श्री कृष्ण और अर्जुन के द्वारा दानवीर कर्ण से ब्राह्मण वेश में जाकर दान मांगने की घटना और महाभारत का सच

images (69)

हमारे समाज में कर्ण की दानवीरता के किस्से बहुत प्रसिद्ध हैं । ऐसा कहा जाता है कि जिस समय कर्ण की मृत्यु हुई तो उस समय श्री कृष्णजी को अत्यन्त दु:ख हुआ । तब अर्जुन से अर्जुन ने उनसे पूछ लिया कि आज आप इतने दु:खी क्यों है ? इस पर श्री कृष्ण जी ने अर्जुन से कहा कि – ‘अर्जुन ! तुम नहीं जानते कि आज संसार का एक बहुत बड़ा दानी और मेरा बहुत बड़ा भक्त चला गया है ।’ इस पर अर्जुन को विश्वास नहीं हुआ । उसने कहा कि क्या कर्ण अर्जुन से भी बड़ा था भक्त था ? तब श्री कृष्ण जी और अर्जुन दोनों ब्राह्मण का वेश बनाकर रणभूमि में जाते हैं ।
जहाँ कर्ण उस समय अंतिम सांसें गिन रहा था । इन दोनों ब्राह्मणों ने कहा – ‘दानवीर कर्ण की जय हो ‘। हम आपकी कीर्ति सुनकर कुछ प्राप्ति की इच्छा से आपके पास आए हैं ।’ कर्ण बोला – ‘ मैं तो मृत्यु के मुख में पड़ा हुआ हूँ । यहाँ मेरे पास कुछ नहीं है। आप मेरे घर पर चले जाइए । आपकी अभीष्ट वस्तु आपको मेरी पत्नी से प्राप्त हो जाएगी।’ तब ब्राह्मण वेशधारी श्री कृष्ण और अर्जुन ने कहा कि हम निराश लौट जाएं , हम घर नहीं जाएंगे । आप यदि कुछ दे सकें तो यही दे दें । उनकी बात सुनकर कर्ण ने कुछ स्मरण करते हुए कहा – ‘मेरे मुख में एक स्वर्ण का दाँत लगा हुआ है ।आप तोड़कर उसे निकाल लें । तब ब्राह्मण वेशधारी ब्राह्मण बोले – ‘हम यह पाप नहीं कर सकते ।’ आपको कुछ देना हो तो दें अन्यथा हम लौटते हैं ।’ ,कर्ण बोला – ‘अच्छा आप यह पास में पड़ा हुआ पत्थर मुझे पकड़ा दें । मैं स्वयं ही अपना दाँत तोड़ कर आपको दे दूंगा ।’

