एनएसए अजीत डोभाल हैं भारत की सुरक्षा की ढाल ,सम्मान की कभी चाह नहीं की , देश सेवा ही है जिनके लिए सबसे बड़ा धर्म

Screenshot_20200516-152517_Samsung Notes

अजीत डोभाल एक ऐसे व्यक्तित्व का नाम है , जिसने भारत के जिस प्रधानमंत्री के साथ भी काम किया उसी का उन्होंने दिल जीत लिया । पूर्णतया देश भक्ति का प्रतीक बन चुके अजीत डोभाल बिल्कुल पीछे रहकर और बिना किसी बड़ाई की इच्छा रखे देश के लिए काम करते हैं । उनका यह गुण ही उन्हें ‘अजीत डोभाल’ बनाता है । अब जब उनका नाम चारों ओर बार-बार सुनने में आता है तो देश के लोगों में भी वह बहुत अधिक पॉपुलर हो चुके हैं। यद्यपि वह अपने आपको किसी भी प्रकार की पॉपुलैरिटी से बचाने का हर संभव प्रयास करते हैं । क्योंकि उनका सारा फोकस अपने काम पर होता है । अभी 15 मई को म्यांमार सेना ने पूर्वोत्तर के 22 उग्रवादियों को भारत को सौंप दिया। इनमें एनडीएफबी (एस) का स्वयंभू गृह सचिव राजेन दामरे भी शामिल है। अधिकारियों के मुताबिक राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल खुद इस गुप्त अभियान पर नजर बनाए हुए थे, डोभाल के नेतृत्व में इसे एक अभूतपूर्व कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है जिसमें भारत के पूर्वोत्तर के पड़ोसी देश ने 22 उग्रवादियों को भारत को सौंपा। इससे पता चलता है कि दोनों राष्ट्रों के बीच राजनयिक और सैन्य संबंध मजबूत हो रहे हैं।

