15 अगस्त 1947 को देश ने सदियों के स्वातंत्रय समर की अपनी लंबी साधना के पश्चात स्वतंत्रता प्राप्त की। अब देश के सामने फिर से खड़ा होने का पहाड़ सा भारी संकल्प था। भारत के कण-कण में और अणु-अणु में उस समय उत्साह था, रोमांच था, अपने नेतृत्व पर विश्वास था और ‘शिवसंकल्प’ धारण कर आगे बढऩे की प्रशंसनीय लगन थी। भारत के तत्कालीन नेतृत्व ने भारत की जनता को भरोसा दिलाया कि वह भारत को  पुन: विश्वगुरू बनाने के लिए कृतसंकल्प हैं और प्रत्येक भारतीय को आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक समानता देने का पक्षधर है। इसलिए सर्वोदयवाद से भी आगे जाकर अन्त्योदयवाद को भारत की समाजवादी राजनीतिक व्यवस्था ने अपने लिए आदर्श माना।

सारी कांग्रेस पार्टी और उसके नेता 15 अगस्त 1947 के दिन आजादी का पर्व मना रहे थे पर आश्चर्य की बात थी कि देश की आजादी की जंग में अपनी अविस्मरणीय भूमिका निभाने वाले गांधीजी इस पर्व में सम्मिलित नही थे। वह कुछ और ही सोच रहे थे। लुई फिशर ने लिखा है-”जब भारत, पाकिस्तान एवं 563 देशी रियासतें 150 वर्षीय अंग्रेजी दासता से मुक्त होकर स्वतंत्रता का पर्व मना रही थीं, तब देश की स्वतंत्रता की रूपरेखा बनाने वाला, निर्माता एवं निदेशक बीमार, परेशान एवं खिन्नावस्था में था, देश की आजादी के लिए जिस पर सबने विश्वास किया था। स्वतंत्रता संघर्ष और देश की स्वतंत्रता जिसके प्रबल विश्वास का परिणाम था, आज वही क्लांत सा था।”

गांधी ने देश को आजादी मिलते ही कह दिया था कि अब कांग्रेस को समाप्त कर दिया जाना चाहिए क्योंकि इसका जो कार्य था वह पूर्ण हो चुका है। गांधी खिन्न थे और वह कांग्रेस को समाप्त करने की मांग कर रहे थे, परंतु उनकी खिन्नता और कांग्रेस के समाप्त कराने की मांग का कारण किसी ‘गांधीवादी’ ने आज तक नही खोजा है। इसलिए यह प्रश्न अनुत्तरित ही रह गया कि क्या गांधीजी स्वतंत्र भारत में कांग्रेस की भूमिका को लेकर असहमत थे, या उन्हें वैसा भारत कांग्रेस के नेतृत्व में बनने में संदेह था, जैसा वे चाहते थे? गांधी जी की उपेक्षा करते हुए कांग्रेस के नेता पंडित नेहरू ने देश के सामने स्वर्णिम सपनों का एक ऐसा खाका प्रस्तुत किया कि देश की जनता उन स्वर्णिम सपनों के इस खाके के मकडज़ाल में फंस कर रह गयी। जनता पर नेहरू के सम्मोहन का ऐसा भूत चढ़ा कि जो नेहरू कहते थे, जनता वही करती थी। नेहरू सचमुच करिश्माई नेता बन चुके थे और वह अपनी सम्मोहन विद्या का लाभ उठाकर देश की जनता के सामने सपनों की दुनिया का एक से बढ़कर एक खाका खींचते चले गये। उन्होंने पंचवर्षीय योजनाएं भारत में लागू कीं, और सुव्यवस्थित रूप से भारत के आर्थिक विकास में जुट गये। उन्होंने कहा –

चहम देश की ‘सामासिक संस्कृति’ को अधिमान देंगे।

चहम प्रत्येक नागरिक को कानून के सामने समानता देंगे।

चहम देश में सर्व ‘संप्रदाय समभाव’ का आदर्श देंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि राज्य का कोई अपना चर्च (संप्रदाय) नही होगा।

चहम देश की स्वतंत्रता के भक्षकों को देश का शत्रु मानेंगे और उनसे इसी भाव से निपटेंगे।

चहम देश से भुखमरी, बेरोजगारी, अशिक्षा, कुपोषण और अत्याचारों के खात्मे का समुचित congress1प्रबंध करेंगे।

