भारतीय सभ्यता के संस्थापक भगवान ‘मनु’ ..

images (44)

‘मनु’ नाम को लेकर वामपंथियों ने इतना दुष्प्रचार किया गया है कि लोग मनु नाम सुनते ही लोग नाक भौ सिकोड़ते है ..

और तत्काल मनुवादी, कट्टर व पोंगा होने का तमगा दे देते हैं .. जबकि ऐसे लोगों को मनु की परंपरा के बारे में कुछ भी ज्ञात नहीं होता है ..

मनुस्मृति और मनु को भी एक दूसरे का पर्यायवाची मान लिया गया है .. जो कि सत्य नही है …

भारतीय संस्कृति में चौदह मनु माने जाते हैं .. इनमें पहले मनु व उनकी पत्नी सतरूपा स्वयम्भू माने गए हैं जो ब्रह्म जी से उत्तपन्न हुए .. एक तरह से यह मानव विकास और सभ्यता के आरम्भ का भी प्रतीक है जब मानवों ने सामाजिक व नैतिक रूप से नियमों के साथ जीवनयापन आरंभ किया …

सनातन धर्म में चौदह मनु माने गए हैं। महाभारत में आठ मनुओं का वर्णन है जबकि पुराणों में चौदह मनु बताए गए हैं .. इसी प्रकार जैन धर्म में भी चौदह शलाका पुरुष माने गए हैं जो मनु के ही समान है …

चौदह मनुओं में प्रमुख हैं ..

स्वयंभू मनु
स्वरोचित मनु
उत्तम मनु
तामस मनु
रैवत मनु
चाक्षुषी मनु
वैवश्वत मनु .. (वर्तमान कल्प के मनु)

इसके अलावा सावर्णि मनु, दक्ष सावर्णि मनु आदि का वर्णन है ..

प्रथम ‘स्वयंभू मनु’ और उनकी पत्नी सतरूपा की तीन पुत्रियां आकूति, देवहूति, प्रसूति व दो पुत्र प्रियव्रत और उत्तानपाद हुए।

इन स्वयंभू मनु ने अपने समय में मानवों के लिए नियम तय किए समाज में व्यवस्था स्थापित की …

इनकी पुत्रियों आकूति, देवहूति, प्रसूति के विवाह तीन अलग-अलग प्रजापतियों से हुई और ये उस कल्प में संसार की महान माताएं व प्रजापालक हुई …

जबकि इन मनु के एक पुत्र उत्तानपाद का विवाह सुनीति और सुरुचि से हुआ … इन्ही सुनीति और उत्तानपाद के पुत्र व भगवान विष्णु के महान भक्त ध्रुव हुए … यही कथा विष्णु पुराण में आती है …

जबकि मनु के दूसरे पुत्र प्रियव्रत का विवाह विश्वकर्मा की पुत्री से हुआ जिनसे दस पुत्र हुए ..

यह कथा पौराणिक ज्यादा है .. और इसके माध्य्म से सम्भवतः यह बताया गया है कि समाज में व्यवस्था किस प्रकार स्थापित की गई ..

लेकिन वर्तमान मनु अर्थात वैवश्वत मनु की कथा ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। पुराणों व महाभारत में वर्णन हैं कि ‘वैवश्वत मनु’ द्रविण देश या संगम भूमि के निवासी व शासक थे …

जलप्रलय के दौरान जब समुद्र का जलस्तर बढ़ने लगा तो उन्होंने विशाल नौका के द्वारा अपनी प्रजा और मानवजाति की रक्षा के लिए उत्तर भारत की ओर प्रस्थान किया और आर्यावर्त में नई सभ्यता की स्थापना की …

यही वैवश्वत मनु ‘सूर्यवंश’ के संस्थापक हुए .. इन्होंने ही अयोध्या की स्थापना की और वर्तमान समाज के लिए नियम तय किए …

अब जहाँ तक बात है मनुस्मृति की, तो इसके वर्तमान स्वरूप का संकलन मौर्य व मौर्योत्तर काल में किया गया जो मनुओं से नियमों से प्रेरित है …लेकिन बाद में इसके संस्करणों में काफ़ी कुछ घालमेल किया गया ..

