ताजमहल था कभी तेजो महालय मंदिर

राकेश कुमार आर्य
ताहमहल भारत के गौरवमयी अतीत का नाम है। यह विरासत शुद्घ भारतीयता की देन है। भारतीयता का अभिप्राय आप समझ रहे होंगे। भारतीयता का अर्थ हिंदू संस्कृति से है। यदि ऐसा है तो आप बिल्कुल सच समझ रहे हैं। हमारा आशय उसी हिंदू संस्कृति से है, जिसका ज्ञान विज्ञान, शिल्पकला, हस्तकला, चित्रकला आदि सब कुछ ही विशेष अनुकरणीय रहा है-विश्व समुदाय के लिए।
भारत के अतीत के जितने शानदार पन्ने पलटे जाते हैं, और निष्पक्ष भाव से पाठक उन पन्नों पर लिखी विरासत की रोमांचक कहानी को जितनी गम्भीरता और प्रसन्नता के साथ पढ़ता जाता है उतना ही उसका सिर अपने
अतीत की महानता के समक्ष झुकता जाता है, तो-उसे आनन्द आता है अपने अतीत का बोध् कर।
वह प्रसन्न होता है अपनी विरासत को3 खोजकर।।
यही कारण है कि आज तक विश्व के पर्यटकों को जितना भारत के ऐतिहासिक भवनों, दुर्गों, मन्दिरों, स्थलों, स्मारकों, विजय स्तम्भों और कीर्ति स्तम्भों ने आकर्षित किया है, उतना किसी अन्य देश के ऐसे ऐतिहासिक स्मारकों ने नहीं किया। किसी ने सच ही कहा है:-
”कज्जल गिरि की स्याही समुद्र के पात्र में घोली गयी हो, कल्पवृक्ष की शाखा की लेखनी हो, कागज पृथ्वी हो और मां सरस्वती स्वयं लिखने वाली हो, तथापि हे आर्य मां! तुम्हारे गुणों का वर्णन कर पाना आशक्य एवं असभंव है।”
इसी भारत भूमि के विषय में विलियम एच.गिलबर्ट ने स्वीकार किया है-
कि ”मानव संस्कृति के इतिहास में सभी क्षेत्रों में भारतीयों का अंशदान
सबसे अधिक महत्व का रहा है…समस्त विश्व भारतीयों का ऋणी है।”
जिन लोगों ने भारत को समझ लिया उन्होंने स्वयं को भारत का ऋणी होना नि:संकोच घोषित कर दिया। किन्तु जिन्होंने भारत को मानसिक दासता की परिध् िमें खड़ा करने का प्रयास किया उन्होंने इसके इतिहास को बदल दिया। इसका अतीत इस प्रकार उद्घाटित किया कि उससे उसका गौरव छिन जाये। जिससे आने वाली नस्लें हीन भावना से ग्रस्त हो जायें।
दुर्भाग्य से आज हमें जो कुछ भी पढ़ाया जा रहा है, उसमें सब कुछ ऐसा
ही है कि जिससे हमारे भीतर हीन भावना उत्पन्न होती है। आगरा शहर में खड़ा ताजमहल हमारे इसी दुर्भाग्य की कहानी कह रहा है। इस ताजमहल के मर्म को यदि किसी ने छेड़ दिया तो इसकी मर्मान्तक पीड़ा से जो अश्रुधारा फू टेगी उससे हमारी अपंग राष्ट्रीयता की भावना तो बह ही जायेगी कितने ही छद्म और दुष्ट राष्ट्रघाती भी इसके प्रवाह में बहने से स्वयं को रोक नहीं पायेंगे। छद्मी और राष्ट्रघाती लोगों के द्वारा छद्म ध्र्मनिरपेक्षता के नाम पर जो लोकतंत्र का भवन देश में खड़ा किया जा रहा है तब वह भी भरभरा कर ढह जायेगा।
जी हाँ, क्योंकि हमारी ऐतिहासिक धरोहर का प्रतीक ये ‘ताज’ सचमुच
शिरोमणि है। जो किसी प्रेम कहानी का प्रतीक नहीं है अपितु हमारी धरोहर पर अपनी मोहर लगाने की विदेशी शासकों की किसी कहानी का अंग है जिसे हमसे हड़पकर बलात् किसी शासक की एक काल्पनिक प्रेयसी के नाम कर दिया गया है।
अब आईये विचार करें उन तथ्यों पर, बिन्दुओं पर, साक्ष्यों पर, सत्यों पर
और शोधपूर्ण अनुसन्धनों पर जिनके आधर पर ये बात कही जा सकती है कि ताजमहल किसी बेगम की कब्रगाह नहीं अपितु भारतीय स्थापत्य कला का एक बेजोड़ नमूना है, जो रहा है कभी तेजोमहालय मन्दिर। उसी तेजोमहालय का विकृत नाम कर दिया गया-ताजमहल। इस प्रसंग पर श्री पी.एन. ओक महोदय के शोधपूर्ण ग्रन्थों से हमें जो साक्ष्य उपलब्ध होता है, उससे इस सत्य को उद्घाटित करने में पर्याप्त सहायता मिलती है कि ताजमहल एक हिन्दू मन्दिर है ना कि ताजमहल।
सर्व प्रथम हम विचार करें कि शाहजहाँ और मुमताज बेगम में कितना प्यार था? हमें ज्ञात होता है कि शाहजहाँ की लगभग पाँच हजार महिलाएँ उसके हरम में थीं। ऐसी परिस्थितियों में यह कैसे माना जा सकता है कि वह अपनी एक बेगम से ही अधिक प्यार करता था। दूसरे, यह तथाकथित रूप से अत्यधिक प्रिय बेगम भी सन् 1630 ई. में दिवगंत हो गयी थी। जबकि ताजमहल का निर्माण कथित रूप से 1648 में किया गया बताया जाता है। प्रश्न है कि इतने समय में बुरहानपुर में दफ न रही मुमताज बेगम का शरीर कब्र लायक रहा था या नहीं?
