भगवान् के मंदिर और भगवान् को गार्ड ऑफ़ ऑनर दिया जाना

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–इस अध्ययन
Dr D K Garg
एक मित्र ने बताया की जगन्नाथ पुरी मंदिर में प्रतिदिन सुबह मंदिर के दरवाजे खुलने पर, भगवान जगन्नाथ की मूर्ति को गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाता है। इस सम्मान में मंदिर के सुरक्षा गार्ड भगवान जगन्नाथ को सलामी देते हैं और उनकी मूर्ति के सामने खड़े होकर सम्मान करते हैं। यह परंपरा ओडिशा के गजपति राजवंश के समय से चली आ रही है, जब भगवान जगन्नाथ को राज्य के राजा के रूप में माना जाता था। गार्ड ऑफ ऑनर देने की यह परंपरा भगवान जगन्नाथ के सम्मान और आदर को दर्शाती है।
मध्य प्रदेश का ओरछा का मंदिर — इस मंदिर में राम की पूजा एक राजा के रूप में की जाती है और वह भी एक महल में। हर दिन पांच बार गार्ड ऑफ ऑनर आयोजित किया जाता है, राजा की तरह पुलिसकर्मियों को मंदिर में गार्ड के रूप में नियुक्त किया जाता है। मंदिर में भगवान को दिया जाने वाला भोजन और अन्य सुविधाएं शाही भोजन हैं। प्रतिदिन भगवान राम को सशस्त्र सलामी दी जाती है।

इसके अतिरिक्त भारत में अनेको मंदिर है जहा मंदिर खुलने के बाद देवी या देवता की मूर्ति को गार्ड आफ ऑनर दिया जाता है —
१ माता वैष्णो देवी मंदिर, जम्मू कश्मीर: यहां प्रतिदिन सुबह मंदिर खुलने पर माता की मूर्ति को गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाता है।
२ माता मीनाक्षी अम्मन मंदिर, मदुरै, तमिलनाडु
3 माता कामाख्या देवी मंदिर, गुवाहाटी
४ मध्य प्रदेश में भी एक मंदिर है जहा पुलिस गार्ड आफ ऑनर देती है–माई हरदौल मंदिर, जालौन (मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित)
५ लेकिन सबसे प्रसिद्ध मंदिर है:–माता बिजासन मंदिर, ग्वालियर
माता बिजासन मंदिर में प्रतिदिन सुबह और शाम को पुलिस गार्ड ऑफ ऑनर देती है। यह परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है और माता बिजासन के सम्मान को दर्शाती है।
माता बिजासन कौन थी ?
माता बिजासन ग्वालियर की एक प्रसिद्ध देवी हैं, माता बिजासन के बारे में कई कथाएँ और कहानियाँ हैं। माता बिजासन का जन्म ग्वालियर के एक राजपरिवार में हुआ था। उनके पिता राजा बिजाय सिंह और माता रानी चंपावती थीं।
उन्होंने अपने जीवन में कई चुनौतियों का सामना किया और अपने परिवार और समाज के लिए बलिदान दिया। उन्होंने अपने पति की मृत्यु के बाद अपने बेटे की परवरिश की और उसे राजा बनाया।माता बिजासन की मृत्यु एक रहस्यमय तरीके से हुई थी। कहा जाता है कि उन्होंने अपने जीवन के अंत में तपस्या की और अपने शरीर को त्याग दिया।
माता बिजासन मंदिर किसने बनवाया ?
मंदिर का निर्माण महाराजा मान सिंह तोमर ने 18वीं शताब्दी में करवाया था। महाराजा मान सिंह तोमर ग्वालियर के एक शक्तिशाली राजा थे, जिन्होंने अपनी माता बिजासन की याद में इस मंदिर का निर्माण करवाया था।
मंदिर की सुरक्षा के लिए विशेष पुलिस बल तैनात है।मंदिर में पुलिस गार्ड ऑफ ऑनर देती है, जो माता बिजासन के सम्मान को दर्शाता है।
भारत में ऐसे अनेको मंदिर है जहा मूर्ति को सलामी देने का प्रचलन है। हालांकि, कुछ प्रमुख हिंदू मंदिरों में सुरक्षा और सम्मान के लिए गार्ड की नियुक्ति की जाती है, जो मंदिर के प्रवेश द्वार पर खड़े रहते हैं और दर्शनार्थियों का स्वागत करते हैं। यह प्रथा विभिन्न मंदिरों में अलग-अलग तरीकों से पाई जा सकती है।
भारत में कई हिंदू मंदिर राजाओं द्वारा स्थापित किए गए हैं। और उनकी या उनके किसी वंशज की मुर्तिया भी वहा है और इन मूर्तियों को नियमित रूप भोग लगाया जाता है और गार्ड ऑफ़ हॉनर भी दिया जाता है। यहाँ कुछ प्रमुख उदाहरण हैं:
• यहाँ कुछ प्रमुख मंदिरों की सूची दी गई है:

राजस्थान

  1. महाराणा प्रताप मंदिर, उदयपुर
  2. रानी पद्मिनी मंदिर, चित्तौड़गढ़
  3. महाराजा सूरजमल मंदिर, भरतपुर
  4. रानी राजबाई मंदिर, जयपुर
  5. महाराजा मानसिंह मंदिर, अजमेर

