लोकसभा के उपचुनाव के परिणामों के निहितार्थ

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अशोक मधुप 

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामपुर व आजमगढ़ लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशियों की जीत पर कहा कि यह डबल इंजन वाली सरकार की डबल जीत है। जोकि लोकसभा चुनाव 2024 के लिए एक संदेश है।

देश की तीन लोकसभा सीट पर उपचुनाव हुए। तीनों उपचुनाव के परिणाम बहुत कुछ कहते हैं। राजनीति की नई दिशा की ओर इशारा भी करते हैं। उत्तर प्रदेश में दो लोकसभा सीटों के लिए हुए उपचुनाव में भाजपा की जीत ने यह साबित कर दिया कि नुपूर शर्मा की विवादास्पद टिप्पणी हो या केंद्र सरकार की अग्निवीर योजना का विरोध, भाजपा के प्रति वोटर की दीवानगी पर कोई असर नहीं पड़ा। वह पूरी तरह भाजपा के साथ है। भाजपा ने रामपुर में पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान के दबदबे और आजमगढ़ में मुलायम सिंह के परिवार के दबदबे वाली सीट पर जीत हासिल कर बता दिया कि उसकी पूरी तरह से आस्था प्रदेश की डबल इंजन वाली सरकार में है। जबकि पंजाब के संगरूर लोकसभा उपचुनाव के नतीजों में आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगा है। यहां पर शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के सिमरनजीत सिंह मान जीते हैं। सिमरनजीत सिंह मान ने आम आदमी पार्टी के गुरमेल सिंह को परास्त किया है।

उत्तर प्रदेश और पंजाब में विधान सभा चुनाव को अभी तीन माह ही हुए हैं। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा ने पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई थी। इन तीन माह में भाजपा की प्रवक्ता  नुपूर शर्मा की पैगंबर मुहम्मद साहब के बारे में विवदास्पाद टिप्पणी का देश के साथ ही पूरे उत्तर प्रदेश में जमकर विरोध हुआ। कई जगह मुस्लिमों के प्रदर्शन के दौरान हिंसा भी हुई। केंद्र सरकार की सेना में भर्ती के लिए आई अग्निवीर योजना का भी प्रदेश में जगह−जगह जमकर विरोध हुआ। पैगंबर मुहम्मद साहब के बारे में टिप्प्णी से तो मुस्लिम ही नाराज थे। किंतु अग्निवीर योजना से तो प्रदेश के युवा नाराज थे। उनकी नाराजगी कई जगह प्रदेश में हिंसा और तोड़फोड़ के रूप में नजर आई। लगता था कि यह हाल का मामला है, अतः इसका चुनाव पर असर नजर आएगा। किंतु रामपुर और आजमगढ़ के मतदाताओं ने सभी अनुमानों का फेल कर दिया।

रामपुर मुस्लिम बहुल सीट है। 1952 से अब तक हुए लोकसभा के 17 चुनाव में  इस सीट से मुस्लिम प्रत्याशी ने 11 बार और हिंदू प्रत्याशी ने मात्र छह बार विजय हासिल की है। इस सीट पर पूर्व मंत्री रहे आजम खान का बड़ा प्रभाव माना जाता है। हाल के विधान सभा चुनाव में भी उन्होंने जीत दर्ज की थी। इस उपचुनाव में भाजपा ने घनश्याम लोधी को प्रत्याशी बनाया। घनश्याम एक समय आजम खां के करीबी थे। वह सपा से एमएलसी भी रह चुके हैं। 2022 विधानसभा चुनाव से ठीक पहले लोधी ने सपा का दामन छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था। तब वह पार्टी से टिकट पाने की कोशिश में लगे थे, लेकिन नहीं मिल पाया। आजम खां के लोकसभा सीट छोड़ने पर उपचुनाव का ऐलान हुआ तो भाजपा ने घनश्याम लोधी को उम्मीदवार बना दिया। दूसरी तरफ सपा ने आजम खां के करीबी आसिम रजा को टिकट दिया। जेल से बाहर आने के बाद खुद आजम खां ने ही आसिम के नाम का ऐलान किया था, लेकिन इस चुनाव में घनश्याम लोधी ने 42 हजार मतों से जीत हासिल की।
आजमगढ़ लोकसभा सीट पूर्व मुख्यमंत्री और सपा नेता अखिलेश यादव की परम्परागत सीट बताई जाती रही है। 2019 के चुनाव में अखिलेश यादव को 64.04 प्रतिशत मत मिल पाए थे। जबकि इस बार के विजेता और 2019 चुनाव के भाजपा प्रत्याशी दिनेश लाल यादव निरहुआ को मात्र 35 प्रतिशत वोट मिले थे। पिछले लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव का मत 24 प्रतिशत बढ़ा था। इससे पहले इस सीट से  मुलायम सिंह यादव चुनाव जीते थे।
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामपुर व आजमगढ़ लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशियों की जीत पर कहा कि यह डबल इंजन वाली सरकार की डबल जीत है। जोकि लोकसभा चुनाव 2024 के लिए एक संदेश है। उन्होंने कहा कि पहले विधानसभा चुनाव में दो तिहाई बहुमत, विधान परिषद चुनाव और अब उपचुनाव में जीत डबल इंजन की सरकार के सुशासन पर जनता की मुहर है। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव परिणाम बताता है कि जनता परिवारवादी और सांप्रदायिक दलों और नेताओं को स्वीकार करने वाली नहीं है। जनता भाजपा के ‘सबका साथ सबका विकास’ के नारे के साथ है। उन्होंने कहा कि इन चुनाव परिणाम से यह स्पष्ट है कि भाजपा 2024 में यूपी की 80 में से 80 लोकसभा सीटों पर जीत की ओर बढ़ रही है।

पंजाब के संगरूर इलाके के जरिए राष्ट्रीय राजनीति में खुद को स्थापित करने के सपने पाल रही आम आदमी पार्टी के लिए अपने ही गढ़ के लोकसभा उपचुनाव में मिली हार किसी बड़े झटके से कम नहीं है। तीन माह पहले इसी आम आदमी पार्टी ने पंजाब विधानसभा चुनाव के दौरान इतिहास रचा था और सभी नौ विधानसभा सीटें साठ फीसदी से ज्यादा वोट हासिल करके जीतीं थीं। एक ही झटके में आप की सियासी पकड़ ढीली पड़ गई और आप का सियासी किला ध्वस्त हो गया। मुख्यमंत्री भगवंत मान अपने गृह इलाके को आप की सियासी राजधानी बताते हैं। ऐसे में सिमरनजीत सिंह के संगरूर का नया ‘मान’ बनने के साथ आप के हाथ से राजधानी निकल गई है। उनके गृह क्षेत्र के लोगों ने इस फैसले के साथ आप सरकार की तीन माह की कारगुजारी को कटघरे में खड़ा कर दिया है। पंजाब की यह हार वहां की आप सरकार की घटती लोकप्रियता को जाहिर करती है। आम आदमी पार्टी को अपना वर्चस्व बनाए रखने के लिए अपने नजरिए और कार्यक्रम पर फिर से विचार करना होगा।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भले ही कहें कि ये चुनाव 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए भविष्यवाणी है किंतु आगामी लोकसभा चुनाव में अभी समय है। चुनाव एक दिन में बदलता है, ऐसे में अभी से आगामी चुनाव की भविष्यवाणी करना ठीक नहीं। किंतु तीन माह में पंजाब में आप की हार जरूर पार्टी के लिए चिंता पैदा करेगी।

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