मनुष्य शाकाहारी या मांसाहारी ?

images (14)

प्रस्तुति : आचार्य ज्ञान प्रकाश वैदिक
=============
परमपिता परमात्मा ने प्राणियों के आहार का निर्धारण स्वतः ही किया है जैसे-गाय, हिरण,हाथी,घोड़े,गदहों आदि पशुओं के लिए घास शाक, फूल पत्ते आदि और बाघ,सिंह, कुत्ते, बिल्ली आदि के लिए मांस। परमात्मा ने समस्त प्राणियों के शरीर की रचना उनके भिन्न भिन्न आहार को सहजता से खाने एवं पचाने योग्य ही बनाई है।

अब देखिये कि मांसाहारी और शाकाहारी प्राणियों के शरीर की रचना में परमात्मा ने किस प्रकार भेद निर्माण किया है, यथा-

(1) शाकाहारी–प्राणियों के मुख म़े दाढ़े होती हैं जिससे वे अन्न को पीस देते हैं। दांतों में अंतर नहीं होता।

(1)मांसाहारी:-प्राणियों के मुख के अग्र भाग में तीक्ष्ण नुकीले दो दांत लंबे किल्ले रुप में होते हैं जिसे हम Canine कहते हैं, ताकि वो अन्य प्राणियों को फाड़-फाड़कर खा सकें और उनके दाढ़े नहीं होने से यह मांस रुपी भोजन को सीधा सटकते हैं,चबाकर या पीसकर नहीं खाते तथा दांतों में भी अन्तर होता है।

(2) शाकाहारी–प्राणी होठ से पानी पीते हैं। घूंट घूंट कर पीते हैं।

(2) मांसाहारी–जीभ से चाट-चाट कर(चप चप करके) पानी पीते हैं।

(3) शाकाहारी–इनकी संतान की आंखें पैदा होते ही खुलती हैं,बंद नहीं रहती।

(3) मांसाहारी–इनके बच्चों की आंखें पैदा होने पर बंद रहती हैं,जो 2-3-4 दिनों बाद खुलती हैं।

(4) शाकाहारी–तीक्ष्ण नुकीले नाखून नहीं होते,एक शफ या दो शफ रहते हैं,पंजे नहीं होते।

(4) मांसाहारी–पंजों पर नाखून तीक्ष्ण व नुकीले होते हैं ताकि शिकार को आसानी से फाड़कर उसे खा सकें।

(5) शाकाहारी–पांव की रचना से चलते समय आवाज हो सकती है।

(5) मांसाहारी–पांव के तलवे ऐसे गद्दीदार होते हैं जिससे चलने में आवाज न हो,ताकि अपने शिकार को सुगमता से पकड सकें।

(6) शाकाहारी–बचपन के दांत गिरकर पुनः नये दांत आते हैं।

(6) मांसाहारी–बचपन के दांत गिरकर पुनः दूसरे नये दांत नहीं आते।

(7) शाकाहारी-आंतों की लम्बाई उनके शरीर से 8 से 10 गुना बड़ी होती है।

(7) मांसाहारी–आंतों की लम्बाई कम होती है,कारण? मांस आंतों में ज्यादा समय न रहे।

(8) शाकाहारी–हरित द्रव्य जैसे साग सब्जी आदि पचाने की शक्ति होती है।

(8) मांसाहारी–हरित द्रव्य पचाने की क्षमता नहीं होती।

(9) शाकाहारी–लीवर व पित्ताशय छोटा होता है।

(9) मांसाहारी–लीवर व पित्ताशय शरीर के परिमाण से बड़ा रहता है।

(10) शाकाहारी–आंखें बादाम जैसी आकृति की होती हैं और रात्रि/अंधेरे में पूर्णतः नहीं देख सकते।

(10) मांसाहारी–आंखें गोल होती हैं,रात्रि/अंधेरे में स्पष्ट दिखायी पड़ता है।

(11) शाकाहारी–साधारणतः रात्रि में सोते हैं तथा दिन में जागते एवं चलते फिरते हैं।

(11) मांसाहारी–रात्रि में चलते-फिरते हैं, दिन में प्रायः सोते रहते हैं।

(12) शाकाहारी–क्रूरता,धोखाधड़ी आदि नहीं करते,बलवान होते हैं,इनके कार्य करने की क्षमता अधिक होती है तथा इनमें आत्मिक व शारिरिक बल अधिक पाया जाता है।

(12) मांसाहारी–क्रूर,धोखेबाज,दगाबाज,एवं चालाक प्रकृति के होते हैं,आत्मिक व शारिरिक शक्ति कम रहने के कारण कार्य करने की क्षमता कम होती है।

(13) शाकाहारी–भूखा रहने की क्षमता बहुत होती है तथा भूख रहने पर भी किसी को हानि पहुंचाने की अथवा हिंसा करने की भावना नहीं रखते।

(13) मांसाहारी–भूख न रहने पर भी दूसरे प्राणियों को मारते हैं।

(14) शाकाहारी–ये स्वभावतः साधन होते हुए भी शिकार नहीं करते,और न ही ये शिकार कला में निपुण होते हैं।

(14) मांसाहारी–किसी हथियार या साधन के बिना ही/भी शिकार कर सकते हैं। मांसाहारी जीव शिकार कला में स्वाभाविक ही निपुण होते हैं।