चहम जाति, संप्रदाय और भाषा या लिंग के आधार पर लोगों में कोई भेदभाव नही करेंगे।

चनेहरू ने 1957 में कहा-”व्यक्तिगत रूप से मैं अनुभव करता हूं कि सबसे बड़ा कार्य न केवल भारत का आर्थिक विकास है, बल्कि इससे भी बढ़कर भारत के लोगों का मनोवैज्ञानिक एवं भावनात्मक एकीकरण है।”

भारत की जनता जिस भारत के निर्माण के लिए सदियों से स्वतंत्रता संघर्ष कर रही थी उसके रोम-रोम में भारत के निर्माण का ऐसा ही सपना रचा-बसा था। इसलिए नेहरू जब भी कभी अपने  भाषणों मेें इस सपने की झलक दिखाते, तभी लोग हर्षध्वनि कर तालियों से उनका प्रति उत्तर देते। यह देश के नायक और देश की जनता का अदभुत समन्वय था, एक ऐसा संवादपूर्ण संबंध था जिसमें शासक और शासित का भेद समाप्त हो गया था। जो शासक कहता था शासित उसी को अपने लिए ‘ब्रह्मवाक्य’ मानता था। इसी सम्मोहनात्मक समन्वय में 1962 में चीन ने देश को मार लगायी, 1964 में देश का ‘बेताज बादशाह’ नेहरू देश से अलविदा कह गया,  सारा देश मातम में डूब गया। सभी की जुबान पर एक ही सवाल था कि-”अब क्या होगा?”

संक्षिप्त काल के लिए शास्त्री जी ने अपने आपको पेश किया और भारत के निर्माण में लग गये। उन्होंने बिना घोषणा किये अपने पूर्ववर्ती शासक की गलतियों को सुधारना चाहा और बुनियादी तौर पर भारत की समस्याओं के निवारण के लिए प्रयास किया। देश की जनता ने शास्त्री जी के सपने के साथ समन्वय स्थापित किया और उनके कहने पर सप्ताह में एक दिन भूखा रहकर देश के लिए स्वाभिमान के लिए कार्य करना आरंभ किया। पर 1966 में शास्त्री जी भी चले गये।

तब श्रीमती इंदिरा गांधी आयीं। उन्होंने नेहरू की सारी नीतियों को ‘गरीबी-हटाओ’ के नारे में पिरोकर देश की जनता के सामने परोसा। जनता ने उस नारे को सच समझा और इंदिरा गांधी को एक देवी मानकर जनादेश दे दिया, पर गरीबी हटाने वाली इंदिरा ने गरीबी हटाने की व्यवस्था देने वाले संविधान और अपने पिता व डा. बी.आर. अंबेडकर जैसी शख्सियतों के दिमाग की उपज से बने सपनों को तहस नहस कर दिया, और देश में आपातकाल लागू कर दिया। तब देश की जनता से कांग्रेस का सम्मोहन उतरना आरंभ हुआ। देश की आजादी के सही तीस वर्ष पश्चात 1977 में हुए चुनावों में देश की जनता ने देश के सपनों को कुचलने वाली इंदिरा गांधी को ही कुचलकर रख दिया। देश में पहली बार गैर कांग्रेसी सरकार जनता पार्टी के नेता मोरारजी देसाई के नेतृत्व में बनी। पर वह देश की जनता पर कोई चमत्कारिक प्रभाव नही डाल सके। देश की जनता को लगा कि कहीं गलती हो गयी है इसलिए उसने इंदिरा गांधी को क्षमा किया और सत्ता पुन: 1980 में उन्हें ही सौंप दी। 1984 में इंदिरा की निर्मम हत्या हो गयी, तो देश की जनता ने उनकी हत्या होते ही उनके बेटे राजीव गांधी को देश का नेता मान लिया। हम यहीं तक सीमित रहेंगे। 1989 तक देश के पी.एम. राजीव गांधी रहे। 1947 से 1989 तक 42 वर्षों में से लगभग 40 वर्ष कांग्रेस का शासन देश पर रहा। इन चालीस वर्षों के पश्चात कांग्रेस के पी.वी. नरसिंहाराव और अब मनमोहन सिंह ने मिलाकर लगभग पंद्रह वर्ष शासन कर लिया है। इस प्रकार स्वतंत्रता के इन 67 वर्षों में से 55 वर्ष देश पर कांग्रेस ने शासन किया है।

