कांग्रेस के अल्हड़ नेतृत्व को नरेन्द्र मोदी का अल्टीमेटम

वीरेन्द्र सेंगर

भाजपा के चर्चित नेता नरेंद्र मोदी अब कांग्रेस नेतृत्व से सीधे टकराव के ‘मोड’ में आते नजर आ रहे हैं। भाजपा नेतृत्व ने भले उन्हें औपचारिक रूप से अपना ‘पीएम इन वेटिंग’ न घोषित किया हो, लेकिन मोदी मानकर चल रहे हैं कि अगले चुनाव में उन्हें ही कांग्रेस से टक्कर लेनी है। शायद, इसीलिए अब वे खुलकर कहने लगे हैं कि कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकार अब ज्यादा दिन नहीं चलने वाली। भाजपा सत्ता में आई, तो इनके एक-एक गुनाह का हिसाब ले लिया जाएगा। उन्होंने चुनौती के अंदाज में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को ललकारना शुरू कर दिया है। कह दिया है कि उनकी पार्टी सत्ता की भूखी नहीं है। लेकिन, सत्ता में रहकर बड़ी लूट करने वालों को चैन से नहीं बैठने दिया जाएगा। यह उनका पक्का संकल्प है। पार्टी के 33वें स्थापना दिवस के कार्यक्रम में मोदी ने अहमदाबाद में एक बड़ा शक्ति प्रदर्शन कर डाला। इस मौके पर वे खूब गरजे-बरसे
साबरमती नदी के किनारे है सरदार पटेल स्टेडियम। अहमदाबाद के इस स्टेडियम में मोदी ने स्थापना दिवस कार्यक्रम के बहाने करीब एक लाख लोगों को जुटा लिया। इस भीड़ को पार्टी कार्यकर्ता बताने का दावा किया गया। भीड़ में आए लोग गले में भगवा पट्टा जरूर डाले थे। ताकि, तस्दीक हो सके कि वे पार्टी कार्यकर्ता ही हैं। यूं तो देश के कई हिस्सों में पार्टी का स्थापना दिवस काफी जोरशोर से मनाया गया। लेकिन, जिन राज्यों में पार्टी सत्ता में है, वहां खास तौर पर बड़े ‘शो’ करने की कोशिश की गई। भोपाल में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अगुवाई में एक बड़ा आयोजन हुआ। इसमें चौहान समर्थकों की कुछ खीझ भी झलकी।
उल्लेखनीय है कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने मोदी के मुकाबले शिवराज सिंह चौहान का राजनीतिक कद कुछ बौना ही रखा है। जबकि, चौहान समर्थक यह दावा करते हैं कि गुजरात से ज्यादा तेज विकास मध्यप्रदेश में हुआ है। इसका पूरा श्रेय मुख्यमंत्री चौहान को है। लेकिन, केंद्रीय नेतृत्व मोदी के सुर में सुर ज्यादा मिला रहा है। इसी के चलते मोदी को संसदीय बोर्ड में जगह दे दी गई। उन्हें चुनाव समिति में भी रख लिया गया। जबकि, चौहान को इन दोनों महत्वपूर्ण समितियों में जगह नहीं मिली। इससे उनके समर्थकों में नाराजगी के भाव हैं। इसकी झलक भोपाल के समारोह में भी दिखाई पड़ी। इस अवसर पर मध्यप्रदेश के विकास की तुलना चीन के विकास से करने की कोशिश की गई। मुख्यमंत्री चौहान ने भी अपनी सरकार की जमकर तारीफ की। कई वक्ताओं ने बगैर नाम लिए हुए शीर्ष नेतृत्व को इस बात के लिए कोसा कि सबसे काबिल मुख्यमंत्री को पार्टी में पूरा इंसाफ नहीं दिया जा रहा है।
दूसरी तरफ, अहमदाबाद में स्थापना दिवस के बहाने मोदी ने अपनी ताकत का रुतबा दिखा दिया। इसके लिए कई दिनों से तैयारी की जा रही थीं। मोदी ने इस कार्यक्रम में हिस्सेदारी के लिए दिल्ली से पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह को ही अकेले न्यौता दिया था। सो, वे दिल्ली के कार्यक्रम में हिस्सा लेने के बाद शाम को अहमदाबाद के लिए रवाना हो गए। अहमदाबाद में हवाई अड्डे पर मोदी ने राजनाथ का बड़ी गर्म जोशी से स्वागत किया। इसके बाद दोनों नेता सरदार पटेल स्टेडियम में पहुंचे। राजनाथ ने यहां एक बार फिर यह बात दोहराई कि मोदी देश के सबसे लोकप्रिय नेता हैं। देश में इतना लोकप्रिय और चहेता कोई और नेता नहीं है। उन्होंने यह भी कह डाला कि कुछ लोगों को इतनी सराहना से शायद हैरानी हो, लेकिन उन्हें लगता है कि नरेंद्र भाई की राजनीति है ही इतनी करिश्माई कि उनकी सराहना होनी ही चाहिए। क्योंकि, उन्होंने गुजरात में अपनी मेहनत और निष्ठा से जो विकास का मॉडल बनाया है, उसकी सराहना दुनियाभर में हो रही है।
बोलते-बोलते राजनाथ सिंह ‘वीर रस’ की भंगिमा में भी नजर आते रहे। उन्होंने कांग्रेस के ‘युवराजÓ राहुल गांधी का बैगर नाम लिए हुए उन पर तीखे कटाक्ष किए। उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल ने उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के अपने चर्चित भाषण में कह दिया था कि कोई सफेद घोड़े पर आकर देश का भाग्य विधाता नहीं बन सकता। दरअसल, राहुल ने यह कटाक्ष बगैर नाम लिए हुए मोदी की राजनीतिक शैली पर किया था। जब कांग्रेस प्रवक्ता राशिद अल्वी से पूछा गया कि क्या घोड़े वाली टिप्पणी मोदी के संदर्भ में आपके नेता ने की है? तो इस पर उन्होंने जवाब दिया था कि यदि राहुल जी मोदी के बारे में बात कर रहे होते, तो वे घोड़े की जगह भैंसे पर बैठ कर आने की बात करते। क्योंकि, हिंदू मिथक में भैंसा यमराज की सवारी मानी जाती है। इस टिप्पणी को लेकर राजनीतिक हल्कों में चर्चा गर्म रही है।
यमराज से मोदी की तुलना पर भाजपा के बड़े नेता नाराज हुए हैं। अहमदाबाद में राजनाथ सिंह ने कल बोलते हुए ‘यमराज’ वाली टिप्पणी का जिक्र करते हुए कह दिया कि जिन लोगों ने ऐसी अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया है, उन्हें देश की जनता जरूर जवाब दे देगी। गुजरात की जनता पहले भी कांग्रेस नेताओं को सबक सिखा चुकी है। उल्लेखनीय है कि एक बार विधानसभा चुनावों के प्रचार-अभियान में कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी ने मोदी को ‘मौत का सौदागर’ करार किया था। इस टिप्पणी को मोदी ने बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना लिया था। अंतत: कांग्रेस को सोनिया गांधी की यह टिप्पणी बहुत भारी पड़ी थी। राजनाथ सिंह इसी टिप्पणी की याद दिला गए। उन्होंने यह भी कह दिया कि भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र में सरकार बनी, तो इसका नेता सफेद घोडे। पर किसी राजकुमार की तरह नहीं, बल्कि किसी कामगार की तरह पसीना बहाते हुए आएगा। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि गुजरात के विकास की सराहना तो राजीव गांधी फाउंडेशन ने भी की है। जिसके कर्ता-धर्ता कांग्रेस में कौन हैं, सभी जानते हैं।
राजनाथ ने संकेतों में यह भी कहा कि मनमोहन सरकार अब बहुत कमजोर हो गई है। यह तो देश के स्वाभिमान की रक्षा भी नहीं कर पा रही। पाकिस्तान जैसा छोटा देश भी सरकार की कमजोर विदेश नीति के चलते आए दिन आंख दिखाता रहता है। इटली के प्रकरण में भारत सरकार गिड़गिड़ाती रही है। इससे देश के हर स्वाभिमानी को धक्का लगा है। ऐसे में, अब इस कमजोर और थकी हुई सरकार की विदाई तय है। राजनाथ के बाद मोदी ने बोलना शुरू किया, तो उन्होंने शुरुआत से ही आक्रामक तेवर अपनाए। कह दिया कि भाजपा नेतृत्व सीबीआई के हमलों से नहीं डरता। कांग्रेस के नेता अपने राज्यपालों को मोहरे की तरह इस्तेमाल करके भाजपा सरकारों को परेशान कराते हैं। लेकिन, इन हरकतों से कोई डरने वाला नहीं है। उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने कह दिया था कि कांग्रेस से किसी के लिए लड़ना आसान नहीं है। क्योंकि कांग्रेस के हजारों हाथ हैं। ये लोग विरोधियों पर सीबीआई लगा देते हैं, जेल में डाल देते हैं। शायद, इसी संदर्भ में मोदी कांग्रेस नेतृत्व को अगाह कर रहे थे।
भाजपा के विवादित नेता नरेंद्र मोदी ने कह दिया कि कांग्रेस और भाजपा की तुलना नहीं की जानी चाहिए। क्योंकि दोनों की सोच बहुत अलग है। भाजपा के लिए देश मां जैसा है, जबकि कांग्रेस के लोग देश को मधुमक्खी का छत्ता समझते हैं। जिसका की रस चूस कर वे मलंग होते रहें। उन्होंने आक्रामक मुद्रा में कहा कि दिल्ली की सत्ता पर बैठे लोगों पर दया आती है, क्योंकि इन्हें शायद यह अंदाजा नहीं है कि इनकी सत्ता जल्द ही खत्म होने वाली है। मोदी ने भी राहुल गांधी का बगैर नाम लिए हुए उनकी चर्चित टिप्पणी पर यही कहा कि जो लोग भाजपा और उनके बारे में गलत भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, उन्हें गुजरात और देश की जनता सबक सिखा देगी। यह भी कह दिया कि ये लोग उन पर जितना कीचड़ उछालेंगे, उतना ही कमल (भाजपा का चुनाव चिन्ह) ज्यादा खिलेगा।
यूं तो भाजपा के अंदर नरेंद्र मोदी को लेकर अंदर ही अंदर राजनीतिक तूफान चल रहा है। पार्टी में दबाव है कि जल्द से जल्द उन्हें अगले चुनाव के लिए ‘पीएम इन वेटिंग’ घोषित किया जाए। लेकिन, गुजरात के दंगों का भूत मोदी के पीछे लगा हुआ है। ऐसे में, जदयू जैसे एनडीए के घटक मोदी के नाम पर ताल ठोकते नजर आ रहे हैं। भाजपा के अंदर भी मोदी को लेकर मतभेद माने जा रहे हैं। खास तौर पर वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी की लॉबी इस कोशिश में है कि मोदी का ‘दिल्ली रथ’ बीच में थाम लिया जाए। इसके लिए बीच-बीच में आडवाणी के सिपहसालार कुछ न कुछ बयान उछालते रहते हैं। कल दिल्ली में भी स्थापना समारोह में एक आडवाणी भक्त नेता ने एक टिप्पणी कर दी, तो बवाल बढ़ गया। इसके बाद इस नेता ने तुरंत ‘यू-टर्न’ ले लिया।
दिल्ली के भाजपा अध्यक्ष हैं, विजय गोयल। उन्होंने कल एक कार्यक्रम में कह दिया कि 2014 का लोकसभा चुनाव, पार्टी आडवाणी के नेतृत्व में लड़ेगी और जीतेगी। इस पर जब मीडिया में हलचल तेज हुई, तो विजय गोयल ने कह दिया कि उनका मतलब वो नहीं था, जो कि लगाया जा रहा है। दरअसल, वे मार्गदर्शन की बात कर रहे थे। जिस तरह से विजय गोयल ने पहले बयान दिया, फिर मुकर गए, उससे पार्टी में यह बहस शुरू हो गई है कि क्या प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवारी के लिए अभी भी आडवाणी लाइन में हैं? इस जुबानी विवाद के बाद मोदी ने अहमदाबाद में जिस तरह की हुंकार भरी, उससे यही लगा कि अब उनके लिए ‘दिल्ली दूर नहीं है’। पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह भी एक दम से मोदीमय नजर आने लगे हैं। उनके तेवरों से तो यही लगा कि भले औपचारिक फैसला न हुआ हो, लेकिन किसी और के लिए अध्यक्ष ने भी गुंजाइश नहीं छोड़ी। जिस अंदाज में मोदी ने कांग्रेस के खिलाफ हुंकार भरी है, इससे भाजपा और कांग्रेस के बीच जुबानी ‘महाभारत’ बढ़ने के आसार बढ़ गए हैं। क्योंकि, मोदी अब ‘वीर बालक’ के तेवरों में आ गए हैं। वे कह भी चुके हैं कि गुजरात का कर्ज उतार चुका हूं, अब देश का कर्ज उतारने की बारी है। अहमदाबाद की उनकी हुंकार से भी यही संकेत मिले कि उन्हें शायद दिल्ली में अपनी खास भूमिका निभाने में अब कोई शक नहीं रह गया है।

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