इस पर ब्राह्मणों ने कहा – ‘हम दान लेने आए हैं , नौकरी करने नहीं आए ।’ यह सुनकर ,कर्ण ने स्वयं सरक – सरककर वह पत्थर उठाया और उससे अपना सोने का दाँत तोड़ कर कहा – ‘लीजिए ।’ ब्राह्मण बोले – ‘यह रक्त से सना हुआ दाँत हम नहीं ले सकते।’ तब कर्ण ने सरकते हुए अपना धनुष बाण उठाया और भूमि में मारा । जिससे जलधारा फूट पड़ी । उस धारा में धोकर कर्ण ने वह दाँत उन्हें दे दिया । तब श्रीकृष्ण ने उन्हें अपना और अर्जुन का परिचय दिया।
वास्तव में यह सारी कहानी कथावाचकों ने कल्पना मात्र के आधार पर तैयार की है । महाभारत के ‘कर्णपर्व’ में स्पष्ट लिखा है कि – ‘ततोअर्जुनस्तस्य शिरो जहार’ – अर्थात अर्जुन ने कहा कि :– “मैंने कर्ण का सिर धड़ से अलग कर दिया है ।” जब सिर धड़ से अलग हो गया , तब दाँत तोड़कर देने की बात कैसे सम्भव हो सकती है ?
महाभारत कर्णपर्व के 26 वें अध्याय के 29 वें श्लोक को ध्यान से पढ़ने की आवश्यकता है। जहाँ पर स्पष्ट यह लिखा है कि – ‘महाबली अर्जुन के द्वारा इस प्रकार छोड़ा हुआ वह सूर्य के समान तेजस्वी बाण आकाश और नेताओं को प्रकाशित करने लगा जैसे इन्द्र ने अपने वज्र से वृत्रासुर का सिर काट गिराया था उसी प्रकार अर्जुन ने उस बाण द्वारा कर्ण का मस्तक धड़ से अलग कर दिया ।’
संजय ने भी जब यह समाचार धृतराष्ट्र को दिया था तो उसने भी यही कहा था कि कर्ण को मार डाला गया है। कर्ण के मारे जाने पर कौरव अपने राज्य से, धन से स्त्रियों और जीवन से भी निराश हो गए । जब कर्ण मारा गया तो कौरवों की सेना भागने लगी थी। महाभारत में ऐसे वाक्य संबंधित कर्णपर्व में आते हैं। जिनमें स्पष्ट रूप में कर्ण के मारे जाने की बात कही जाती है ना कि उसके घायल होकर जमीन पर गिर पड़ने की बात कहीं गई है।
जिस समय कर्ण को युद्ध भूमि में मारा गया था , उस समय युद्धिष्ठिर युद्ध भूमि में नहीं थे । वह उनकी सूचना से बेखबर रहकर अपने शिविर में चले गए थे। रात्रि में जब श्री कृष्ण जी और अर्जुन अपने शिविर में लौटे तो उन्होंने ही जाकर कर्ण के मारे जाने की सूचना युधिष्ठिर दी । युधिष्ठिर उस समय अपने पलंग पर सो रहे थे। जब उनको जगाया गया तो वह और कृष्ण और अर्जुन के चेहरे की प्रसन्नता को देखकर यह समझ गए थे कि आज कर्ण मारा गया ।
यहाँ पर भी श्री कृष्ण जी ने युधिष्ठिर को कर्ण के मारे जाने की सूचना देते हुए स्पष्ट रूप से यह कहा है कि राजन ! महारथी सूत पुत्र कर्ण मारा गया ।
राजन ! सौभाग्य से आप विजयी हो रहे हैं ।
हे भारत ! आपकी वृद्धि हो रही है । यह भी सौभाग्य की बात है । अपनी बात को और स्पष्ट करते हुए कर्णपर्व के 27 वें अध्याय के 18 वें श्लोक में श्रीकृष्ण जी ने कहा कि जिस नराधम ने द्यूत में जीती हुई द्रौपदी का उपहास किया था आज पृथ्वी उस सूतपुत्र कर्ण कर रक्तपान कर रही है ।
पता है स्पष्ट है कि कर्ण की दान वीरता की परीक्षा के लिए अर्जुन और श्री कृष्ण जी का उनके पास जाना और उनका दांत मांगना केवल एक काल्पनिक कहानी मात्र है सत्य नहीं है।

डॉ राकेश कुमार आर्य
संपादक : उगता भारत

Comment:

vaycasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
vdcasino giriş
hiltonbet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
hiltonbet giriş
milosbet giriş
milosbet giriş
milosbet giriş
milosbet giriş
hiltonbet giriş
hiltonbet giriş
hiltonbet
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
royalbet giriş
royalbet giriş
royalbet giriş
royalbet giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
galabet giriş
royalbet giriş
royalbet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
vdcasino giriş
vaycasino
vaycasino giriş
vaycasino giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
roketbet
norabahis giriş
norabahis giriş
betasus giriş
betpark giriş
betpark giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
norabahis giriş
betpark giriş
betpark giriş
vdcasino giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betnano giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betorder giriş
betorder giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betnano giriş
betnano giriş
holiganbet giriş
betnano giriş
holiganbet giriş