अर्णब गोस्वामी ,उद्धव ठाकरे और भारत का सर्वोच्च न्यायालय

Arnab-Goswami-1-696x391-1 (1)

 

भारत की न्यायपालिका विश्व की सर्वाधिक सशक्त न्यायपालिकाओं में से एक है । यहाँ तक कि अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय से भी कहीं अधिक बेहतर ढंग से अपने कर्तव्यों का निर्वाह करने में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने विश्व का ध्यान आकर्षित किया है । जब राजनीति पथभ्रष्ट,धर्मभ्रष्ट और कर्तव्यभ्रष्ट हो जाती है, तब – तब उसको राह दिखाने का ऐतिहासिक काम भारत की न्यायपालिका ने किया है। वास्तव में न्यायपालिका का कार्य भी यही है कि जब राजनीतिज्ञ अपने आचरण से लोकतंत्र की हत्या करते पाए जाते हों या नागरिकों के अधिकारों के साथ खिलवाड़ करते पाए जाते हों या कोई भी ऐसा अनैतिक या असंवैधानिक कृत्य करते पाए जाते हों जिससे लोकतंत्र की मर्यादा भंग होती हो या लोकतंत्र के मुंह पर कालिख पोती जाती हो , तब – तब भारत के सर्वोच्च न्यायालय या न्यायपालिका ने ऐसी दूषित- प्रदूषित और पथभ्रष्ट राजनीति का मार्गदर्शन कर समाज व संसार को यह संकेत व संदेश दिया है कि मेरे रहते हुए राजनीति ‘बेलगाम’ नहीं हो सकती ।


‘रिपब्लिक भारत’ के अर्नब गोस्वामी के साथ जो कुछ हुआ उसमें राजनीति ने एक बार फिर यह सिद्ध करने का प्रयास किया कि उसे ‘वेश्या’ ऐसे ही नहीं कहा जाता। उसका आचरण , उसकी कार्यशैली और उसकी नीतियां बाजार में बैठी हुई उसी वेश्या जैसी हैं जो चंद चांदी के टुकड़ों के लिए अपना जिस्म बेचती रहती है । राजनीति में भी ऐसे ही बेहया और बेशर्म लोग जब अपना नंगा प्रदर्शन करते हैं और यह दिखाते हैं कि उनकी वास्तविक औकात क्या है तो लोकतंत्र उस समय उनके कृत्यों से शर्मसार हो उठता है और वह अपने आप ही न्यायपालिका की ओर मुखातिब हो जाता है । मानो वह दंडवत होकर न्यायपालिका के सामने गिड़गिड़ा रहा हो कि मेरा मार्गदर्शन करो , क्योंकि मैं हत्यारों की गिरफ्त में आ चुका हूं। मेरा उद्धार करो , क्योंकि मैं जनसेवी कहे जाने वाले भेड़ियों के पंजों में फँस चुका हूँ। तब हम देखते हैं कि हमारा लोकतंत्र मजबूत होकर उभरता है, क्योंकि उसे न्यायपालिका अपनी ओर से ऐसी ऊर्जा देती है जो उसके लिए जीवनप्रद हो जाती है ।


सर्वोच्च न्यायालय ने रिपब्लिक टीवी एंकर अर्नब गोस्वामी को अंतरिम जमानत देकर एक बार फिर यह सिद्ध किया है कि भारत की राजनीति चाहे जिस प्रकार की दलदल में फंस चुकी हो पर भारत के न्यायालयों की विवेक शक्ति अभी जीवित है। अर्नब गोस्वामी को 2018 के इंटीरियर डिजाइनर अन्वय नाइक की आत्महत्या के मामले में चार नवंबर को न्यायिक हिरासत में लिया गया था। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने मामले में सह आरोपी नीतीश सारदा और फिरोज मोहम्मद शेख की अंतरिम रिहाई की भी अनुमति दी। न्यायालय ने कहा, “अंतरिम जमानत देने के लिए आवेदन को खारिज करने में उच्च न्यायालय त्रुटि पर था।”
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और इंदिरा बनर्जी की एक अवकाश पीठ ने मुंबई उच्च न्यायालय के 9 नवंबर के आदेश के विरुद्ध दायर याचिकाओं पर की गई तत्काल सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया है। इस विषय में मुंबई उच्च न्यायालय ने अर्नब की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर उन्हें अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया। न्यायालय ने आदेश में कहा कि रायगढ़ पुलिस को शीघ्र रिहाई के आदेश का पालन सुनिश्चित करना चाहिए। अंतरिम जमानत के निए 50,000 रुपए की राशि के निजी मुचलके के रूप में जमा करने का आदेश दिया गया है।
सुनवाई के दौरान, जस्टिस चंद्रचूड़ ने निराशा व्यक्त की कि हाईकोर्ट एक नागरिक की व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा के लिए अपने अधिकार क्षेत्र का उपयोग करने में विफल रहा। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अधीनस्थ न्यायालय को बड़ा स्पष्ट और कड़ा संदेश देने वाली भाषा में समझाने का प्रयास किया है कि उसने जो कुछ किया है वह उचित नहीं कहा जा सकता । माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने इस बात का पूरा ध्यान रखने का प्रयास किया है कि यदि आज परिस्थितियों पर चुप रहा गया तो इसके दूरगामी परिणाम होंगे और राजनीति में बैठे गिद्ध प्रवृत्ति के लोग अपने शत्रुओं या अपने से असहमति रखने वाले लोगों के प्रति भविष्य में भी ऐसा व्यवहार करते देखे जाएंगे जो निंदनीय तो होगा ही साथ ही समाज में अस्त-व्यस्तता या अराजकता को पैदा करने वाला भी माना जाएगा।
जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, “अगर यह अदालत आज हस्तक्षेप नहीं करती है, तो हम विनाश के रास्ते पर यात्रा कर रहे हैं। इस व्यक्ति(गोस्वामी) को भूल जाओ। आप उसकी विचारधारा को पसंद नहीं कर सकते। अपने आप को छोड़ दें, मैं उसका चैनल नहीं देखूंगा।
सब कुछ अलग रखें। अगर हमारी राज्य सरकारें ऐसे लोगों के लिए यही करने जा रही हैं, जिन्हें जेल जाना है, तो सर्वोच्च न्यायालय को हस्तक्षेप करना होगा। उच्च न्यायालय को एक संदेश देना होगा- कृपया व्यक्तिगत स्वतंत्रता को बरकरार रखने के लिए अपने अधिकार क्षेत्र का उपयोग करें। हम मामले दर मामले को देख रहे हैं। न्यायालय अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करने में विफल हो रहे हैं। लोग ट्वीट के लिए जेल में हैं!”
खंडपीठ ने कहा कि पुलिस के पास एक ऐसे मामले में जांच करने की शक्ति है, जहां ‘ए समरी’ रिपोर्ट दर्ज की गई है।


