जी हां! अपने प्यारे देश में ‘कमीशन’ ने सिद्घांतों का सौदा कर दिया है। इस ‘कमीशन’ के लिए अब तो समय आ गया है कि जब इसे भगवान मानकर इसकी आरती उतारी जाए।
जिधर देखता हूं बस! उधर तू ही तू है।
कि हर शय में जलवा तेरा हू ब हू है।।
‘कमीशन’ की इस देश में महिमा बड़ी महान।
आप जी भर के खाइये, जाने सारा जहान।।
सारे देव आपसे रूठ सकते हैं। किंतु कलियुग में यह ‘कमीशन’ का देवता आपसे कभी नही रूठ सकता। बड़े लंबे हाथ हैं इसके। बड़ा व्यापक विस्तार और प्रचार-प्रसार है इसका। जीवन के हर क्षेत्र में इसके रंग आपको देखने को मिल जाएंगे। बिजली चोरी के लिए आपको अलग से कुछ नही करना है ‘कमीशन’ वाले भाई विभाग में ही आपको मिल जाएंगे। उन्हें पहचानो और जानो। आपका काम सरल हो जाएगा। यदा-कदा उनसे मिलने का क्रम बनाइये आपकी सारी समस्याओं का निदान स्वत: ही हो जाएगा।
एक संबंधित कार्यालय में मैं बिजली का बिल जमा कराकर आया। मेरे पड़ोसी पर कई हजार का बिल था केवल एक हजार रूपया ‘कमीशन’ में गये और पिछले सारे बिल क्षमा हो गये। घर आने पर उन्होंने अपनी सारी चतुराई मुझे समझायी और बतायी। जिस देश की ऐसी स्थिति है उसके लिए ही गाया जाता है-
इस देश का यारो क्या कहना।
ये देश है इस दुनिया का गहना।।
पाठकों, यह देश तो सचमुच दुनिया का गहना है। इसका कोई सानी भी नहीं। किंतु यहां की राजनीतिक व्यवस्था और हमारे रनजनीतिज्ञ दोनों ही दोषयुक्त हैं। जब तक ये दोनों अपने वर्तमान स्वरूप में हमारे मध्य जीवित हैं तब तक आप या तो इनके विरूद्घ विद्रोह के लिए उद्यत हो जाएं या इनके लंबे हाथों को यह पहचानते हुए अपने निकट के किसी भी ‘कमीशन बाज’ (सरकारी कर्मचारी) से हर विभाग में अपनी जान पहचान बढ़ायें।
ये अपना प्यारा हिन्दुस्तान है जिसमें सब कुछ होता है। हमारे राजनीतिज्ञों के आवास पर ‘सूटकेस’ शब्द भी बड़ा अच्छा स्थान पाता रहता है। वास्तव में यह ‘सूटकेस’ बड़े स्तर  पर ‘कमीशन’ का ही दूसरा नाम है। इसे निम्न स्तर  पर ‘रिश्वत’ कहते हैं, मध्यम स्तर पर ‘कमीशन’ और बड़े स्तर पर ‘सूटकेस’ कहते हैं।
दूसरे शब्दों में ‘रिश्वत’ उसका स्थूल शरीर है। ‘कमीशन’ सूक्ष्म शरीर है और ‘सूटकेस’ कारण शरीर है। सूटकेस वाली जीवात्माएं जीवनमुक्त जीवात्माएं हैं जो मुद्रा को हाथ नहीं लगाती। उनके पास तो मुद्रा चली जाती है। उन्हें ये भी पता नहीं होता कि ये मुद्रा कब और कहां से और कैसे उनके पास आ गयी? सचमुच सबका अपना अपना भाग्य है।
ये जीवन मुक्त आत्माएं (हमारे नेतागण) सत स्वरूप हैं, चेतन स्वरूप हैं और आनंदस्वरूप हैं। ये ‘सच्चिदानंद’ हैं। इसीलिए आज के संसार के और भारतीय समाज के ये देवता हैं। लोग इसलिए इन पर फूल बरसाते हैं, अनिच्छा होने पर भी भोग लगाते हैं। पता नहीं कब ये देवता प्रसन्न हो जाएं और कहीं कोई ‘कमीशन’ का ‘जुगाड़’ आपको भी लगवा दे। भाइयो! ये है हमारा षडयंत्रपूर्ण पाखण्ड और विकृतियों से भरा हुआ राष्ट्रीय चरित्र?
सिंचाई विभाग और किसान
हमारे एक वरिष्ठ साथी जो अधिवक्ता हैं मेरे साथ जिलाधिकारी महोदय गौतमबुद्घ नगर से शिकायत कर रहे थे। शिकायत थी सिंचाई विभाग वालों की। उनका कहना था कि नहर वाले कृषि भूमि की सिंचाई हेतु समय से पानी नहीं छोड़ते। उन्हें जो लोग पैसा दे आते हैं उसी दिन उतने ही समय के लिए नहर में पानी छोड़ते हैं, जितनी देर में पैसा देने वाले का खेत पानी से भर जाता है। अब से 25 वर्ष पूर्व क्या था? अंग्रेजों के समय की परम्परा थी कि नहरों में सिंचाई हेतु पानी एक निश्चित समय और निश्चित दिन को छोड़ा जाता था। सभी कृषकों को यह पता रहता था कि आज नहर में पानी आएगा। इसलिए अपने-अपने खेत की सिंचाई के लिए सभी तत्पर रहते थे। किंतु आज स्थिति में भारी परिवर्तन आ गया है।
अब नहरों का पानी भी ‘कमीशन’ से छूट रहा है। ऐसा सुनकर मुझे दुख हुआ। जिलाधिकारी महोदय ने मेरे अधिवक्ता साथी की बात को ध्यान से सुना और एक कागज के टुकड़े पर   नोट भी कर लिया। मानो आज ही तीव्रता और शीघ्रता से कार्यवाही हो जाएगी। किंतु आश्वासन कोरा आश्वासन ही रहा। इसलिए परिणाम वहन्ी शून्य हुआ। वह कागज का टुकड़ा जिस पर नोट किया गया था हमारे जिलाधिकारी महोदय ने हमारे उनके कार्यालय से उठते ही रद्दी की टोकरी में फेंक दिया। यह है भारत का लोकतंत्र, जिसमें जन शिकायतें केवल सुनी जाती हैं। उन पर कार्यवाही नही होती। क्योंकि इस लोकतंत्र को लोकतंत्र के स्थान पर ‘लूटतंत्र’ बना दिया गया है। यह ठीक है कि लोकतंत्र लाठीतंत्र नहीं हो सकता। किंतु यह भी सत्य है कि लोकतंत्र ‘लाठी’ के बिना भी नहीं चल सकता। हम भली प्रकार समझ लें कि लाठी का भय समाप्त होते ही लोकतंत्र लूटतंत्र में परिवर्तित हो जाता है। यह लूट की अराजकता की स्थिति है। हमने स्वतंत्रता के, लोकतंत्र के, व्यवसथा के, नीति के, न्याय और नैतिकता के गलत अर्थ निकाले, जिनका परिणाम आज हमें मिलना आरंभ हो गया है। जिससे किसान भी अछूता नहीं रह सका है।
(लेखक की पुस्तक ‘वर्तमान भारत में भयानक राजनीतिक षडय़ंत्र : दोषी कौन?’ से)
पुस्तक प्राप्ति का स्थान-अमर स्वामी प्रकाशन 1058 विवेकानंद नगर गाजियाबाद मो. 9910336715

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