ईश्वर की आज्ञा दो प्रकार की होती है : परिव्राजक

*ओषधि से शारीरिक रोगों का निवारण करें, और ईश्वर की आज्ञा पालन करने से शारीरिक और मानसिक दुखों का।*

जब कोई व्यक्ति रोगी हो जाता है, तो वह चिकित्सक के पास जाता है। चिकित्सक उसके रोग की जानकारी करके, औषधि के माध्यम से रोगी की चिकित्सा कर देता है।
जैसे शारीरिक रोग निवारण के लिए, चिकित्सक एवं औषधि में सामर्थ्य होता है। उसी प्रकार से शारीरिक और मानसिक दुखों के निवारण के लिए, ईश्वर एवं उसकी भक्ति अर्थात् उसकी आज्ञा का पालन करने में सामर्थ्य होता है।
*जो रोगी चिकित्सक की आज्ञा का पालन करते हैं, वे स्वस्थ हो जाते हैं। इसी प्रकार से जो लोग ईश्वर की आज्ञा का पालन करते हैं, वे भी सब दुखों से छूट जाते हैं।* चिकित्सक की आज्ञा तो आप जानते ही हैं।
अब ईश्वर की आज्ञा क्या है, इसको भी थोड़ा समझ लेवें।
ईश्वर की आज्ञा दो प्रकार की है।
*पहली – अपने व्यवहार को शुद्ध रखें। जैसे सबके साथ न्याय से व्यवहार करना, किसी पर भी अन्याय नहीं करना। सत्य का पालन करना, झूठ नहीं बोलना। यथासंभव दूसरों की सहायता करना, चोरी नहीं करना। ब्रह्मचर्य का पालन अर्थात मन इंद्रियों पर संयम रखना, व्यभिचार आदि पाप कर्म नहीं करना।*
इसी प्रकार से अपनी दिनचर्या ठीक रखना। *रात्रि को जल्दी सोना, सुबह जल्दी उठना। शाकाहारी सात्विक भोजन खाना, अंडे मांस नहीं खाना। शराब आदि नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करना। तंबाकू आदि रोगोत्पादक वस्तुओं का उपयोग नहीं करना। समय पर, अपने स्वास्थ्य के अनुकूल, एवं उचित मात्रा में भोजन करना। बिना समय के, अपने स्वास्थ्य के विरुद्ध, एवं मात्रा से अधिक भोजन नहीं करना। अपनी शक्ति के अनुसार प्रतिदिन व्यायाम अवश्य करना। पूरी मेहनत करने पर भी, जितना धन आदि वस्तुएं मिलें, उतने ही में प्रसन्न होकर, संतोष का पालन करना। लोभ क्रोध आदि दोषों से दूर रहना। वेदों का अध्ययन करना, गंदी पुस्तकों और फिल्मों से बचना। ईश्वर को साक्षी मानकर सब कर्म करना, ईश्वर को भूलकर नहीं।* इस प्रकार से अपने व्यवहार को शुद्ध रखें। यह ईश्वर की पहली आज्ञा है।
और दूसरी आज्ञा है — *सुबह शाम बैठकर ईश्वर का ध्यान करना। ईश्वर का ध्यान करने से आपके सारे मानसिक कष्ट क्लेश चिंता तनाव आदि दूर हो जाएंगे। उत्साह बढ़ेगा, आनंद बढ़ेगा, और शांति मिलेगी।* इस प्रकार से यदि आप ईश्वर की आज्ञा का पालन करें, तो आपके शारीरिक मानसिक सब दुख दूर हो जाएंगे। *दो माह तक परीक्षण करके देखिए, परिणाम अवश्य मिलेगा।*
– *स्वामी विवेकानंद परिव्राजक*

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