आरटीआई से मिली जानकारी : पनाहगाह अरावली पर्वतमाला बन गई मौतगाह

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फरीदाबाद अरावली की पहाड़ी हजारों वर्षों से असंख्य ऋषि-मुनियों वन्यजीवों मोर हिरण तेंदुआ आदि की सुरक्षित तपस्थली ,आवास रही है। हरियाणा के पुनर्गठन के पश्चात हरियाणा सरकार की गलत खनन नीतियों के कारण अरावली पर्वतमाला अवैध खनन से दशकों तक घायल होती रही। अरावली पर्वत की छाती में अवैध खनन इंसानी लालच दोहन रुपी खंजर ने अनेकों जख्म कर दिए हैं अर्थात अवैध खनन से कृत्रिम सैकड़ों मीटर गहरे चौड़े गड्ढे बन गए हैं जो मानसून के समय कृत्रिम झीलों में तब्दील हो जाते हैं।

इस कारण अरावली की ईश्वर निर्मित प्राकृतिक झीलें बड़खल, दमदमा जैसी झील सूख गई हैं क्योंकि उनका पानी इन खनन के गड्ढों में चला जाता है। हरियाणा सरकार ने करोड़ों रुपए खर्च कर दिए हैं प्राकृतिक सूखती झीलों के सुंदरीकरण उन्हें पानी से दोबारा लबालब करने के नाम पर। 20 किलोमीटर दूर से एसटीपी का पानी सूखती झीलों में डाला जा रहा है तो कभी गुरुग्राम 25 किलोमीटर नहर से पानी लाकर इसे भरने की बात की जाती है लाखों रुपया मासिक खर्च पर फिर भी झीलें तर नहीं हो पा रही और एक तरफ इंसानी लालच से निर्मित यह कृत्रिम झीलें हैं जो वर्ष भर पानी से लबालब रहती है। लेकिन यह कृत्रिम झीलें अरावली के वन्यजीवों के आसपास के निवासियों की प्यास नहीं बुझा सकती.. लेकिन यह झीलें मौतगाह जरूर बन गई हैं। अरावली की कृत्रिम झील के कारन अरावली को अब डेथ वैली कहा जाने लगा है। होता यह है कि गर्मियों में इन कृत्रिम खतरनाक झीलों के ठंडे पानी से आकर्षित होकर फरीदाबाद व आसपास के एनसीआर से बच्चे युवक सैर सपाटे के लिए इनमें नहाने के लिए चले आते हैं। डूब कर दर्दनाक मौत गुमनाम इन झीलों में सैकड़ों मौतें हो चुकी हैं। मानव गतिविधि बहुत कम इस क्षेत्र में होती है ऐसे में समय पर रेस्क्यू भी नहीं मिल पाता। फरीदाबाद पुलिस कमिश्नरेट से मेरे द्वारा आरटीआई से मांगी गई जानकारी से खुलासा हुआ है और बड़खल थाने से यह सूचना मिली है कि पिछले 11 वर्षों में 51 मौतें 6 ऐसे ही अवैध खनन से बनी कृत्रिम झील में डूबकर हो चुकी है। दिल्ली एनसीआर के अनेकों परिवारों के इकलौते वारिस चिराग इन झीलों में डूब कर बुझ चुके हैं। खट्टर महोदय की सरकार वर्ष 2014 से ही अरावली की प्राकृतिक झीलों के संरक्षण सौंदर्यकरण की बात कर रही है करोड़ों रुपया खर्च हो चुका है लेकिन इन कृत्रिम जिलों के रहते प्राकृतिक जिलों को पुनर्जीवित नहीं किया जा सकता।

हरियाणा की पूर्ववर्ती सरकारों की अवैध खनन लूट नीति खट्टर सरकार को प्रायश्चित करते हुए सबसे पहले कृत्रिम झीलों (गड्ढों) को भरना होगा सुरक्षा के दृष्टिकोण से इसके आसपास तार फेंसिंग जरूरी है। क्योंकि पहाड़ पर केवल पानी को स्टोर किया जा सकता है उससे भूजल को रिचार्ज नहीं किया जाता। ऐसे में इन कृत्रिम जिलों से अरावली का भूजल कभी रिचार्ज हो ही नहीं सकता क्योंकि अरावली पर्वतमाला पथरीली प्लेटों पर बनी हुई है। वर्षा का पानी जो इन इन झीलों में में भर जाता है किसी उपयोग में नहीं आ पाता वह प्राकृतिक झीलों में जाना चाहिए । हमने अपनी जिम्मेदारी समझते हुए हरियाणा सरकार को इन सभी सुझावों चिंताओं से अवगत कराया है ।हमारे आरटीआई खुलासे को आज राष्ट्रीय हिंदी अखबार नवभारत टाइम्स के वरिष्ठ पत्रकार व नवभारत टाइम्स के फरीदाबाद ब्यूरो चीफ श्यामवीर चावड़ा जी ने अपनी रिपोर्ट में प्रकाशित किया है हम उनका हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं ।

आर्य सागर खारी✍✍✍

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