कल का चेदि देश आज की चंदेरी*

Screenshot_20220625-111408_WhatsApp

________________

हमारी दुर्बलता रही है कि हम ने अपने इतिहास ग्रंथ महाभारत में वर्णित राजा महाराजाओं उनके व्यक्तित्व कृतित्व व उनकी राजधानियों को मात्र पौराणिक स्थल ,पात्र व मनोरंजक कथा मानकर ही बौद्धिक तौर पर संतुष्ट हो गए हैं… बात यदि हम महाभारत की करें तो दमघोष पुत्र चेदि नरेश *शिशुपाल* का नाम आपने जरूर सुना होगा…वही शिशुपाल जिसका वध योगिराज श्रीकृष्ण ने किया था | श्री कृष्ण की बुआ का लड़का था शिशुपाल | वह कोई छोटा मोटा राजा नहीं था बहुत ही बलवान महाराजा था |

आखिर महाराज शिशुपाल का चेदि महाजनपद भारत में कहां पर था?

आज के मध्य प्रदेश में अशोकनगर जिले में स्थित बुंदेलखंड – मालवा की सीमा पर स्थित बेतवा, उर नदी से तीन ओर से घिरा हुआ चौथी ओर से विद्यांचल की पहाड़ियों से घिरा चंदेरी टाउन ही अतीत का चेदि नगर है… महाभारत काल में बहुत संपन्न समृद्ध शक्तिशाली नगर रहा है यह आर्यव्रत का… महाभारत काल के पश्चात हस्तिनापुर की तरह यह भी गुमनामी के अंधेरे में खो गया लेकिन आठवीं शताब्दी में गुर्जर प्रतिहार वंश के राजाओं ने इसे इसकी खोई हुई पहचान वापस दिलाई…|

गुर्जर प्रतिहार वंश के 11 से अधिक राजाओं ने इस पर शासन किया.. इस संबंध में ग्वालियर संग्रहालय में स्थित शिलालेख पर सारी जानकारी उपलब्ध है| सबसे अधिक उल्लेखनीय कार्य गुर्जर राजा *कीर्तिपाल ने किया…| गुर्जर प्रतिहार वंश के राजा कीर्तिपाल ने शिशुपाल की चंदेरी को नई पहचान दिलाते हुए नवीन गुर्जर प्रतिहार वंश स्थापत्य कला का परिचय देते हुए इसका जीर्णोद्धार कराया.. बूढ़ी चंदेरी से नई चंदेरी को अपनी राजधानी बनाया.. *कीर्ति दुर्ग*, कीर्ति सरोवर, कीर्ति मंदिर आदि का निर्माण कराया… गुर्जर प्रतिहार वंश ने चंदेरी को भारत का प्रमुख व्यापारिक केंद्र बना दिया| मालवा मारवाड़ गुजरात के बंदरगाह से व्यापारिक आदान-प्रदान होता था.. इस की संपत्ति वैभव पर आक्रांताओं की गिद्ध दृष्टि पड़ गई |

महाभारत कालीन इस नगर की विडंबना तो देखिए 11वीं शताब्दी में जब *गुर्जर प्रतिहार वंश* का पतन शुरू हुआ तो.. 1246 ईस्वी में अलाउद्दीन खिलजी ने चंदेरी नगर को लूटा… मंदिरों को तोड़ा…. इसके पश्चात 1520 मैं राणा सांगा ने इसे जीतकर अपने विश्वासपात्र मेदनी राय खंगार राजपूत को सौंप दिया… 6 मई 1529 को बाबर ने चंदेरी पर इतिहास का भयंकर हमला किया… खंगार वीरता से लड़े भारत के मध्य काल का सबसे बड़ा जौहर चंदेरी में ही हुआ था… आज भी जौहर स्थल मौजूद है.. महाभारत कालीन तथा गुर्जर प्रतिहार वंश के राजाओं के किले को ध्वस्त कर दिया गया.. यह किले इतने सुंदर थे कि यहां हाथियों पर चढ़कर खरीदारी होती थी भव्य बाजार लगता था… मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी जामा मस्जिद उसी काल में चंदेरी शहर के अंदर बनाई गई|

बाबर की मृत्यु के पश्चात शेरशाह सूरी ने इस पर हमला किया… इसे लूटकर बुंदेलो को सौंप दिया… बुंदेला से इसे *ग्वालियर* के सिंधा राजघराने ने छीन लिया…गद्दार दौलतराव सिंधिया ने सन 1844 में इसे अंग्रेजों को सौंप दिया |अंग्रेजों को सालाना ₹4000000 की राजस्व आमदनी चंदेरी से होती थी….|

यह तो एक उदाहरण भर है *महाभारत के महायुद्ध के दुष्परिणाम का … जिसमे बलवान राजे महाराजे मारे गए आपसी फूट से विदेशियों के हम पराधीन हुए कालांतर में मध्य युग आते आते* ।आज का चंदेरी टाउन बुंदेलखंडी चंदेरी साड़ियों के लिए जगत प्रसिद्ध है… कभी आप मध्य प्रदेश जाए तो यहां जरूर घूम सकते हैं.. महल सरोवर बावड़िया तालाब को देख सकते हैं |

आर्य सागर खारी ✒✒✒

Comment:

grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
betpark giriş
betpark giriş
betvole giriş
betvole giriş
fenomenbet
betvole giriş
betkanyon
betvole giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
imajbet giriş
vaycasino giriş
imajbet giriş
vaycasino giriş
safirbet giriş
safirbet giriş
betvole giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
timebet giriş
timebet giriş
maxwin
realbahis giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
timebet giriş
timebet giriş
betpuan giriş
betpuan giriş
meritking giriş
meritking giriş
vaycasino giriş
meritking giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
kulisbet giriş
mariobet giriş
mariobet giriş
realbahis giriş
vaycasino giriş
grandbetting giriş
hititbet giriş
superbahis giriş
süperbahis giriş
norabahis giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
betvole giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
betnano giriş
norabahis giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betnano giriş