(15) शाकाहारी–श्वास-प्रश्वास क्रिया धीमी अर्थात् मंद गति होने के कारण ये दीर्घ जीवन(लम्बी आयु) वाले होते हैं तथा समाज में रहना पसंद करते हैं।

(15) मांसाहारी–श्वसन प्रक्रिया तेज अर्थात् गतिमान होने के कारण ये दीर्घ आयु वाले नहीं होते तथा समूह में अर्थात् झुंड़ में रहना पसंद नहीं करते।

(16) शाकाहारी–भाग-दौड़ (परिश्रम) करने पर पसीना आता है।

(16) मांसाहारी–छलांग मारते हुए अर्थात् बहुत दौड़ने (परिश्रम करने पर ) पर भी पसीना नहीं आता।

(17) शाकाहारी–खून पीने की इच्छा स्वाभाविक रुप से नहीं होती। खून पचा भी नहीं सकते। इनका रक्त क्षारयुक्त होता है।

(17) मांसाहारी–खून पीने की तीव्र इच्छा होती है और खून पचा सकते हैं। इनका रक्त आम्लयुक्त होता है।

(18) शाकाहारी–शरीर की बाहरी ऊर्जा का उत्सर्जन अधिक होता है।

(18) मांसाहारी–शरीर की ऊर्जा कम उत्सर्जित होती है,अतः शरीर से बाहर उत्सर्जन कम मात्रा में होता है।

(19) शाकाहारी–माँ का वात्सल्य प्रेम, ममता अधिक रहता है,भूख लगने पर भी अपने बच्चों को माँ कदापि नहीं खाती।

(19) मांसाहारी–हिंसक जीव मातृत्व में क्रूरता से भूख लगने पर अपने बच्चों को स्वयं खा जाते हैं। घरेलू बिल्ली को खुद ही अपने बच्चों को खाते हुए अक्सर देखा गया है

(20) शाकाहारी–खाद्य पाचन के लिए जो एन्ज़ाइम तैयार होता है वह केवल वनस्पती-जन्य पदार्थों को ही पचा सकता है।वनस्पति के सेवन से एसिड टॉक्सिन नहीं होते, उत्तेजना न होने से स्वभाव शान्त व दयालु किस्म का होता है।

(20) मांसाहारी–मांस को पचाने वाला एन्ज़ाइम तैयार होता है। मांस में एसिड और Toxins बहुत हैं जिसके कारण उत्तेजना होती है,परन्तु शक्ति नहीं आती तथा हिंसक प्राणियों का स्वभाव क्रूर व भयानक किस्म का होता है।

अब आप स्वयं ही फैंसला करें कि हम मनुष्य किस श्रेणी में आते हैं मांसाहारी या शाकाहारी ????
परमात्मा ने मानव प्राणी को शाकाहारी ही बनाया है जो कि इसकी शरीर रचना से सिद्ध होता है। जन्म से प्राप्त मन के झुकाव को Nature स्वभाव कहते हैं और जन्म के बाद सीखी हुई बातों को Habbit आदत कहते हैं।

मनुष्य स्वभावतः शाकाहारी है, मांसाहार एक आदत है जो इंसान ने जबर्दस्ती अपनाई है। प्रयोग के लिए एक ६-७ मास का नन्हे शिशु के सामने लाल-लाल पपीते के टुकड़े थाली में रखे गए और दूसरी थाली में रक्त से सने हुए मांस के लाल-लाल टुकड़े रखे गए,जब शिशु को उन थालियों की दिशा में छोड़ा गया,तो यह देखा गया कि वह नादान निरामिष शिशु पपीते के टुकड़े की ओर ही गया, मांस के टुकडे़ उसे आकर्षित नहीं कर सके। इससे स्पष्ट होता है कि मनुष्य मांसाहारी प्राणी नहीं है,शाकाहारी है । अतः हम अपने स्वाद की खतिर मूक पशुओं का वध न करें और एक शाकाहार एवं सात्विक जीवन अपनाएं।

Comment:

betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
casinolevant giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti mobil giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
betgaranti güncel giriş
Kolaybet Giriş
ngsbahis giriş
artemisbet güncel
bettilt giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
betnano güncel giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
bettilt giriş
Betgaranti
sahabet giriş
betgaranti
betgaranti giriş
onwin giriş
onwin giriş
kolaybet
betgaranti giriş
sahabet
sahabet
marsbahis giriş
onwin
sahabet
sahabet
sahabet
sahabet
sahabet
sahabet
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
betkanyon
betkanyon
sahabet giriş
betkanyon giriş
betkanyon giriş
marsbahis giriş
marsbahis giriş
onwin
onwin
bettilt giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
betkanyon
Betgaranti Giriş
holiganbet
holiganbet
sahabet
Kolaybet Giriş
Kolaybet Giriş
Kolaybet giriş
sahabet
sahabet
onwin
onwin
sahabet
sahabet
onwin giriş
onwin giriş
betgaranti giriş
holiganbet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
bettilt giriş
perabet giriş
kolaybet giriş
kolaybet giriş
onwin giriş
sahabet giriş
bettilt giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
bettilt giriş
onwin giriş
sahabet giriş