प्रवासी मजदूरों और किसानों के लिए सरकार की योजनाएं सराहनीय , परंतु क्रियान्वयन में ईमानदारी जरूरी : संदीप कालिया

sandeep kalia

नई दिल्ली । ( अजय आर्य ) अखिल भारत हिंदू महासभा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संदीप कालिया ने सरकार के उन कदमों की प्रशंसा की है जो छोटे किसानों, प्रवासी मजूदरों और स्ट्रीट वेंंडर्स और शहरी गरीब सहित समाज के निचले तबके के लोगों के लिए हैं । उन्होंने कहा कि लॉकडाउन की घोषणा के तुरंत बाद प्रधानमंत्री जन कल्याण योजना के रूप में मोदी सरकार ने गरीबों की मदद करने की कोशिश की है । जिससे मोदी सरकार की गरीबों , किसानों और मजदूरों के प्रति संवेदनशीलता का पता चलता है।
हिंदू महासभा के नेता ने कहा कि मोदी सरकार ने पिछले कुछ वक्त में ही किसानों के लिए ₹25,000 करोड़ के कर्ज का प्रावधान किया है। जिससे पता चलता है कि सरकार समाज के वंचित तबके के लिए हर संभव मदद करने जा रही हैं।

श्री कालिया ने कहा कि अपने देश के नागरिकों के प्रति संवेदनशील और लोक कल्याणकारी शासन का होना ही लोकतंत्र की वास्तविकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की संवेदनशीलता पर कोई प्रश्नचिन्ह नहीं लगा सकता , परंतु अखिल भारत हिंदू महासभा इतना अवश्य चाहेगी कि उनकी योजना उसी रूप में क्रियान्वित हो जिस रूप में वह घोषित की गई है या जैसी इच्छा वह स्वयं इन योजनाओं को लेकर जताते हैं । कहीं ऐसा न हो कि राजीव गांधी के जमाने वाली बात आज भी चरितार्थ हो जाए कि केंद्र से निकलने वाला ₹1 जमीनी स्तर पर मात्र 15 पैसे ही पहुंच पाता था । यदि मोदी सरकार वास्तविक पात्र व्यक्तियों तक उनका ₹1 ज्यों का त्यों उनके हाथों में देने में सफल हो जाती है तो निश्चय ही इससे देश का न केवल विकास होगा बल्कि गरीब के चेहरे पर खुशी भी लौटेगी।
हिंदू महासभा नेता ने कहा कि यह स्वागत योग्य है कि किसान क्रेडिट कार्ड, पीएम किसान, फसल बीमा योजना जैसे कई स्कीम के जरिए किसानों की काफी मदद करने की कोशिश की जा रही है । सरकार ने जनधन योजना के माध्यम से इस देश के उन गरीबों के बारे में सोचने का काम किया है, जो अब तक बैंकिंग सिस्टम में शामिल नहीं हो पा रहे थे ।
हिंदू महासभा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष ने इस बात पर भी संतोष व्यक्त किया कि सरकार की ओर से कृषि क्षेत्र की मदद के लिए कोरोना के संकट के बीच 86,600 करोड़ रुपये के 63 लाख कृषि लोन दिए गए हैं । इसके साथ ही नाबार्ड ने कॉपरेटिव बैंक और रीजनल रूरल बैंक के माध्यम से 29,500 करोड़ रुपये की रिफाइनेंसिंग की है। इसके साथ ही राज्य सरकारों को कृषि उत्पाद या कृषि उपज की खरीद के लिए मार्च में ₹6700 करोड़ दिए गए हैं।
वित्त मंत्री श्रीमती सीतारमण की इस घोषणा का भी हिंदू महासभा नेता ने स्वागत किया कि सरकार ने पिछले 2 महीने में राज्य सरकारों को स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फंड के रूप में बड़ी मदद की है । इसमें प्रवासी मजदूर और शहरी गरीबों के लिए खाना-पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने की कोशिश की गई है. इस मद में राज्यों को ₹11000 करोड़ से अधिक की रकम दी है। इसके तहत शहरी गरीब या बेघर लोगों को दिन में तीन बार खाना उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
हिंदू महासभा के वरिष्ठ नेता ने कहा कि वित्त मंत्री ने वन नेशन वन कार्ड, स्ट्रीट वेंडर्स की आर्थिक सहायता की स्कीम, शहरी गरीबों के लिए सस्ती रेंटल स्कीम, मुद्रा शिशु लोन, आदिवासियों के लिए रोजगार की योजना, न्यूनतम मजदूरी को यूनिवर्सल बनाने सहित कई स्कीमों का एलान किया है । उन्होंने मध्यमवर्ग को भी बड़ा तोहफा दिया है। उन्होंने घर खरीदने के लिए क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम की अवधि एक साल के लिए बढ़ा दी है। इससे 2.5 लाख लोगों को फायदा होगा। 6 से 18 लाख रुपये सालाना इनकम वाले लोग इस स्कीम का लाभ उठा सकते हैं।
‘उगता भारत’ के साथ विशेष बातचीत में श्री कालिया ने कहा कि सरकार की योजनाएं तो प्रशंसनीय और खुशी प्रदान करने वाली हैं परंतु इनका क्रियान्वयन भी इसी रूप में किया जाना आवश्यक है ।कहीं ऐसा ना हो कि केवल सुनहरी घोषणाएं सुनहरे सपने दिखाने वाली होकर रह जाएं ।उन्होंने कहा कि हम श्री मोदी की इच्छा शक्ति का सम्मान करते हैं , परंतु तंत्र में बैठे लोग अक्सर योजनाओं को सफल नहीं होने देते हैं , ऐसा अनुभव भी हमारे सामने है । इसलिए प्रधानमंत्री मोदी को अपनी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए कदम फूंक-फूंक कर रखने की आवश्यकता है । उसी से उनकी किसानों और प्रवासी मजदूरों के लिए लाई गई योजनाएं वास्तविक रूप में सफल हो पाएंगी । उन्होंने कहा कि राशन कार्ड का निर्णय सरकार ने गरीबों को बहुत बड़ा तोहफा प्रदान किया है । इससे प्रवासी मजदूरों के लिए अनेकों प्रकार की समस्याएं दूसरे राज्यों में जाकर झेलनी पड़ती थी , अब उनका समाधान होगा और अपने ही देश में अपने ही पेट को भरने के लिए इधर उधर जाने वाले प्रवासी मजदूरों को समय पर वे सारी सुविधाएं उपलब्ध होंगी जिन्हें सरकारें उन्हें प्रदान करना चाहती हैं।

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