अतः इस आधार पर महान मनु की परंपरा को नही नकारा जा सकता है …. अतः मैं महान भगवान मनु का वंशज हूँ .. जो भरतभूमि सभ्यता के संस्थापक व प्रतीक हैं ..🙏🙏🚩🚩
✍️ध्रुव कुमार

मनु :-
सन्दर्भ पुराणों में-
मनु अग्नि २.४(वैवस्वत मनु की अञ्जलि में मत्स्य के आने, मत्स्य द्वारा विशाल रूप धारण करने और मनु की प्रलय में रक्षा करने का कथन), १८(स्वायम्भुव मनु वंश का वर्णन), २७३.३(सूर्य व संज्ञा – पुत्र वैवस्वत मनु के इक्ष्वाकु आदि पुत्रों तथा इला पुत्री विषयक कथन ; सूर्य व छाया की सन्तानों में सावर्णि मनु का उल्लेख), गणेश २.१२.३३(धूम्राक्ष राक्षस – पुत्र, महोत्कट गणेश द्वारा वध), iगरुड ३.७.६६(वैवस्वत मनु द्वारा हरि स्तुति), गर्ग ७.३०.३०(मानव पर्वत पर प्रद्युम्न की वैवस्वत मनु से भेंट), देवीभागवत ८.१(शतरूपा – पति स्वायम्भुव मनु द्वारा सृष्टि हेतु आद्या देवी की स्तुति), ८.३(स्वायम्भुव मनु से आकूति, देवहूति व प्रसूति कन्याओं की उत्पत्ति व विवाह), ८.९.१८(मनु द्वारा रम्यक वर्ष में मत्स्य रूपी हरि की आराधना), ९.४६.८(स्वायम्भुव मनु – पुत्र प्रियव्रत को षष्ठी देवी का दर्शन), १०.१+ (ब्रह्मा के मानस पुत्र मनु द्वारा देवी की स्तुति), १०.१३(दक्ष सावर्णि मनु : पूर्व जन्म में वैवस्वत मनु – पुत्र का रूप), १०.१३.३१(भ्रामरी देवी के वर से १४ मनुओं के बल – तेज युक्त होने का वर्णन), पद्म १.७.८१(१४ मन्वन्तरों के मनुओं, मनु – पुत्रों, ऋषियों व देवों का वृत्तान्त), ५.१४.४९ (मनु – कन्या सुकन्या द्वारा च्यवन ऋषि के नेत्र विस्फोटन का वृत्तान्त), ब्रह्म १.१.५४(वैराज पुरुष की स्वायम्भुव मनु संज्ञा का कथन ; मनु व शतरूपा से प्रजा की सृष्टि का वर्णन), १.३(१४ मन्वन्तरों के मनुओं, मनु – पुत्रों, सप्तर्षियों आदि का वर्णन), ब्रह्मवैवर्त्त १.८.१६(ब्रह्मा के मुख से मनु व शतरूपा की उत्पत्ति), २.५४.४४(१४ मनुओं के आख्यान, सुतपा – सुयज्ञ संवाद), ४.४१.१०५(१४ मनुओं के नाम), ब्रह्माण्ड १.२.१३.८९(स्वायम्भुव मन्वन्तर के देवों, ऋषियों, मनु – पुत्रों आदि के नाम), १.२.१६.६(मनु के भरत उपनाम का कारण), १.२.२९.६२(स्वायम्भुव मनु प्रजापति व शतरूपा के पुत्रों प्रियव्रत व उत्तानपाद के रूप में प्रथम बार दण्डधारी राजाओं की उत्पत्ति का कथन), १.२.३२.९६(ब्रह्मा के १० मानस ऋषि पुत्रों में से एक), १.२.३४.८(ब्रह्मा के निर्देश पर स्वायम्भुव मनु द्वारा एक वेद को चतुर्धा विभक्त करने का कथन), १.२.३६.६(द्वितीय मनु स्वारोचिष से आरम्भ करके मनु – पुत्रों, सप्तर्षियों, देवताओं आदि के नाम), १.२.३७.१३(विभिन्न मनुओं का पृथ्वी दोहन में वत्स बनना), १.२.३८.१(वैवस्वत मन्वन्तर के देवों के गणों के नाम), १.२.३८.३०(वैवस्वत मन्वन्तर के सप्तर्षियों, मनु – पुत्रों के नाम), २.३.८.२१(वैवस्वत मनु के मनुष्यों के अधिपति बनने का उल्लेख), २.३.५९.४८(सूर्य – पुत्र श्रुतश्रवा के सावर्णि मनु बनने का कथन), २.३.५९.८०(सावर्णि मनु द्वारा सावर्णि मनु बनने से पहले मेरु पर्वत पर तप करने का उल्लेख), २.३.६०.२(वैवस्वत मनु के १० पुत्रों के नाम, मनु के अश्वमेध से इला की उत्पत्ति का कथन), ३.४.१.