गांधी परिवार की ओछी राजनीति

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संजय सक्सेना

कभी-कभी तो ऐसा लगता है कि गांधी परिवार सुबह उठकर जब तक मोदी-योगी को कोस नहीं लेता है तब तक उसकी दिनचर्या शुरू नहीं होती है। न जाने क्यों गांधी परिवार अपने आप को हिन्दुस्तान का बेताज बादशाह समझता है।

करीब छह वर्ष पूर्व देश की जनता ने कांग्रेस से दिल्ली का ‘राजपाठ’ छीन कर मोदी पर विश्वास जताते हुए देश (सत्ता) की चाबी मोदी को सौंपी थी, लेकिन गांधी परिवार है कि उसे यह छोटी-सी बात भी समझ में ही नहीं आ रही है। न जाने आज भी गांधी परिवार को ऐसा क्यों लगता है जैसे देश उसकी ‘जागीर’ हो और देशवासी उसके ‘गुलाम’। यहां तक कि गांधी परिवार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी वैसे ही ‘नियंत्रित’ होते हुए देखना चाहता है जैसे कभी पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को यह परिवार अपनी उंगलियों पर नचाया करता था। कहने को तो मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री हुआ करते थे, दस वर्षों तक उन्होंने देश की बागडोर संभाली, लेकिन सत्ता का केन्द्र दस जनपथ में बैठा गांधी परिवार बना रहता था। यही परिवार तय करता था कि पीएम को क्या करना है ? क्या नहीं ? यहां तक की कई सरकारी फाइलें तो पीएम से पहले सोनिया गांधी के पास पहुंच जाया करती थीं। उनसे हरी झंडी मिलने के बाद ही ऐसी फाइलों को अमली जामा पहनाया जाता था।

पिछले छह वर्षों में काफी कुछ बदल गया है। बीते वर्ष मोदी दोबारा 2014 से भी बड़ी जीत हासिल करके दिल्ली की सत्ता काबिज हो गए तो इन वर्षों में कांग्रेस अर्श से फर्श पर आ गई है, लेकिन गांधी परिवार की हेकड़ी है कि कम होने का नाम ही नहीं ले रही है। हाल फिलहाल तक तो सोनिया और राहुल गांधी ही देश को अपनी बपौती समझते थे, लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद इसमें प्रियंका वाड्रा गांधी का भी नाम जुड़ गया है। प्रियंका भी माँ और भाई से किसी मामले में कम नहीं हैं। कभी-कभी तो ऐसा लगता है कि गांधी परिवार सुबह उठकर जब तक मोदी-योगी को कोस नहीं लेता है तब तक उसकी दिनचर्या शुरू नहीं होती है। न जाने क्यों गांधी परिवार अपने आप को हिन्दुस्तान का बेताज बादशाह समझता है। गांधी परिवार को सबसे तो जवाब चाहिए होता है, लेकिन अपने बारे में जवाबदेही से बचता रहता है। वह यह नहीं बताता कि कांग्रेस उसके नेतृत्व में क्यों लगातार रसातल में जा रही है। नेशनल हेराल्ड और यंग इंडिया के भ्रष्टाचार पर उसकी चुप्पी देखते बनती है। प्रियंका अपने पति रॉबर्ट वाड्रा के रियल इस्टेट कम्पनी डीएलएफ से क्या संबंध हैं यह नहीं बताती हैं। रॉबर्ट पर जमीन घोटाले का मामला चल रहा है। गांधी परिवार के भ्रष्टाचार और सरकार में रहते उलटे-सीधे फैसलों का खामियाजा पूरा देश भुगत रहा है। चीन आज जो आंखें दिखा रहा है उसके लिए कांग्रेस की पूवर्वती सरकारें कम जिम्मेदार नहीं हैं जिन्होंने चीन से लगी सीमाओं को सुरक्षित करने के बारे में कभी सोचा ही नहीं। मौजूदा गलवान घाटी विवाद भी इसी की एक कड़ी है।