डोभाल ने ऐसे अनेकों कार्यों को अंजाम देकर अपने आप को इस मुकाम तक पहुंचाया है , जब लोग उन्हें जेम्स बॉन्ड के नाम से जानने लगे हैं हालांकि वह जेम्स बांड को भी कई मामले में पीछे छोड़ चुके हैं।
अजीत डोभाल भारत के एकमात्र ऐसे नौकरशाह हैं जिन्हें कीर्ति चक्र और शांतिकाल में मिलने वाले गैलेंट्री अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। डोभाल कई सिक्युरिटी कैंपेन का हिस्सा रहे हैं। इसी के चलते उन्होंने जासूसी की दुनिया में कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं। अजीत डोभाल का जन्म 1945 को पौड़ी गढ़वाल में हुआ था। उनकी पढ़ाई अजमेर मिलिट्री स्कूल में हुई है। केरल के 1968 बैच के IPS अफसर डोभाल अपनी नियुक्ति के चार साल बाद 1972 में ही इंटेलीजेंस ब्यूरो से जुड़ गए थे।
डोभाल को जासूसी का लगभग 37 साल का अनुभव है। वह 31 मई 2014 को देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बने। आपको जानकर हैरानी होगी कि खुफिया एजेंसी रॉ के अंडर कवर एजेंट के तौर पर डोभाल सात साल पाकिस्तान के लाहौर में एक पाकिस्तानी मुस्लिम बनकर रहे थे। जून 1984 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर पर हुए आतंकी हमले के काउंटर ऑपरेशन ब्लू स्टार में जीत के नायक बने। अजीत डोभाल रिक्शा वाला बनकर मंदिर के अंदर गए और आतंकियों की जानकारी सेना को दी, जिसके आधार पर ऑपरेशन में भारतीय सेना को सफलता मिली।
1999 में कंधार प्लेन हाईजैक के दौरान ऑपरेशन ब्लैक थंडर में अजीत डोभाल आतंकियों से निगोसिएशन करने वाले मुख्य अधिकारी थे। जम्मू-कश्मीर में घुसपैठियों और शांति के पक्षधर लोगों के बीच काम करते हुए कई आतंकियों को सरेंडर कराया। अजीत डोभाल 33 साल तक नॉर्थ-ईस्ट, जम्मू-कश्मीर और पंजाब में खुफिया जासूस भी रहे। वह 2015 में मणिपुर में आर्मी के काफिले पर हमले के बाद म्यांमार की सीमा में घुसकर उग्रवादियों के खात्मे के लिए सर्जिकल स्ट्राइक ऑपरेशन के हेड प्लानर रहे।
साल 1984 में 3 से 6 जून तक चले ऑपरेशन ब्लू स्टार को देश कैसे भूल सकता है। तब अमृतसर स्थित हरिमंदिर साहिब परिसर पर खालिस्तान समर्थक जनरैल सिंह भिंडरावाले और उनके समर्थकों ने कब्जा कर लिया था। इसको मुक्त कराने के लिए एक अभियान चलाया गया, जिसे नाम दिया गया ऑपरेशन ब्लू स्टार। भिंडरावाले को पाकिस्तान का समर्थन मिल रहा था। इस ऑपरेशन में अजीत डोभाल ने एक पाकिस्तानी गुप्तचर की भूमिका निभाई और देश की सेना के लिए खुफिया जानकारी जुटाई। इसकी बदौलत सेना का ऑपरेशन आसान हो गया।
भारत विरोधी कश्मीरी उग्रवादी कूका पारे उर्फ मोहम्मद यूसुफ पारे को अजीत डोभाल मुख्य धारा में लाए। पाकिस्तान प्रशिक्षित कूका पारे 250 आतंकियों को साथ लेकर पाकिस्तान के खिलाफ हो गया था। उसने जम्मू एंड कश्मीर आवामी लीग नाम की पार्टी बनाई। कूका एक बार विधायक भी बना। 2003 में एक कार्यक्रम से लौटते समय उसकी आतंकियों ने हत्या कर दी थी।
1991 में खालिस्तान लिबरेशन फ्रंट द्वारा अपहृत किए गए रोमानियाई राजनयिक लिविउ राडू को बचाने की सफल योजना बनाने वाले अजीत डोभाल ही थे। डोभाल ने पाकिस्तान और ब्रिटेन में राजनयिक जिम्मेदारियां संभालीं। एक दशक तक उन्होंने खुफिया ब्यूरो की ऑपरेशन शाखा का नेतृत्व किया।
पाक अधिकृत कश्मीर में घुसकर आंतकियों के कैंप को नष्ट करने के ऑपरेशन के पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का बड़ा हाथ है। पीओके में अंजाम दिए गए सर्जिकल ऑपरेशन में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने अहम भूमिका निभाई। अजीत डोभाल कब कौन से ऑपरेशन को अंजाम देंगे इस बारे में तब ही पता चलता है जब ऑपरेशन पूरा हो जाता है। कुछ ऐसी भूमिका उन्होंने अनुच्छेद 370 के हटाने में भी निभाई।
प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 में ही अपने कुछ खास कामों को पूरा करने के लिए अजीत डोभाल का सहयोग लेने का निश्चय कर लिया था । वास्तव में यह पीएम मोदी की पारखी नजरों का ही कमाल था कि उन्होंने डोभाल को उनकी अनुपम देश सेवाओं के दृष्टिगत सेवा विस्तार भी दिया । अब श्री डोभाल अपनी कार्यशैली से देश की अनुपम सेवा कर रहे हैं। निश्चय ही वह इस समय पर्दे के पीछे रहकर देश के लिए कुछ वैसा ही चक्रव्यूह बनाने में लगे हुए हैं जैसा सुरक्षा तंत्र कभी चंद्रगुप्त के समय में चाणक्य खड़ा किया था।

Comment:

betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
casinolevant giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti mobil giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
jojobet giriş
milanobet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
betgaranti güncel giriş
vaycasino giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
onwin giriş
onwin giriş
onwin giriş
onwin giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
superbetin giriş
superbetin giriş
superbetin giriş
superbetin giriş
betsat giriş
betsat giriş
betsat giriş
betsat giriş
Kolaybet Giriş
onwin
onwin
sahabet
sahabet
sahabet
sahabet
sahabet
sahabet
onwin
onwin
holiganbet
sahabet
bets10
casinolevant
ngsbahis giriş
artemisbet güncel
grandpashabet giriş
bettilt giriş
jojobet giriş