हमें शाहजहाँ कालीन किसी भी पुस्तकीय साक्ष्य अथवा राजाज्ञा की प्रतियों से यह तथ्य स्पष्ट नहीं होता कि ताजमहल के बनाने में कितना पैसा व्यय हुआ और कब इसके निर्माण के लिए राजाज्ञा जारी हुई, और किस व्यक्ति ने इसका नक्शा तैयार किया? स्पष्ट साक्ष्य के अभाव में जो बातें तत्सम्बन्ध्ी उपलब्ध् भी हैं तो वह परस्पर विरोधभासी हैं। जैसे लागत व्यय का आकलन विभिन्न इतिहासकारों की दृष्टि में पचास लाख से लेकर 9 करोड़ 17 लाख रफपये तक जाता है। इसलिए लागत मूल्य भी अविश्वसनीय है।
वास्तव में शाहजहाँ का बादशाहनामा हमें कुछ सही जानकारी देता है। इस
प्रामाणिक पुस्तक का लेखक मुल्ला अब्दुल हमीद पृष्ठ 403 पर हमें बताता सवाई जयसिंह से अपने भव्य गुम्बद युत्तफ पैतृक प्रासाद के विनिमय में खुली जमीन प्राप्त हुई थी। हमें यह भी पता चलता है कि इस भव्य भवन के चारों ओर हरा भरा विशाल उद्यान था। बुरहानपुर की तहसील के बदले में सवाई जयसिंह से उसका मूल पैतृक भव्य प्रासाद लेकर शाहजहाँ ने उसे विदा कर दिया और अपनी कथित बेगम की याद में एक नकली कब्र इस हिन्दू मंदिर में लाकर दफन कर दी। ताकि हिन्दू इसे अपवित्रा मानकर इस पर से अपना दावा सदा के लिए छोड़ दें। हमीद स्वयं लिखता है कि बादशाह ने उसे यह स्पष्ट निर्देश दिया कि ‘बादशाहनामा’ में में मेरी उपलब्धियों में ताज को मेरे द्वारा निर्मित लिखना न छोड़ा जाये।
अब प्रश्न पैदा होता है कि इतने भव्य प्रासाद को या प्रेम की अनूठी कृति
को ;जो कि विश्व के सात आश्चर्यों में से एक है। एक दरबारी लेखक अपने
बादशाह की स्तुति गान में लिखना क्यों भूल सकता हैद्ध कदापि नहीं, लेकिन चूँकि वह अनूठी कृति हिन्दू राजा से हड़पकर बादशाह ने कब्जाई थी इसलिए उसे अपनी बतलाने के लिए विशेष निर्देष उसे अपने लेखक को देना पड़ा।
महाराष्ट्रीय ज्ञानकोष की साक्षी पर भी विचार कर लिया जाये। वह कहता
है कि ”आगरा के दक्षिण में राजा जयसिंह की कुछ भू सम्पत्ति थी बादशाह ने उससे वह खरीद ली।”

भू-सम्पत्ति शब्द को कुछ लोग मात्र जमीनी टुकड़ा मानते हैं उस पर निर्मित कोई भव्य प्रासाद नहीं। वस्तुत: यह भी एक भ्रान्ति है। भू-सम्पत्ति का अर्थ अचल सम्पत्ति से है- जिसमें भव्य प्रसाद भी आते हैं। अब्दुल हमीद की बादशाहनामे में यह स्वीकारोत्तिफ हमारी बात को सच साबित करती है कि जय सिंह ने कितने दु:खी मन से इस भव्य प्रासाद को बादशाह को दिया था। उल्लेख हैं:-
महानगर के दक्षिण में भव्य सुंदर हरित उद्यान के प्रासाद….जिसका केन्द्रीय भवन जो राजा मान सिंह के प्रासाद के नाम से जाना जाता था अब राजा जयसिंह जो मानसिंह का पौत्र था के अधिकार में था…बेगम को दफनाने के लिए चुना गया। यद्यपि राजा जयसिंह उसे अपने पूर्वजों का उत्तराधिकार और संपदा के रूप में मूल्यवान समझता था तो भी वह बादशाह शाहजहां के लिए निशुल्क देने पर तत्पर था। फिर भी केवल सावधानवश जो कि दुख और धार्मिक पवित्रता के लिए आवश्यक है, अपने प्रासाद का अधिग्रहण अनुपयुक्त मानता था। उस भव्य प्रासाद के बदले में जयसिंह को एक साधारण टुकड़ा दिया गया।
इस साक्ष्य से स्पष्ट हो जाता है कि ताजमहल एक हिन्दू भव्य प्रासाद था।
जो कि ताजमहल नहीं अपितु राजमहल था। वैसे भी जैसा कि हमने 29 अक्टूबर 2003 को अपने स्वयं के भ्रमण में ताजमहल को देखा तो अनुभव हुआ कि एक कब्र के पीछे ‘महल’ शब्द नहीं आ सकता। दूसरे सारे महल में नरेशोचित आवासों का होना इसे किसी नरेशीय आवास के समकक्ष ही ठहराता है ना कि किसी कब्रगाह के समकक्ष। हिन्दुस्तान की अन्य कब्रों की हालत ताजमहल जैसी शोभायमान नहीं है, क्यों?
