….तो आप अपना भविष्य भी स्वयं ही जान सकते हैं

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आपका भविष्य आपके विचारों, गुण कर्म स्वभाव तथा आप के पुरुषार्थ पर निर्भर है। आपके विचारों, गुण कर्म स्वभाव और पुरुषार्थ को आप स्वयं ही जानते हैं। तो आप अपना भविष्य भी स्वयं ही जान सकते हैं। इसके लिए किसी ज्योतिषी आदि के पास जाने की आवश्यकता नहीं है।


“मेरा भविष्य कैसा होगा? मेरे जीवन में कोई दुख तो नहीं आएगा! मेरा जीवन सदा सुखमय तो रहेगा न!” इस प्रकार की बातें प्रायः सभी लोग अपने मन में सोचते हैं, और अपने भविष्य को लेकर बड़े चिन्तित रहते हैं। अपने भविष्य को जानने के लिए सुबह-सुबह अखबार पढ़ते हैं, टेलीविजन में न्यूज़ चैनल पर भविष्यफल देखते हैं। कम्प्यूटर से जन्मकुंडली बनवाते हैं। उसे पढ़वाने के लिए ज्योतिषियों के पास दूर-दूर तक जाते हैं इत्यादि। परन्तु वे भोले लोग इस बात को नहीं समझते, कि जो ज्योतिषी स्वयं अपना भविष्य नहीं जानता, वह आपका भविष्य क्या बताएगा? कम्प्यूटर तो एक जड़ पदार्थ है, क्या वह आपका भविष्य जानता है? वह क्या बताएगा?
जैसी हानि लाभ की घटनाएं आपके घर परिवार में होती हैं, क्या वैसी ही घटनाएं उन ज्योतिषियों के घर परिवार में नहीं होती? उनके घरों में भी सब वैसी ही घटनाएं होती हैं, जैसी और लोगों के घरों में। आप उन पर ध्यान नहीं देते, बस इतनी ही कमी है।
बड़े-बड़े ज्योतिषियों के जीवन में बड़ी बड़ी दुर्घटनाएं हो जाती हैं। उनके घरों में चोरियां होती हैं, डकैतियां होती हैं, उनकी बेटियां विधवाएं हो जाती हैं। वे लोग भी रोगी होते हैं, उनके संबंधियों के भी एक्सीडेंट होते हैं, आदि आदि अनेक प्रकार की दुर्घटनाएं उनके परिवारों में भी होती हैं। वे अपना भविष्य पहले से क्यों नहीं जान पाते? और उन दुखदायक घटनाओं से बचने का उपाय स्वयं क्यों नहीं कर पाते? इसलिए आप थोड़ा गंभीरता और बुद्धिमत्ता से विचार करें, तो आपको यह बात समझ में आ सकती है, कि कोई भी ज्योतिषी अपना या किसी का भी भविष्य न तो जानता है, और न ही बता सकता है.
एक व्यक्ति ने पूछा, फिर ज्योतिषी लोगों की कुछ भविष्यवाणियां तो ठीक निकलती हैं, उसका क्या कारण है?
उसके प्रश्न का उत्तर यह है कि, उनकी कही हुई कुछ बातें, जो ठीक निकलती हैं, वे गणित विद्या के “संभावना के नियम = Law of Probability” से ठीक निकलती हैं। इसका अर्थ होता है, कि यदि 100 विद्यार्थी परीक्षा देंगे, तो सबके सब फेल नहीं हो जाएंगे। लगभग 40 50 विद्यार्थी तो पास हो ही जाएंगे, जो पढ़ाई में मेहनत करते हैं। इसी प्रकार से यदि कोई व्यक्ति 100 भविष्यवाणियां करेगा, तब सारी तो गलत नहीं होंगी, उसमें से 30 40 तो ठीक निकल ही जाएंगी। वह उसके अनुभव और संभावना के नियम के आधार पर ठीक निकलती हैं, किसी ज्योतिष विज्ञान से नहीं। न ही कोई ऐसी विद्या का अस्तित्व है।
एक छोटी सी बात पर आप विचार करें, कि व्यक्ति कर्म करने में स्वतंत्र है या परतंत्र है? आप कहेंगे “स्वतंत्र है.” हमारा प्रश्न होगा कि स्वतंत्र का अर्थ क्या होता है? अपनी इच्छा और अपनी बुद्धि से कर्म करना, या दूसरे की? आप कहेंगे, “अपनी इच्छा और अपनी बुद्धि से।”
इसी प्रकार से परतंत्र का अर्थ क्या होता है, “दूसरे की इच्छा और दूसरे की बुद्धि से कर्म करना.
अब सोचिए, यदि व्यक्ति कर्म करने में स्वतंत्र है, तो वह अपनी इच्छा से कर्म करेगा, या दूसरे की? अपनी इच्छा से। क्योंकि स्वतंत्र को ही उसके कर्म का फल दिया जा सकता है। यदि वह अच्छा कर्म करेगा, तो उसे अच्छा फल = सुख दिया जाएगा। यदि वह बुरा कर्म करेगा तो उसे बुरा फल = दुख दिया जाएगा। यही न्याय है।
जब व्यक्ति कर्म करने में स्वतंत्र है। वह अपनी इच्छा और बुद्धि से योजना बना कर कार्य करेगा। तो इस नियम के अनुसार, जब तक उसने सोचा ही नहीं, कि मैं 2 महीने बाद या 6 महीने बाद क्या करूंगा? तब तक उसे दूसरा व्यक्ति कैसे जान लेगा? नहीं जान पाएगा। बिना जाने वह जन्म कुंडली कैसे बना लेगा? किसी का भविष्य कैसे बता देगा? इसलिए जन्म कुंडली में कुछ नहीं लिखा। उसके पीछे भागना कोई बुद्धिमत्ता नहीं है।
आप अपने विचारों को, अपने गुण कर्म स्वभाव को जानते हैं, कि मेरा गुण कर्म स्वभाव कैसा है? अपने गुण कर्म स्वभाव के अनुसार आप दूसरे लोगों से व्यवहार करते हैं। यदि आप का गुण कर्म स्वभाव अच्छा है, और दूसरे व्यक्ति का भी आप जैसा अच्छा है, दोनों के विचार एक समान हैं। दोनों एक जैसी योजनाएं बनाते हैं। उसी प्रकार से कर्म करते हैं। तो आप समझ लीजिए, कि आपका संबंध दूसरे व्यक्ति के साथ जमेगा। जीवन भर जमेगा।
परंतु जहां कहीं आपस में आप के विचारों में टकराव होगा, योजनाएं भिन्न भिन्न होंगी, कार्य शैली अलग अलग होगी, बस वही से संबंध कमजोर होना शुरू हो जाएगा। यदि वह विचारभिन्नता रोकी न गई, और विचारों में तालमेल नहीं बिठाया गया, तो धीरे-धीरे संबंध कमजोर होते होते 1 दिन टूट जाएगा।
आप अपने गुण कर्म स्वभाव और पुरुषार्थ को ठीक रखें। दूसरे भी ऐसे ही लोगों को ढूंढें, जिनका गुण कर्म स्वभाव और पुरुषार्थ आप जैसा हो। जिनके विचार आपके साथ मेल खाते हों। बस उनके साथ आपका संबंध जीवन भर बना रहेगा। यही आपका भविष्य है। इतना आप स्वयं जान सकते हैं।
इसलिए अपना भविष्य जानने के लिए इधर उधर कहीं भटकने की आवश्यकता नहीं है। बुद्धिमान लोग इस बात को समझते हैं, और वे दूर दूर नहीं भटकते। इन व्यर्थ के कामों में अपना समय शक्ति और धन नष्ट नहीं करते। अज्ञानी लोग इधर-उधर दूर-दूर तक भटकते हैं, और अपना समय शक्ति तथा धन नष्ट करते हैं।
स्वामी विवेकानंद परिव्राजक, रोजड़, गुजरात।

 

प्रस्तुति : अरविंद राजपुरोहित

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