आशा है कि अब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे अपनी तानाशाही पूर्ण कार्यशैली की समीक्षा करेंगे और भविष्य में ऐसे अलोकतांत्रिक और तानाशाहीपूर्ण निर्णय लेने से बचेंगे, जिनसे लोकतंत्र और राजनीति दोनों ही अपने आपको अपमानित अनुभव करती हों। उन्हें याद रखना चाहिए कि राजनीति में जिन पदों पर आप बैठे होते हैं वह जनता की कृपा से मिलते हैं और वहां पर व्यक्तिगत कुछ भी नहीं होता। जो भी कुछ होता है वह सार्वजनिक होता है । बहुत सारी चीजें होती हैं जो व्यक्तिगत स्तर पर उपेक्षित की जाती हैं। हर चीज को दिल से नहीं लगाया जाता । यदि हर चीज को दिल से लगाने की प्रवृत्ति पैदा की जाती है तो समझो कि वे व्यक्तिगत पूर्वाग्रहों में व्यक्ति को ले जाकर फंसा देती हैं । जिनके परिणाम देश और समाज के लिए बहुत ही घातक आते हैं। यदि निष्पक्ष रूप से कहा जाए तो अर्णब गोस्वामी के मामले में उद्धव ठाकरे ने जो कुछ भी किया है वह व्यक्तिगत शत्रुता के स्तर पर उतर कर किया है। जिससे राजनीति ,लोकतंत्र और न्याय सबको अपमानित होना पड़ा है । इस समय सारे देश की आवाज यही थी कि अर्णव के साथ उद्धव ठाकरे ने जो कुछ भी किया, वह गलत किया है। अब जबकि सर्वोच्च न्यायालय ने स्थिति को स्पष्ट कर दिया है तो लोकतंत्र और स्वच्छ राजनीति के हित में उद्धव ठाकरे को सार्वजनिक रूप से अपने किए पर पश्चाताप करना चाहिए। साथ ही अर्णब गोस्वामी को भी यह ध्यान रखना चाहिए कि वह अपने निजी चैनल का प्रयोग चिल्लाने और किसी को अनावश्यक चुनौती देने के लिए ना करें ।माना कि वह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ हैं, परंतु चौथा स्तंभ चौथा स्तंभ ही है । सबसे पहला नहीं और सबसे ऊंचा नहीं । वह चारों में बराबर का है और बराबर वाले को बराबर वालों से शिष्टता का ही व्यवहार करना चाहिए।

डॉ राकेश कुमार आर्य
संपादक : उगता भारत

Comment:

Latest Posts

hititbet giriş
hititbet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
hititbet giriş
hititbet güncel giriş
vdcasino giriş
vdcasino güncel giriş
vdcasino giriş
hititbet giriş
hitit medya
Hititbet Giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
tuzla cilt bakım merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet
hititbet güncel adres
hititbet 2026
hititbet giriş
Tuzla Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
solobet giriş
hititbet giriş
hititbet
hititbet
Tuzla Cilt Bakım
İstanbul Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet Giriş
Hititbet Giriş
betnano
Hititbet Giriş
Hititbet App
hititbet giriş
hititbet
betnano
betorder giriş
betgaranti giriş
Hititbet Giriş
hititbet
hititbet
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
Hititbet
Hititbet Güncel Giriş
Hititbet Yeni Giriş
Hititbet Resmi Gİriş
meritbet
bets10
meritbet
bets10
betnano
bets10
bets10
betnano
betnano
atlasbet
atlasbet
betnano
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betyap giriş
betyap giriş
betyap giriş
betyap giriş
hititbet giriş
vdcasino
vdcasino
xslot giriş
xslot giriş
betpark giriş
betnano
betnano
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
kolaybet giriş
hitbet giriş
hitbet giriş
betbox giriş
betbox giriş
betkom giriş
betkom giriş