कुछ विद्वानों का यह तर्क कि यह राजपूती राजाओं के काल में तेजोमहालय मन्दिर था-भी उचित और तार्किक जान पड़ता है। क्योंकि शाहजहाँ का पूर्वज यानि बाबर भी आगरा में जिस सपफेद संगमरमर से बनी भव्य इमारत में रहते हुए मरा वह यमुना तट पर बना तेजो महालय मन्दिर ही था। जिसकी स्पष्ट साक्षी हमारे पास वो पत्रा है जो कि बाबर की बेटी ने बाबर की मृत्यु पर लिखा था। स्वयं बाबर ने भी इस भवन में स्वयं के रहने की पुष्टि की है।
बाबर से पूर्व इस भव्य प्रासाद में इब्राहिम लोदी भी रहा था। कुछ प्रमाणों से विदित होता है कि गलककालीन सुल्तानों के पास भी यह सम्पत्ति जबरन उनके अध्किार में रही। उससे पूर्व इस पर राजपूतों का पैत्राक अधिकार रहा था।
लखनऊ के अजायबघर में स्थित बटेश्वर शिलालेख से ज्ञात होता है-कि यह राजा परमार्दि देव विव्रफम समवत 1212 आश्विन मास शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि रविवार का है, इस शिलालेख में 34 श्लोक हैं। जो कि बटेश्वर के एक मिट्टी के स्तूप में दबा हुआ पाया गया था। राजा परमार्दिदेव द्वारा बनवाये गये दोनों सुन्दर विष्णु प्रसाद एत्माद-उदौला एवम् तेज महाराज का देवालय है। जो कि यमुना तट पर स्थित है। जिन्हें बाद में मुस्लिम आक्रान्ताओं ने भ्रष्ट कर डाला। किसी चतुर दूरदर्शी व्यत्तिफ ने इसे मिट्टी के स्तूप में दबा दिया था जो कि अनेकों वर्ष दबा रहने पर सन् 1900 में स्तूप की खुदाई करते समय जनरल कनिंध्म को मिला। इस तथ्य से स्पष्ट हो जाता है कि ताजमहल तेजोमहालय के रूप में पूर्व से ही विद्यमान था। तब यह कैसे सम्भव है कि जो बादशाह एक साथ 5000 रखैल रखता हो और उसकी कथित प्रिय बेगम मुमताज महल यह नाम बाद में दिया गया, असली और सही नाम अर्जुमन्द बानो बेगम था, जो मृत्युकाल तक भी ज्यों का त्यों रहा थाद्ध इन रखैलों के मध्य घुटन की जिन्दगी जीती रही, उसकी याद में यह ताज ‘महल’ बना। यदि ऐसा ही था तो भगवान करे कोई दूसरा शाहजहां और न पैदा हो, जो जीते जी तो अपनी बेगम को रूसवाईयां दे और मरने पर उसके लिए महल बनवाए।
ऐसे प्रेम पर लानत है। जो युगल इस अनूठी कृति को शाहजहाँ के अपनी बेगम के प्रति अप्रतिम प्यार की निशानी के रूप में देखते हैं वो सावधान हों, और इसकी वास्तविकता जानकर दूसरा शाहजहाँ या मुमताज बनने की ख्वाहिश त्याग दें।
इससे तो अच्छा जहाँगीर था, जो अपनी बेगम के लिए कहा करता था-
मुझे दुनिया से क्या काम। बस चाहिए बुलबुल के हाथों का जाम।
ऐ नूर जहां! शराब का मस्त प्याला दे।
फिक्र हो वतन की तू ही पनाह दे।
मैंने अपने भ्रमण के दौरान अपने विद्यालय माता सत्यवती एकेडमी के विद्वान अध्यापकों तथा अपने परिजनों को इस ऐतिहासिक धरोहर को इसी रूप में देखने के लिए प्रेरित किया। इसका सच सबके सामने आना चाहिए। ये लेख सारी सच्चाईयों को और तथ्यों को आपके सामने लाने में असमर्थ है, आप अपनी जानकारी में वृद्घि के लिए श्री पी.एन. ओक महोदय की पुस्तक ‘ताज महल मन्दिर भवन है’ का अवलोकन कर सकते हैं। जिसे पढऩे पर यू.एस.