८(भविष्य के ७ मन्वन्तरों के ऋषियों, देवों आदि के नाम), भविष्य १.७९.२९(सूर्य व छाया – पुत्र श्रुतश्रवा के सावर्णि मनु बनने का कथन), ३.४.२५.३०(ब्रह्माण्ड के रजस्, तमस, सत्त्व से विभिन्न मनुओं की सृष्टि का कथन), भागवत ३.१२.५३(ब्रह्मा के शरीर से स्वायम्भुव मनु व शतरूपा की उत्पत्ति का कथन ; मनु व शतरूपा की सन्तानों के नाम), ३.२०.१(पृथिवी पर प्रजा की सृष्टि के लिए स्वायम्भुव मनु द्वारा अपनाए गए उपायों का प्रश्न), ३.२०.४९(ब्रह्मा द्वारा मनुओं की उत्पत्ति का कथन), ३.२१.१(स्वायम्भुव मनु के पुत्रों प्रियव्रत और उत्तानपाद व पुत्री देवहूति से प्रजा की सृष्टि का कथन), ३.२१.३६+ (स्वायम्भुव मनु द्वारा स्वपुत्री देवहूति का कर्दम मुनि से विवाह करने का वृत्तान्त), ४.१.१(स्वायम्भुव मनु की कन्याओं के वंश का वर्णन), ४.११.६(स्वायम्भुव मनु द्वारा अपने पौत्र ध्रुव को यक्षों से युद्ध से विरत होने का उपदेश), ६.६.२०(कृशाश्व व धिषणा के ४ पुत्रों में से एक), ५.१.२८(उत्तम, तामस और रैवत मनुओं के प्रियव्रत – पुत्र होने का उल्लेख), ५.१९.१०(नारद द्वारा सावर्णि को उपदेश हेतु सांख्य और योग के अनुसार भगवद्भक्ति का वर्णन), ६.६.४१(सावर्णि मनु के छाया व सूर्य – पुत्र होने का उल्लेख), ७.८.४८(हिरण्यकशिपु संहार वर्णन के अन्तर्गत मनुओं द्वारा नृसिंह की स्तुति), ८.१(स्वायम्भुव मनु द्वारा तप, भगवद् स्तुति, यज्ञ पुरुष द्वारा असुरों से रक्षा), ८.१.५(शतरूपा – पति स्वायम्भुव मनु द्वारा तपोरत होकर ईश्वर की स्तुति, असुरों आदि द्वारा तप में विघ्न तथा यज्ञपुरुष अवतार द्वारा मनु की रक्षा का वर्णन), ८.१.१९(दूसरे स्वारोचिष मनु से लेकर चौथे तामस मनु तक के मनु – पुत्रों, देवों, इन्द्रों, विष्णु – अवतारों के नाम), ८.५.२(पांचवें व छठें रैवत व चाक्षुष मनुओं के काल के मनु – पुत्रों, देवताओं, विष्णु – अवतारों आदि का कथन), ८.५.७(चाक्षुष मनु का उल्लेख), ८.१३.१(वैवस्वत व आगामी ७ मन्वन्तरों के मनुओं, मनु – पुत्रों, सप्तर्षियों आदि के नाम), ८.१३.११(८वें मन्वन्तर में सावर्णि मनु के पुत्रों, देवगण, इन्द्र व विष्णु – अवतार का कथन), ९.१+ (मनु वंश का संक्षिप्त वर्णन), ११.१४.४(ब्रह्मा द्वारा वेद वाणी का स्वायम्भुव मनु को तथा स्वायम्भुव मनु द्वारा भृगु आदि ७ ब्रह्मर्षियों को उपदेश देने का उल्लेख), मत्स्य १+ (मनु के पाणि पर मत्स्य का प्रकट होकर विशाल रूप धारण करना, प्रलय में मनु की नौका का उद्धार), ४.३३(स्वायम्भुव मनु द्वारा तप से अनन्ती नामक पत्नी को प्राप्त करने व २ पुत्र प्राप्त करने का उल्लेख), ९.१(पूर्व मनुओं के पुत्रों आदि का वर्णन), ११४.५(भरत शब्द की निरुक्ति के कारण मनु की भरत संज्ञा का कथन), ११५.८(चाक्षुष मन्वन्तर में पुरूरवा के चाक्षुष मनु के कुल में उत्पन्न होने का उल्लेख), १४२.४२(स्वायम्भुव मनु द्वारा स्मार्त्त धर्म के प्रतिपादन का कथन), १४५.९०(ब्रह्मा के १० मानस पुत्रों में से एक), १४५.११५(वैवस्वत मनु : मन्त्रवादी क्षत्रियों में श्रेष्ठ २ में से एक), १७१.४९(चाक्षुष मनु : धर्म व विश्वा के विश्वेदेव संज्ञक पुत्रों में से एक), २०३.११(साध्या व मनु? के साध्य संज्ञक १२ देव पुत्रों में से एक), २२७.११४(मनु द्वारा निर्दिष्ट दण्ड नियम), मार्कण्डेय ४७/५०.१३(मनु व शतरूपा की संतति का वर्णन), ४७.१०/५०.१०(क्रोध पुरुष से उत्पन्न शतरूपा के स्वायम्भुव मनु की पत्नी बनने तथा सन्तान उत्पन्न करने का कथन), ५८+ /६१+ (कलि गन्धर्व व वरूथिनी अप्सरा से स्वारोचिष मनु के पिता स्वरोचिष की उत्पत्ति का वर्णन), ६३.३०/६६.३०(स्वरोचिष व मृगी से स्वारोचिष मनु की उत्पत्ति का वर्णन), लिङ्ग १.७०.३७७(संकल्प का रूप), वायु २३.४७/१.२३.४३(विश्वरूप कल्प में २६ मनुओं का उल्लेख), २६.२९(१४ मनुओं की १४ स्वरों से उत्पत्ति तथा उनकी वर्ण आदि प्रकृतियों का वर्णन), २६.३२, ६३.१३(स्वायम्भुव, स्वारोचिष आदि मनुओं का पृथ्वी दोहन में वत्स बनना), ६५.७९/२.४.७९(वरूत्री के पुत्रों द्वारा इज्या धर्म नाश के लिए मनु का अभियोजन करने तथा इन्द्र द्वारा मनु को इस कार्य से विरत करने का कथन), ७०.१८/२.९.१८(ब्रह्मा द्वारा प्रतिमन्वन्तर में मनुओं का मनुष्यों के अधिपति रूप में अभिषेक करने का उल्लेख), ८४.२२/२.२२.२२(विवस्वान् व संज्ञा का ज्येष्ठ पुत्र), ८८.२०९/ २.२६.२०९(शीघ्र|क – पुत्र, प्रसुश्रुत – पिता, कलाप ग्राम में स्थित होकर १९वें युग में क्षत्र प्रवर्तन), ९५.४५/२.३३.४५(देवन – पुत्र मधु के ४ पुत्रों में से एक), विष्णु १.७.१६(ब्रह्मा द्वारा स्वायम्भुव मनु की रचना), १.१३.३(चाक्षुष मनु : चक्षु व वारुणी पुष्करिणी – पुत्र?, मनु के नड्वला पत्नी से उत्पन्न १० पुत्रों के नाम), ३.१(मन्वन्तरानुसार मनुओं का वर्णन), ३.२.१३(सावर्णि मनु का वर्णन), ४.१(वैवस्वत मनु वंश का वर्णन), ४.५.२७(हर्यश्व – पुत्र, प्रतिक – पिता, निमि वंश), विष्णुधर्मोत्तर १.१७५+ (१४ मनवन्तरों में मनुओं के पुत्रों सहित नाम), ३.७०(मनु की मूर्ति का रूप), शिव २.१.१६.११(ब्रह्मा द्वारा देह का द्वैधा विभाजन करके मनु व शतरूपा को उत्पन्न करने तथा मनु व शतरूपा से पुत्रों व कन्याओं की उत्पत्ति का वृत्तान्त), ५.३६(वैवस्वत मनु के ९ पुत्रों व उनके वंशजों का वर्णन ), स्कन्द १.२.५.७१( १४ स्वर वर्णों का १४ मनुओं से तादात्म्य), १.२.१३.१७७(मनुओं द्वारा अन्नमय लिङ्ग की गिरीश नाम से पूजा, शतरुद्रिय प्रसंग), ७.१.२३.९९(चन्द्रमा के यज्ञ में मनु के आग्नीध्र बनने का उल्लेख), हरिवंश १.२(स्वायम्भुव मनु की ब्रह्म देह से उत्पत्ति, मनु वंश), १.७(१४ मन्वन्तरों के मनुओं, मनु – पुत्रों, देवों आदि का वर्णन), १.८.१०(मनु के संदर्भ में अहोरात्र, पक्ष, मास आदि के आपेक्षिक मान)|

Comment:

betpark güncel giriş
betgaranti güncel giriş
kolaybet güncel giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark güncel giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
kolaybet giriş
kolaybet giriş
meritking giriş
virüsbet giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
meritking giriş
marsbahis giriş
meritking giriş
bets10 giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
ultrabet giriş
yakabet
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş