*पीडक ही, पीड़ित हो गया*

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पशु पक्षी जीव जंतुओं से हमारा संबंध अनेक आयामों में है पशु पक्षी जीव जंतु पालनीय हैं ,हम इनके पालक हैं|

यह रक्षा करने योग्य रक्षनीय हैं, हम इनके रक्षक हैं |
सृष्टि के आदि से लेकर मनुष्य ने इस कर्तव्य को भलीभांति निभाया… सभी जीवो से यथा योग्य कार्य लिया… बगैर पीड़ा पहुंचाए सभी जीवो को आश्रय दिया… मनुष्य को स्वस्थ संपदा आरोग्य मिला |

लेकिन जब से हम इन जीवो के भक्षक बन गए पालक की जगह पीड़क की भूमिका में आ गए.. हम नाना प्रकार की व्याधियों से ग्रस्त हो गए |

वेद कहता है सभी प्राणियों को मित्र की दृष्टि से देखें दो पैर चार पैर वाले सभी का स्वामी ईश्वर है… सभी जीव अपने कर्म अनुसार ईश्वर की दी गई भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं… जीवन रंगमंच में सभी एक दूसरे का सहयोग कर रहे हैं… स्वभाव से लालची स्वार्थी मानव कहां समझने वाला था… उसने जंगलों को काटकर मानव बस्तियां बसा दी जंतुओं के प्राकृतिक आवास को नष्ट किया, वह वन्यजीवों के संपर्क में आया… यह संपर्क सहज प्राकृतिक नहीं था नतीजा सौगात में मिले खतरनाक वायरस, जानलेवा संक्रमण कुछ वायरस बंदर से मिले कुछ चमगादड़ से कुछ पक्षियों से कुछ सूअर से कुछ अन्य जीवों से… लेकिन इनमें इन जीवो का क्या दोष?

सारा दोष क्रूर मानव का है जिन्होंने इन जीवो को निवाला बना लिया… | मनुष्य केवल मांसाहार के माध्यम से ही संक्रमित होता है.. यदि जीवन में मांसाहार ना हो तो संक्रमण नहीं लग सकता.. हमने चमगादड़ को विलेन बना दिया चमगादड़ ना हो तो आम के बागों में आम न लग पाए पका हुआ चित्तीदार केला भी चमगादड़ के सहयोग से मिलता है चमगादड़ ना हो कीट फसलों को नुकसान पहुंचा दें|

हमने कुछ शताब्दियों में अनेक जीव जंतुओं की प्रजातियों को विलुप्त कर दिया कुछ विलुप्तकरण की कगार पर है | जब अपने प्राणों के संकट पर आई तो चतुर मानुष क्या-क्या नहीं कर रहा है…?

कुछ भी हो यह संकट ईश्वर द्वारा प्रदत्त नहीं है इस संकट को मनुष्य ने अपने अमानवीय क्रियाकलापों से सैकड़ों वर्षों से संचित दुष्कर्म ने खड़ा किया है |

जैसा हमने बोया वैसा ही काटा है जैसा भविष्य में बोयेगे वैसा ही भविष्य में काटेंगे, जितनी हमारे कर्मों में विविधता है उतनी ही विविधता से हमें दंड मिलेगा… इससे कोई नहीं बचा सकता… यदि ऐसे ही चलता रहा |

आश्चर्य है हम आज भी प्रायश्चित नहीं कर पा रहे हैं |

प्रकृति वन्यजीवों पर्यावरण को लेकर हमारा नजरिया कुछ नहीं बदला है|

आर्य सागर खारी ✍✍✍

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