बढ़ें राममंदिर से रामराज्य की ओर

download (1)


रवि शंकर

पाँच सौ वर्ष से अधिक के संघर्ष के बाद अयोध्या में अंतत: भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण कार्य प्रारंभ हो गया है। निश्चित ही यह एक शुभ संकेत है। वर्ष 2020 हालाँकि कोरोना के कारण काफी खराब माना जा रहा है, परंतु यदि हम भारत में हुए कुछेक राजनीतिक तथा सांस्कृतिक निर्णयों को देखें तो यह वर्ष भारत की धरोहर के उत्तराधिकारियों के लिए प्रसन्नता का वर्ष रहा है। इसी वर्ष में महर्षि कश्यप की भूमि जम्मू-कश्मीर पर लगा धारा 370 तथा 35 का ग्रहण समाप्त हुआ, पिछले 14 सौ वर्षों से जड़त्व के शिकार मुस्लिम समाज में तीन तलाक के स्त्रीविरोधी कानून की समाप्ति का मार्ग प्रशस्त हुआ और इसी वर्ष विश्व के करोड़ों लोगों के आराध्य प्रभु श्रीराम के जन्मस्थान अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण भी प्रारंभ हुआ। इस प्रकार देखें तो कोरोना ने हमारी जितनी खुशियां छिननी चाहीं, उससे कई गुणा खुशियां हमें मिलती गईं।
प्रश्न उठता है कि आखिर अयोध्या में भव्य मंदिर के निर्माण से ऐसा क्या होगा, जिसके कारण संपूर्ण देश इतनी प्रसन्नता का अनुभव कर रहा है? देश में तो वैसे भी लाखों मंदिर हैं और बहुत से भव्य मंदिर भी हैं। ऐसे में एक और भव्य मंदिर के निर्माण से क्या अद्भुत घटित होगा? इस प्रश्न का उत्तर समझना हो तो हमें केवल जन्मभूमि के मंदिर का नहीं, वरन् प्रभु श्रीराम और उनके प्रभाव का भारतवर्ष सहित संपूर्ण विश्व में व्याप्ति और उसके इतिहास का अध्ययन करना होगा। आखिर क्यों प्रभु श्रीराम पूरे विश्व में सम्माननीय रहे हैं? आखिर क्यों एक समय संपूर्ण विश्व श्रीराम कथा का श्रवण करता रहा है? आखिर क्यों प्रभु श्रीराम संपूर्ण विश्व के आराध्य और आदर्श रहे हैं?
वस्तुत: यदि हम विचार करें तो श्रीराम केवल एक महापुरुष या अवतार मात्र नहीं हैं। श्रीराम भारतीयों की आशा का एक केंद्र भी हैं। भारतीय जब भी निराश होते हैं, उन्हें श्रीराम से ही प्रेरणा मिलती है। इसलिए जब भी आवश्यकता पड़ी भारतीयों ने श्रीराम का ही नाम स्मरण किया। देश के स्वाधीनता संग्राम के दौरान भी भारतीयों की आशा का केंद्र केवल अंग्रेजों से मुक्ति नहीं थी, उनकी प्रेरणा रामराज्य प्राप्त करने की थी, जिसकी आशा महात्मा गाँधी जगा रहे थे। हालाँकि महात्मा गाँधी को रामराज्य की कितनी समझ थी, यह तो स्पष्ट नहीं है, परंतु भारत के जन-जन को रामराज्य की ठीक-ठीक समझ है और इसलिए रामराज्य को लाने के घोष करने पर वे महात्मा गाँधी के पीछे चल पड़े थे।
तो क्या हम राम मंदिर के निर्माण के प्रारंभ को रामराज्य की दिशा में बढ़ता एक कदम मान सकते हैं? इसका उत्तर हाँ भी है और नहीं भी। हाँ, इसलिए क्योंकि अयोध्या में भव्य मंदिर के निर्माण से देश के सनातनी समाज में गर्व की अनुभूति का जागरण होगा। उनमें यह आत्मविश्वास जगेगा कि यदि वे चाहें तो देश में रामराज्य की स्थापना भी कर सकते हैं। इस आत्मविश्वास का उदय ही इस दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है। आखिरकार घोर सशस्त्र संघर्ष, प्रबलतम राजनीतिक विरोध और सनातनपरांगमुख न्याय व्यवस्था के होते हुए भी यदि यह लड़ाई जीती जा सकी है, तो यह आत्मविश्वास क्यों न पैदा हो कि हम चाहें तो आज की इस धर्मविरोधी शासन व्यवस्था को रामराज्य में भी बदल सकते हैं। रामराज्य को स्थापित करने की दिशा में इसे पहला कदम माना जाना चाहिए।
आज के कुपठित काल में यह प्रश्न भी उठ सकता है कि आखिर रामराज्य हमे चाहिए ही क्यों? आखिर इस संविधान के राज्य में क्या समस्या है? इस संविधान के राज्य में जो समस्याएँ हैं, वे एक पृथक आलेख का विषय हैं, परंतु रामराज्य की जो विशेषताएं हैं, वह हमें अवश्य जानना चाहिए। रामराज्य की पहली विशेषता है – दैहिक, दैविक, भौतिक तापा, रामराज काहू नहीं व्यापा। क्या हम आज के समय में यह कह सकते हैं कि अपने देश का के किसी भी नागरिक को कोई भी कष्ट या परेशानी नहीं है? इसी प्रकार श्रीराम वन में मिलने आए भरत से कुशलक्षेम पूछते हुए अयोध्या की राजनीतिक स्थितियों के बारे में जो कुछ पूछते हैं, उन्हें ध्यान में लाएं, तो पता चलेगा कि वर्तमान राज्य तो उसके पासंग बराबर भी नहीं है।