खैर, गांधी परिवार की फितरत रही है कि वह समय के साथ अपना ‘गोल पोस्ट’ बदलता रहता है। 2019 के लोकसभा चुनाव में मोदी की छवि धूमिल करने के लिए गांधी ने ‘चौकीदार चोर है’ का खूब नारा उछाला। इसी प्रकार मुसलमानों से जुड़े तीन तलाक कानून, नागरिकता सुरक्षा कानून हो या फिर मोदी सरकार द्वारा आर्थिक सुधार के लिए लागू किए जाने वाले जीएसटी कानून के विरोध से लेकर कोरोना वायरस, लॉकडाउन और अर्थव्यवस्था को लेकर निगेटिव बातें करना गांधी परिवार की इसी सोच का हिस्सा है। चीन तो मानो राहुल गांधी का सबसे पसंदीदा मुद्दा है। डोकलाम सीमा विवाद के समय तो राहुल गांधी कैलाश मानसरोवर यात्रा के नाम पर चीनी नेताओं से चुपचाप मुलाकात भी कर आए थे। जब इस बात का पता चला तो कांग्रेस की काफी फजीहत हुई थी, लेकिन राहुल गांधी का चीन प्रेम बना ही रहा। मौजूदा समय जब हमारे 20 जवान गलवान में चीन सीमा पर शहीद हो चुके हैं तब भी गांधी परिवार चीन की आलोचना करने से अधिक मोदी पर हमलावर है। गांधी परिवार की समस्या यह है कि वह मोदी को ही देश समझने लगा है। इसीलिए वह देश की आलोचना करने से भी बाज नहीं आता है।

भारत-चीन के बीच भारी तनाव के बावजूद कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी प्रधानमंत्री मोदी पर टिप्पणी करने से बाज नहीं आ रहे हैं। वह लद्दाख की गलवानी घाटी में चीनी सैनिकों के साथ हिंसक टकराव में 20 भारतीय जवानों के शहीद होने की पृष्ठभूमि में मोदी से सवाल करते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मामले पर खामोश क्यों हैं, लेकिन यह नहीं बताते कि कांग्रेस की सरकारों ने ऐसा क्या किया था, जिसके चलते गलवानी घाटी तक पहुंचने में भारतीय सैनिकों का मार्ग प्रशस्त हो जाता। मोदी सरकार ने जब यहां सड़क निर्माण कार्य शुरू कराया तो चीन बेचैन हो उठा। इतिहास के जानकार कहते हैं कि 1962 में भारत-चीन के बीच जो युद्ध हुआ, उस समय पहली बार तनाव इसी घाटी से आरंभ हुआ था। आज फिर भारतीय सैनकिों के मारे जाने से तनाव और ज्यादा बढ़ गया है।

बात गांधी परिवार की कि जाए तो इस आज के गांधी परिवार को न तो भारत का इतिहास पता है, न भूगोल की जानकारी है। इसीलिए यह लोग जग हंसाई का कारण भी बनते रहते हैं। दो-तीन दिन पुरानी ही तो बात है जब चीन सीमा पर 20 भारतीय सैनिकों की शहादत हुई थी। सरकार ने इस घटना को किसी से छिपाया भी नहीं, लेकिन राहुल बाबा के समझ में नहीं आया। वह तो ट्वीट पर ट्वीट करने में लगे थे, ‘प्रधानमंत्री खामोश क्यों हैं ? वह छिपे हुए क्यों हैं ? अब बहुत हो चुका. हमें यह जानने की जरूरत है कि क्या हुआ है।’ प्रधानमंत्री को अपनी जिम्मेदारी का अहसास था, उन्होंने गत दिवस 17 जून को जनता के सामने आकर सारी हकीकत बताई। यह भी कहा कि जवानों की शहादत बेकार नहीं जाएगी, लेकिन दुख की बात है कि राहुल गांधी एक दिन भी इंतजार नहीं कर सके और मोदी पर हमलावर हो गए। राहुल ही नहीं, सोनिया गांधी ने भी मोदी की चुप्पी पर सवाल खड़े करने में देरी नहीं लगाई। अच्छा होता कांग्रेस के दिग्गज नेता गांधी परिवार को समझा देते कि प्रधानमंत्री का बयान समय पर आएगा। कुछ औपचारिकताएं भी होती हैं, पीएम को उसे भी पूरा करना होता है। गौरतलब है कि लद्दाख की गलवान घाटी में सोमवार 15 जून की रात चीनी सैनिकों के साथ हिंसक झड़प में भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हो गए थे। सेना ने 16 जून को यह जानकारी दी थी।

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