ए स्थित दि अमेरिकन सोसायटी पफॉर स्कैण्डिनेवियन एण्ड ईस्टर्न स्टडीज के अध्यक्ष डॉ. प्लेगमायर ने उन्हें लिखा-”इस बेहूदा धारणा को कि शाहजहां ने ताजमहल बनवाया हम लोग भी बहुत समय से घृणा के भाव से देखते रहे हैं। आपकी विद्वतापूर्ण खोजों ने हमारी अपनी मान्यताओं को संबल प्रदान किया है। भारतीय इतिहास के एक अत्यंत विक्षुब्धकारी अध्याय को उस प्रकार नवीन और स्फूर्तिदायक रूप में स्पष्टïतापूर्वक प्रस्तुत करने के लिए आप सराहना के पात्र हैं। ताज की मेरी यात्रा पर मुझे महान आश्चर्य हुआ था कि कुछ उफपरी मुगलिया बातों के होते हुए भी यह भवन मुस्लिम सरंचना नहीं थी। उदाहरण के रूप में ताज के चारों ओर की मीनार मुझे हिन्दू स्थापत्य कला के उन चित्रों का स्मरण दिलाते थे जो मैंने उन दिनों राजपूताना के नाम से पुकारे जाने वाले राजस्थान प्रदेश में देखे थे। साथ ही अष्ट कोणीय प्रकार मूल रूप में निश्चित ही हिन्दू रूप था।” मैं समझता हूँ कि आपका दृष्टिकोण भी बदलेगा। आप भी समझ पायेंगे कि हमारी विरासत को किस प्रकार दागदार बनाया गया है और किस प्रकार हमें अपने ही शानदार अतीत से तोड़ा गया है।
प्रश्न है कि क्या मुस्लिम आव्रफान्ताओं से पूर्व इस राष्ट्र के पास अपना कुछ भी नहीं था? क्या यहाँ के राजा-महाराजा जंगलों में निवास करते थे? क्या विश्व गुरफ रहा भारत अपनी सारी आभा गँवा चुका था?
इस प्रकार के प्रश्नों के साथ अनुसन्धनात्मक दृष्टि अपनाकर घटनाओं, तथ्यों, ऐतिहासिक ध्रोहरों का आप आंकलन करेंगे तो जो सत्य सामने आयेगा, वह विश्व का सातवाँ नहीं अपितु एक मात्रा सबसे बड़ा आश्चर्य होगा। आप प्रयास तो करें।

Comment:

vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
safirbet giriş
safirbet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betpuan giriş
betpark giriş
betpuan giriş
betpark giriş
betpipo giriş
betpipo giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
milanobet giriş
betnano giriş
betnano giriş
bets10 giriş
bets10 giriş
bets10 giriş
bets10 giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
betnano giriş
restbet giriş
betnano giriş
restbet giriş
betpas giriş
betpas giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
restbet giriş
restbet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
milanobet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
milanobet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
safirbet giriş
vaycasino giriş
madridbet giriş
madridbet giriş
vaycasino giriş
sekabet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
madridbet giriş
myhitbet giriş
myhitbet giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
meritking giriş
betpark giriş
betpark giriş
meritking giriş
betpas giriş
restbet giriş
restbet giriş
siyahbet giriş
siyahbet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
madridbet giriş
madridbet giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
madridbet giriş
betvole giriş
betvole giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betpipo giriş
noktabet giriş
noktabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betnano giriş
betnano giriş
pusulabet giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark giriş
betpark giriş
milanobet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
betnano giriş
casinowon giriş
casinowon giriş
pusulabet giriş