रामराज्य में समानता का नहीं, यथायोग्य व्यवहार का भरोसा दिलाता था। आज समानता के नाम पर लोगों में भेदभाव किया जाता है। संविधान एक ओर तो यह कहता है कि वह जाति, नस्ल, रंग, भाषा, लिंग आदि के आधार पर किसी के साथ भेदभाव नहीं करेगा। परंतु कुछ जातियों, भाषाओं आदि को संरक्षण देने के नाम पर तुरंत उसी संविधान में ऐसी धाराएं जोड़ दी जाती हैं, जो इन्हीं आधारों पर भेदभाव भी करती हैं। प्रश्न उठता है कि यदि संविधान उन जातियों और भाषाओं को संरक्षण देगा तो क्या शेष को अरक्षित छोड़ देगा? यह न तो समानता का व्यवहार है और न ही यथायोग्य व्यवहार ही है। रामराज्य में हर किसी के साथ यथायोग्य व्यवहार है। वहाँ निषादराज गुह भी अपने वनप्रदेश में सुरक्षित राज्य करते हैं, कपिसम्राट सुग्रीव अपने पर्वतों पर राज्य करते हैं, इससे प्रभु श्रीराम के राज्य में कोई बाधा नहीं आती है। प्रभु श्रीराम तो केवल इतना सुनिश्चित करते हैं कि कहीं भी धर्म का उल्लंघन न हो। अग्निहोत्रादि यज्ञ-याग निर्बाध चलते रहे हैं। कोई किसी पर अत्याचार न करे।
रामराज्य का एक अर्थ राज्य की सनातन व्यवस्था भी है। राज्य की सनातन व्यवस्था कहती है कि राज्य का काम है कि लोगों में बढ़ रहे लोभ, मद, मोह, मत्सर, काम, क्रोध आदि दुर्गुणों को कम करने के उपाय करे। इसके लिए राज्य को दंड देने का अधिकार दिया गया। लोभ, मद और मोह से आर्थिक तथा सामाजिक भ्रष्टाचार जन्म लेता है, मत्सर और क्रोध से विभिन्न प्रकार के अपराध होते हैं, काम से व्यभिचार और बलात्कार जैसी घटनाएं घटती हैं। इन पर नियंत्रण करने के लिए ऐसे व्यवहार करने वालों को दंडित करने का विधान है। परंतु वर्तमान में तो राज्य इसका ठीक उलटा कर रहा है। राज्य तो लोगों को नि:शुल्क सुविधाएं बांटने में व्यस्त है। वह न्याय करने का अपना काम छोड़े हुए है।
रामराज्य रूपी सनातन राज्य व्यवस्था में गौ, ब्राह्मण यानी ब्रह्मज्ञानी विद्वान आदियों की रक्षा की जाती है। आज तो गौहत्या के सरकारी कत्लखाने खुले हुए हैं, विद्वानों के स्थान पर भारतविरोधी चाटुकारों को सम्मानित किया जा रहा है। विद्वता को विश्वविद्यालयों के प्रमाणपत्रों में कैद कर दिया गया है। इसका प्रमुख कारण यही है कि राज्यकर्ता स्वयं विद्वान नहीं हैं। उन्हें स्वयं ही शास्त्रों का ज्ञान नहीं हैं। उपनिषदों में कथाएं आती हैं जिनमें राजा स्वयं विद्वानों से प्रश्न पूछते हैं और उनकी परीक्षा लेते हैं। परंतु आज के राज्यकर्ताओं में विद्वता की आवश्यकता ही नहीं है। उन्हें केवल चुनाव जीतने भर की योग्यता अपेक्षित होती है। इससे समाज में अविद्वानों की प्रतिष्ठा बढ़ती है।
सनातन राज्य व्यवस्था एक. मानवीय राज्य व्यवस्था है। रामराज्य उसका चरमोत्कर्ष रहा है। प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर से उसका रामराज्य की आकांक्षा मन में जगना सहज स्वाभाविक. है।:

Comment:

norabahis giriş
betnano giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
maxwin giriş
maxwin giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
betpas giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betplay giriş
betplay giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
mariobet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
mariobet giriş
betvole giriş
mariobet giriş
safirbet giriş
safirbet giriş
mariobet giriş
betpas giriş
hititbet giriş
madridbet giriş
madridbet giriş
dedebet
betkanyon
radissonbet
casinofast
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
norabahis giriş
betgaranti giriş
betnano giriş
norabahis giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
norabahis giriş
betnano giriş
betnano giriş
betwild giriş
redwin giriş
safirbet giriş
safirbet giriş
betpark giriş
vegabet giriş
vegabet giriş
redwin giriş
vaycasino giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
realbahis giriş
realbahis giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
timebet giriş
timebet giriş