आखिर क्या है आनंद मार्ग ? – एक विश्लेषण

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आनंद मार्ग का विश्लेषण:
डॉ डीके गर्ग
स्थापना आनन्द मार्ग (“आनंद का मार्ग”, आनंद मार्ग और आनन्द मार्ग भी लिखा गया है) एक सामाजिक एवं आध्यात्मिक पन्थ है। इसका आरम्भ सन् १९५५ में बिहार के जमालपुर में श्री प्रभात रंजन सरकार (१९२१ – १९९०) द्वारा की गयी थी या यह आधिकारिक तौर पर आनन्द मार्ग प्रचारक संघ (आनंद के मार्ग के प्रचार के लिए संगठन) एक है 1955 में प्रभात रंजन सरकार द्वारा भारत के जमालपुर, बिहार, भारत में स्थापित किया गया।


1939 में कोलकाता के विद्यासागर कॉलेज में प्रवेश लेने के लिए सरकार ने कोलकाता के लिए जमालपुर छोड़ दिया। अपने पिता की मृत्यु के बाद अपने परिवार की देखभाल करने के लिए सरकार को अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी और 1944 से 1950 तक सरकार ने जमालपुर, बिहार में भारतीय रेलवे मुख्यालय में एक एकाउंटेंट के रूप में काम किया। यहीं पर उन्होंने अपने कुछ चुनिंदा साथियों को प्राचीन तंत्र साधना की तकनीक सिखाई और धीरे-धीरे उनके द्वारा सिखाई जाने वाली आध्यात्मिक पद्धतियों के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों उनसे जुड़ते चले गए।

इस मिशन का का मूल उद्देश्य इस प्रकार है :
सुरु में इस संगठन का मूल उद्देश्य यह प्रभात रंजन सरकार द्वारा प्रस्तावित दर्शन और जीवन शैली, सामाजिक-आध्यात्मिक संगठन और आंदोलन, जिसे व्यक्तिगत विकास, सामाजिक सेवा और समाज के आसपास के परिवर्तन रूप में वर्णित किया गया है। आनंदमार्गियों के अनुसार पश्चिम बंगाल में उनके आंदोलन को कुचलने के लिए वामपंथियों ने आनंदमार्गियों को कई तरह से प्रताड़ित किया ।
तंत्र और योग पर आधारित इस संगठन का उद्देश्य- आत्मोद्धार, मानवता की सेवा और जीव मात्र की शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक आवश्यकताओं की पूर्ति करना है। आनंदमार्ग के दुनिया भर में चिंतन केंद्र हैं जहाँ तंत्र, योग और ध्यान सिखाया जाता है। इस एकेश्वरवादी संगठन का मूल मंत्र है ‘बाबा नाम केवलम’ है। बाबा नाम केवलम आनंदमूर्ति द्वारा दिया गया एक सार्वभौमिक कीर्तन मंत्र है ।
आनंद मार्ग का पाठकों की जानकारी, अवलोकन एवं मूल्यांकन के लिए प्रेषित है।
जीवन में बहुत से लोग सही मार्ग पर चलते हैं। और बहुत से भटक भी जाते हैं। धर्म को छोड़कर अधर्म मार्ग पर चल पड़ते हैं। इसमें बहुत से कारण हैं। जिनमें से एक प्रमुख कारण संसार के लोगों का चाल-चलन है। *”अधिकतर लोग शाब्दिक रूप से ईश्वर को मानते जानते हैं, वे ईश्वर को ठीक ठीक नहीं समझते।”
ये मिशन भी कोई धर्म नहीं है न तो हिन्दू धर्म है , न मुस्लिम ना कोई और ये मिशन क्या है न ही कोई मार्ग जिस पर चलकर मोक्ष्य की कप्पना कप्लना की जा सके किसी को नहीं मालूम ,सिर्फ हिन्दू धर्म का चोला पहना है ,उद्देश्य है समाज सेवा तो इसमें धर्म और रामकृष्ण नाम के गुरु की मूर्ति पूजा और अलग से एक नया पंथ कहा से आ गया . इनका कोई प्रामाणिक विचारधारा का साहित्य भी नहीं है जिस पर कोई बहस ,आलोचना की जा सके।
आनंद मार्ग और ईश्वर से मेल करने के के नाम पर आनंद मार्ग की इस्थपना करके उस क्षेत्र की गरीब भोली भाली जनता को गुमराह करने का इनको श्रेय प्राप्त है।

