माता पिता और गुरु, ये तीन उत्तम शिक्षक और महान उपकारी होते हैं : स्वामी विवेकानंद परिव्राजक

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“वेद आदि शास्त्रों में बताया है, कि माता-पिता और गुरु, ये तीन उत्तम शिक्षक महान् उपकारी होते हैं। इनको धोखा देना तो महापाप है।”
वैसे तो किसी को भी धोखा देना अपराध ही है, लेकिन जो जितना महान व्यक्ति होता है, जितना अधिक दूसरों का उपकार करता है, उसको धोखा देने का पाप उतना ही बड़ा माना जाता है। माता-पिता अपने बच्चों का कितना उपकार करते हैं, यह तो आप सब लोग जानते ही हैं। और गुरुजन भी अच्छे अच्छे महापुरुषों को तैयार करते हैं।
माता जीजाबाई जैसी माताओं ने शिवाजी जैसे महावीर विजयी योद्धा को तैयार किया। इसी प्रकार से श्री कृष्ण जी महाराज जैसे पिता ने, प्रद्युम्न नाम की एक उत्तम संतान बनाई। गुरु विरजानंद जी जैसे महान आचार्य ने महर्षि दयानंद जैसा महान व्यक्तित्व तैयार किया।
“ऐसे ऐसे माता पिता और आचार्य गण जो अपने संतानों तथा शिष्यों का निर्माण करते हैं। उनका कितना अधिक उपकार है, और मानना चाहिए।”
इसी प्रकार से आज भी बहुत से माता पिता और गुरुजन अपने संतानों और शिष्यों का पूरी ईमानदारी परिश्रम और बुद्धिमत्ता से निर्माण करते हैं। वे अपने संतानों और शिष्यों पर महान उपकार करतें हैं। “परन्तु विडम्बना तो यह है कि ऐसे पूजनीय वंदनीय माता पिता और गुरुओं को भी संसार में कुछ लोग धोखा देते हैं। मूर्ख बनाते हैं। उनके साथ अनेक प्रकार का दुर्व्यवहार करते हैं। उन्हें अपमानित करते हैं। उन्हें प्रताड़ित करते हैं। ऐसी घटनाएं भी यदा कदा सुनने में आती रहती हैं।” आपने ऐसे वीडियो भी देखे होंगे।
“विचार करने की बात यह है, कि जो लोग अपने माता-पिता और गुरुजनों को भी धोखा देने में संकोच नहीं करते, वे संसार के बाकी लोगों को तो कितना अधिक मूर्ख बनाते होंगे? उनको कितना अधिक धोखा देते होंगे? ऐसे लोग महान अपराधी हैं। समाज में भी उनकी बहुत निन्दा होती है, तथा ईश्वर के न्यायालय में तो उन्हें बहुत अधिक/भयंकर दंड मिलेगा ही।”
इसलिए सभी लोग सावधानी से व्यवहार करें। समाज की निंदा के पात्र न बनें। कभी-कभी समाज के लोग ऐसे दोषियों को दंडित भी कर देते हैं। उनके दंड का भय सदा अपने मन में रखें। “और अंत में ईश्वर के दंड का भय तो अवश्य ही मन में रखना चाहिए। ईश्वर बहुत ही जबरदस्त है।
वह कभी किसी को नहीं छोड़ता।” ऐसे दुष्ट अपराधियों को तो भयंकर दंड देता है। “हे भगवन् ! ऐसे मूर्ख एवं दुष्ट लोगों को आप अवश्य एवं शीघ्र ही सद्बुद्धि दीजिए, ताकि वे संसार में सभ्यता से जी सकें और दूसरों को भी जीने दें। वे स्वयं भी तनाव में न जीएं तथा दूसरों को भी दुख न दें।”

प्रस्तुति : आर्य सागर खारी

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