क्षेत्र का एक सर्किट बनाया जाए और जहां जहां उस समय क्रांति की ज्योति जलाई गई थी वहां वहां उन क्रांतिकारियों को विशेष सम्मान देते हुए धन सिंह कोतवाल को इतिहास में विशिष्ट सम्मान दिया जाए। डॉ आर्य ने कहा कि धन सिंह कोतवाल के गांव पांचली खुर्द का नाम भी उनके नाम पर रखा जाए।
अवसर पर भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष नरेश गुर्जर ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि देश में लाखों क्रांतिकारियों ने अपना बलिदान दिया। उसके बाद ही अंग्रेज यहां से भागने के लिए मजबूर हुए थे। क्रांतिकारियों के देशभक्ति पूर्ण कार्यों को विस्मृत करना और इतिहास में उन्हें स्थान न देना आजादी के बाद लिखे गए इतिहास की सबसे बड़ी विकृति है। जिसका निदान करना समय की आवश्यकता है। श्री गुर्जर ने कहा कि मेरठ की पवित्र भूमि क्रांतिकारियों की भूमि है जिस पर क्रांति का एक सतत इतिहास मिलता है। उसी सतत इतिहास की एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में धन सिंह कोतवाल हैं, जिन्हें हमें क्रांतिकारियों के सिरमौर के रूप में स्थान देना चाहिए।
सुप्रसिद्ध विद्वान प्रोफेसर देवेश शर्मा ने उगता भारत के साथ विशेष बातचीत में बताया कि जिस समय 18 57 की क्रांति का आरंभ हुआ था उस समय हमारे क्रांतिकारियों ने नींव की ईंट बनना स्वीकार किया था। उन्होंने किसी भी व्यक्ति या शासन सत्ता से अपने बलिदानों की कीमत नहीं मांगी थी। उनकी मौन आहुति आज हमसे बहुत कुछ कहती है। जिसे हमें समझने की आवश्यकता है। श्री शर्मा ने कहा कि उस समय लगभग 30,000 की सेना सभी जाति बिरादरी के लोगों की बनी थी, इसलिए क्रांति करने वाले लोग किसी जाति विशेष के लोग नहीं थे बल्कि वे भारत भक्त राष्ट्रभक्त लोग थे।
आर0एस0एस0 के बड़े कार्यकर्ता नवीन चंद्र गुप्ता ने कहा कि हमें देश के इतिहास का गौरवपूर्ण लेखन करना होगा, अन्यथा हम अपने देश धर्म संस्कृति की रक्षा करने में असफल हो जाएंगे। हम एक जीवंत राष्ट्र के जीवंत नागरिक हैं इसलिए हमें अपना जीवन इतिहास भी चाहिए। इसकी रक्षा के लिए हमको राष्ट्र बोध के साथ-साथ इतिहास बोध करने की भी आवश्यकता है।
विजय सिंह गुर्जर, जितेंद्र सिंह, कुमारपाल शास्त्री पूर्व कमांडिंग अफसर बालेसिंह कैप्टन सुभाष चंद्र आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए और केंद्र सरकार से मांग की कि आज की परिस्थितियों में क्रांतिकारी इतिहास को सहेज कर युवा पीढ़ी के सामने यथावत प्रस्तुत करना समय की आवश्यकता है। कार्यक्रम का सफल संचालन 18 57 की क्रांति के नायक धन सिंह कोतवाल शोध संस्थान के चेयरमैन डॉक्टर तस्वीर सिंह चपराना द्वारा किया गया। जिन्होंने धन सिंह कोतवाल और उनके अन्य अनेक क्रांतिकारियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी और बताया कि किस प्रकार उस समय धन सिंह कोतवाल सहित उनके 400 क्रांतिकारी साथियों और गांव के लोगों को आज के दिन यहां पर अंग्रेजों ने तोपों से उड़ा दिया था। इस अवसर पर बड़ी संख्या में मातृशक्ति और युवा शक्ति ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। डॉ चपराना ने बताया कि कार्यक्रम के अंत में शहीद धन सिंह कोतवाल की स्मृति से चलकर एक विशाल कलश यात्रा उनके निवास स्थान पर जाकर संपन्न हुई। जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। इस दौरान श्री चपराना ने अतिथियों को 1857 की क्रांति से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों को भी दिखाया जहां से उस समय के क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों के विरुद्ध विशेष अभियान चलाए थे।

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