दरअसल इस मार्ग का संस्थापक सर्कार एक योग्य होनहार विद्यार्थी था , उसने बंगाल में वामपंथी नास्तिक लोगो को ललकारा और एक समाज सुधारक का कार्य किया। अपनी योग्यता और अलप स्वाध्याय के बल पर योग और ईश्वर के प्रति शरद्वान होना सिखाया ,मांस खाना छुड़वाया। जिस कारण वामपंथी इनसे नाराज भी हुए और इनके ऊपर अत्याचार भी किय। परन्तु ये अपने सिधान्तो पर डटे रहे।

लेकिन इसका मतलब ये नहीं की इस व्यक्ति की बात वेद वाक्या हो गयी। समाज में सुधर की विचारधारा वाले महापुरुईश हमेशा हुए है लेकिन उनकी मृत्यु के बाद उनके चलो ने जो ग़दर मचाया है वो इनकी कल्पना से परे है। इसीलिए कहते है की अल्प ज्ञान यानि आधा ज्ञान हमेशा खतरनाक होता है। जिसका परिणाम आने वाली पीढ़ी को मूर्खतापूर्वक भुगतना पड़ता है।
आनंद मार्ग ने ईश्वर से मेल कराने गुरु के नाम पर आनंद का रास्ता मिलने के चमत्कार के नाम पर उस गरीब क्षेत्र की गरीब भोली भाली जनता को गुमराह किया है।
4. आनंद मार्ग की असलियत
आनंद मार्ग वही संगठन है जिसका नाम पिछले कुछ सालों के दौरान पुरुलिया में हथियार गिराए जाने के मामले में कई बार आया है. बीबीसी की पड़ताल के मुताबिक 1995 में एक विदेशी एयरक्राफ्ट से पुरुलिया में जो हथियार गिराए गए थे वे इसी संगठन के लिए थे. हालांकि इस मामले के एक अभियुक्त किम डेवी का कहना है कि इसके पीछे केंद्र की कांग्रेस सरकार थी.

मैंने इनसे कुछ प्रश्न किये जिनका उत्तर इनसे कभी नहीं मिला :

। गुरु नाम केवलं क्या है ,क्या ये ईश्वर की उपासना है ?
2 आपका मुख्या साहित्य क्या है
३ आप योग की बात करते है जिसमे सिर्फ योगासन है , आप अष्टांग योग की पूरा क्यों नहीं बताते
४ आपके गुरु को ये ज्ञान योग , शाकाहार और भक्ति का कहा से प्राप्त हुआ
५ आपके गुरु जब मृत्यु के बाद भी सब कुछ कर सकते है तो उनके पिता की मृत्यु क्यों हुई, उन्होंने गरीबी में पढ़ाई छोड़ दी,
6 गुरु जेल में रहे जिन पर आपराधिक मुकदमे थे
७ गुरु जी कभी बंगाल में गौ हत्या नहीं बंद करवा सके
८ गुरु जी क्या क्या कर सकने की क्षमता रखते है
९ गुरु जी की कोई ऐसी उपलब्धि जिस से उनके ईशवर होने का अहसास हो
१० क्यों जुरु जी ने वेद ,उपनिषद , मनुस्मृति ,दर्शन शास्त्र ,अष्टांग योग पढ़े है ,यदि नहीं तो कैसे वो वेद आदि के विरुद्ध आचरण बता सकते है
11 गुरु जी की मूर्ति पूजा और जाप से क्या क्या लाभ हो सकता है

कोई जवाब नहीं मिला। ईश्वर का मुख्य नाम ओ३म् है। इसका प्रमुख अर्थ है सर्वरक्षक। ईश्वर सब की रक्षा करता है। परंतु उसकी रक्षा को सब लोग अनुभव नहीं कर पाते।”*

महर्षि मनु ने धर्म के जो दस लक्षण बताये है उनकी चर्चा दूर-दूर तक नहीं होती और यह मिशन समाज सेवा के नाम पर शुरू होकर आहत्मावाद के नाम पर पूरी तरह से भटक चुका है।
कृपया अपने विवेक एवं स्वाध्य के बल पर ही किसी भी समाज, पंत, मजहब से जुडना चाहिए जिसकी कथनी करनी में कोई अंदर ना हो और सत्य सनातन र्धम से विमुख न करें।

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