बीच में भाजपा के अटल बिहारी वाजपेयी सहित कई अन्य दलों के गठबंधनों ने भी संक्षिप्त काल के लिए देश पर शासन किया। पर मुख्य रूप से शासन करने वाली पार्टी कांग्रेस ही रही है। इन 67 वर्षों में देश को विश्वगुरू बनाने के संकल्प का परिणाम हमें मिला है-भारत को हर क्षेत्र में विश्व के अन्य देशों का अनुकरण करने वाले ‘विश्व शिष्य’ के रूप में। भारत की ‘सामासिक संस्कृति’ को विकसित करने के स्थान पर भारत में साम्प्रदायिक विभिन्नताओं की पहचान बनाये रखकर उन्हें खाद पानी दे देकर इस सामासिक संस्कृति को नष्ट करने के रूप में। भारत में सर्व संप्रदाय समभाव की भावना को विकसित करने के स्थान पर साम्प्रदायिक तुष्टिकरण के रूप में इसी काल में यह भी स्पष्ट हो गया है कि  देश में समान नागरिक संहिता को लागू करने का सपना भी झूठा ही था। यहां तो देश की भाषा भी अपना उचित सम्मान पाने के लिए तरस रही है। देश की सीमायें भी सुरक्षित नही हैं, देश में अशिक्षा, अन्याय, अभाव, कुपोषण, बेरोजगारी बढ़ी है, और 3 लाख 62 हजार करोड़ के दो बड़े घोटाले करके संप्रग की सरकार ने देश के साथ विश्वासघात किया है। अत: ऐसे कितने ही घोटालों को और संस्थागत भ्रष्टाचार को देखकर अब देश की जनता ने देश के नेतृत्व से मुंह फेरना आरंभ कर दिया है।

नेहरू इंदिरा और राजीव गांधी देश पर अपने सम्मोहन से शासन करते रहे। पर अब उनकी नीतियों के परिणाम देखकर देश की जनता की आंखें खुल चुकी हैं, और ‘मनमोहन के काल में सम्मोहन’ पूरी तरह छूमंतर हो चुका है। अब देश की जनता पूछ रही है कि देश के उस शिव संकल्प का क्या हुआ जिसे देश के नेतृत्व ने देश की जनता की आंखों में उतारकर आजादी के पहले दिन ही ‘राष्ट्रीय संकल्प’ के रूप में ग्रहण किया था। भूख क्यों बढ़ी? बेरोजगारी क्यों बढ़ी? देश में साम्प्रदायिकता क्यों बढ़ी? मनमोहन सिंह के पास ऐसे अंतहीन प्रश्नों में से किसी

 

एक का भी उत्तर नही है। इसलिए वह मौन हैं, क्योंकि वह कंाग्रेस के पापों और झूठे वायदों का परिणाम भुगतने के लिए ‘बलि का बकरा’ बनाकर आगे कर दिये गये हैं। पर देश की जनता उस ‘हाथ’ को भी इस बार दण्ड देना चाहती है जो पीछे से ‘सुपर पी. एम.’ बनकर देश का मूर्ख बनाता रहा और अब भी अपना खेल जारी रखे हुए है। सचमुच ‘हाथ’ के टूटने का समय आ गया है।

Comment:

Latest Posts

hititbet giriş
hititbet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
hititbet giriş
hititbet güncel giriş
hititbet giriş
vdcasino giriş
vdcasino güncel giriş
vdcasino giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hitit medya
Hititbet Giriş
Hititbet Giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
tuzla cilt bakım merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet
hititbet güncel adres
hititbet 2026
hititbet giriş
hititbet giriş
Tuzla Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
solobet giriş
hititbet giriş
kralbet
otobet giriş
xslot giriş
otobet giriş
otobet giriş
otobet giriş
betyap giriş
betyap giriş
maksibet giriş
maksibet giriş
maksibet giriş
maksibet giriş
maksibet giriş
maksibet giriş
betnano
betnano
betnano
kralbet
kralbet
kralbet
setrabet
setrabet
kralbet
hititbet
hititbet
Tuzla Cilt Bakım
İstanbul Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet Giriş
Hititbet Giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
Tuzla Cilt Bakım
Tuzla İpek Kirpik
Tuzla Lenf Drenaj
Kolaybet Giriş
Betgaranti Giriş
xslot giriş
xslot giriş
xslot
xslot
hititbet
kralbet
kralbet
betnano
betnano
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş