दिल्ली हिंदू विरोधी दंगे : एक सप्ताह पहले आ गई थी ईंटें , ताहिर हुसैन के घर के पास 7 ट्रक पत्थर

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार

दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगे कोई अकस्मात घटने वाली घटना नहीं थी, बल्कि एक पूर्व नियोजित और पूरी तैयारी के साथ रची गई साजिश थी। दंगे के बाद से ही सबके मन में यही सवाल उठ रहा था कि अचानक उपद्रवियों के हाथ में तेजाब की थैलियाँ, पेट्रोल बम, ड्रम, ईंट-पत्थर और गुलेल आदि कहाँ से आए। अब धीरे-धीरे इस पर से पर्दा उठता जा रहा है और कई खुलासे हो रहे हैं।

इन सब खुलासों से CAA विरोध में हो रहे प्रदर्शनों और धरनों में सम्मिलित समस्त गैर-मुस्लिमों को अपनी आंखें खोलनी चाहिए। इन दंगों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि विरोध की आड़ में इनका उद्देश्य देश में साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ कर अशांति फैलाना है। ये शांति के दुश्मन इन्ही गैर-मुस्लिमों के कंधे पर बैठ इन्ही की जाति और धर्म पर जानलेवा हमले कर रहे हैं।

ताजा खुलासे में पता चला है कि खौफ और खून से सने इन दंगों को अंजाम देने के लिए ये ईंट-पत्थर एक सप्ताह पहले से ही इकट्ठा करना शुरू कर दिया गया था। बताया जा रहा है कि इस हिंसा के लिए ट्रैक्टरों की मदद से एक हफ्ते पहले ही भट्ठों से ईंटे मँगवा ली गई थीं। सात ट्रक पत्थर तो करावल नगर के AAP पार्षद ताहिर हुसैन के घर के पास ही उठाए गए। इस दंगे के पीछे ताहिर हुसैन का बड़ा हाथ बताया जा रहा है। ताहिर पर आईबी ऑफिसर अंकित शर्मा की मौत का भी आरोप है।

ईंट और पत्थरों का अम्बार

ताहिर के घर के आगे लगे पत्थरों के ढेर को देखकर साफ लग रहा था कि इस दंगे के लिए जबरदस्त तैयारी की गई थी। उसके घर के आगे पत्थरों के इतने ढेर को देखकर निगमकर्मी भी सन्न रह गए, क्योंकि वहाँ पर इतना ज्यादा पत्थर था कि उससे एक मंजिला मकान बन सकता था। बता दें कि हिंसाग्रस्त इलाके मुस्तफाबाद, करावल नगर, चमन पार्क, शिव विहार सहित अन्य इलाकों में हिंसा के एक सप्ताह पहले से ही ट्रैक्टरों में भरकर ईंट मँगवाए गए और फिर इसके टुकड़े-टुकड़े किए गए ताकि इसे बोरियों में भरकर छतों पर रखा जा सके।

जो लोग अपने घरों पर ईंटों को एकत्र कर रहे थे, उनका कहना था कि उन्होंने अपने मकान निर्माण कार्यों के उद्देश्य से बड़ी संख्या में ईंटों का ऑर्डर दिया था। जबकि जाँच से पता चला है कि इन्हीं ईंटों को टुकड़ों में तोड़ा गया था और हिंसा के दौरान इस्तेमाल किया गया।

इसके साथ ही बताया जा रहा है कि जहाँं ईंटे रखी गई थीं, उन घरों में कोई निर्माण कार्य नहीं हो रहा है और जिन बोरियों को निर्माण कार्य के तथाकथित उद्देश्य के लिए वितरित किया गया था वे कई घरों की छतों पर खाली पाए गए। अब यह सवाल उठता है कि अचानक से ये ईंट के ढेर आधे कैसे हो गए? जिसका जवाब जाँच के बाद ही मिल सकेगा। पुलिस यह पता लगाने में जुट गई है कि आखिर क्यों इन ईंटों के हफ्ते भर पहले एकत्र किया गया था। पुलिस गाजियाबाद में स्थित उन ईंट भट्टों के मालिकों के संपर्क में है, जिनके पास हिंसा से एक हफ्ते पहले इन ईंटों का ऑर्डर मिला था।

गोली से अधिक घातक होती है गुलेल

वहीं ताहिर हुसैन के घर के पास की बात करें तो यहाँ पर पत्थरों की कई इंच मोटी परत बन चुकी थी। बताया जा रहा है कि नजारा कुछ ऐसा था, मानो नई सड़क के निर्माण से पहले पत्थरों को तोड़कर बिछाया गया हो। जिसकी वजह से सफाईकर्मियों को भी पत्थरों को हटाने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। ताहिर के घर के पास से ही निगमकर्मियों ने कई ट्रक रेत भी उठाया है। अधिकारी ने कहा कि दिल्ली में इससे पहले कभी इस तरह एक ही स्थान पर इतने पत्थरों का जखीरा देखने को नहीं मिला। जिन पत्थरों को उठाया गया, वे बहुत छोटे-छोटे टुकड़ों में मिले हैं। पत्थरों को देखकर ऐसा लग रहा था कि मानो किसी ने इन्हें मशीन से काटा हो।

मैक्सिमम तबाही के लिए हर 10-15 घरों के बाद एक छत पर लगी थी गुलेल

जैसे-जैसे दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की दिल्ली दंगों की जाँच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे बेहद चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। हिंसाग्रस्त इलाकों की जो तस्वीरें सामने आई हैं, वो चकित करने वाली हैं। उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दंगे में उपद्रवियों ने तरह-तरह के हथियारों का इस्तेमाल किया था, जिनमें सबसे बड़ा हथियार गुलेल रहा। कई इलाकों में भड़की हिंसा के दौरान गोली-बम से ज्यादा घातक गुलेल साबित हुई है। ये गुलेल छत, रिक्शे और अन्य जगहों पर रखकर इस्तेमाल किए गए। कई इलाकों की छतों पर गुलेल मिल रही है।

हिंसा की जाँच कर रही दिल्ली पुलिस अपराध शाखा की एसआईटी को हर 10-15 घरों के बाद एक घर की ऊँची छत पर गुलेल मिली है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जाँच के दौरान सैकड़ों की संख्या में गुलेल बरामद किया गया। सबसे ज्यादा गुलेल ओल्ड मुस्तफाबाद के घरों की छतों से बरामद किया गया। पुलिस का कहना है कि इन्हीं गुलेल की मदद से सबसे ज्यादा तबाही मचाई गई।

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