मध्य प्रदेश

  1. महाराजा शिवाजी मंदिर, उज्जैन
  2. रानी दुर्गावती मंदिर, जबलपुर
  3. महाराजा भोज मंदिर, भोपाल
  4. रानी कमलापति मंदिर, ग्वालियर
  5. महाराणा प्रताप मंदिर, नीमच

गुजरात

  1. महाराणा प्रताप मंदिर, साबरकांठा
  2. रानी रूपमती मंदिर, मिर्जापुर
  3. महाराजा भीमदेव मंदिर, अन्हिलवाड़ पाटण
  4. रानी मुगलानी मंदिर, पाटण
  5. महाराजा खेंगारजी मंदिर, कच्छ

ओडिसा

  1. महाराजा प्रतापरुद्र देव मंदिर, पुरी
  2. रानी चंद्रावती मंदिर, भुवनेश्वर
  3. महाराजा मुकुंद देव मंदिर, कोनार्क
  4. रानी दुर्गावती मंदिर, संबलपुर
  5. महाराजा पुरुषोत्तम देव मंदिर, पुरी

महाराष्ट्र

  1. महाराजा शिवाजी मंदिर, रायगड़
  2. रानी ताराबाई मंदिर, कोल्हापुर
  3. महाराजा शाहू मंदिर, कोल्हापुर
  4. रानी येशुबाई मंदिर, सातारा
  5. महाराजा प्रतापराव मंदिर, विशालगढ़

उत्तर प्रदेश

  1. महाराजा सूरजमल मंदिर, भरतपुर
  2. रानी लक्ष्मी बाई मंदिर, झांसी
  3. महाराजा वाजिद अली शाह मंदिर, लखनऊ
  4. रानी हृदय कुंवर मंदिर, वाराणसी
  5. महाराजा छत्रसाल मंदिर, महोबा

यह सूची अधूरी है और इसमें कई अन्य मंदिर शामिल हो सकते हैं।

गार्ड ऑफ़ ऑनर का विश्लेषण ::–पहला प्रश्न तो यही है की क्या दुनिआ के रचयिता जिसने विशाल समुन्द्र ,विशाल पर्वत ,सूर्य ,चन्द्रमा ,अनगिनत तारे ,वनस्पतिया ,जंगल ,नदिया सभी का निर्माण किया ,उसकी आराधना को मजाक और मनोरंजन का साधन बना दिया। क्या ईश्वर को इस दिखावे की जरुरत है ?यदि है ,तो सबसे विशाल गार्ड ऑफ़ ऑनर तो तोपों की सलामी द्वारा दुसरे देश के राष्ट्रपति को ,या देश के राष्ट्रपति की अति सम्मान जनक रूप से दिया जाता है ,यह अंधविस्वास और ईश्वर के प्रति संकुचित मानसिकता का प्रतीक है।
२ ताला खुलने के बाद पुजारी मूर्ति को कपडे पहनाता है ,भोग लगाता है ,लेकिन पाषाण की मूर्ति में फिर भी एंड्रिया जाग्रत नहीं होती। क्या इस मूर्ति को ये गार्ड ऑफ़ ऑनर समझ आता है ?
३ मेरे एक मित्र का कहना है की गार्ड ऑफ़ ऑनर के नाम पर मंदिर की मार्केटिंग की जाती है ,भक्त कुछ देर खड़े रहते है ,मोबाइल से विडिओ बनाते है ,पैसा चढ़ाते है और वी आयी पी भक्त मूर्ति के पास खड़े होकर अपनी पोजीशन के अहंकार का आनंद लेते है।
वास्तविकता क्या है ? जैसा की आप जानते है की अधिकांश विशाल मंदिरो की स्थापना राज घरानो द्वारा की गयी। उदहारण के तौर पर हम माता बिजासन का मंदिर लेते है जिसका निर्माण महाराजा मान सिंह तोमर ,ग्वालियर ने अपनी माता बिजासन की याद में इस मंदिर का निर्माण करवाया था। अन्य मंदिर भी किसी ना किसी प्रकार से राज परिवारों की दैन है। क्योकि राज पथ से वैराग्य होने पर राजा महाराज या उनके परिवार का कोई प्रतिष्ठित सदस्य वानप्रस्थ ,संन्यास आदि का समय अपने राजमहल से दूर ध्यान ,धारणा ,समाधि और स्वाध्याय आदि में गुजारता था। इसके लिए ऐसा स्थान चुनते थे जहा प्रचुर मात्रा में वनस्पतिया ,जल ,आहार और उनकी सुरक्षा भी हो।
और उनकी सुरक्षा के लिए सुरक्षाकर्मी भी होते थे जो राजा,राजमाता आदि जो भी हो उनको सलामी यानि गार्ड ऑफ़ हॉनर देते थे। और ये परम्परा इस प्रकार के सभी मंदिरो में आज भी है। वर्तमान उदहारण लेते है – जैसे मोदी जी ध्यान के लिए बद्रीनाथ के पहाड़ की गुफा में गए आज भी रिटायरमेंट के बाद बहुत से धर्मप्रेमी लोग कही दूर चले जाते है।
बाद में उनकी मृत्यु के बाद ,वहा मूर्ति पूजा सुरु हुई होगी। क्योकि गुलामी काल में देश में अंधविस्वास और पाखंड को खूब फैलाया गया।
अब सत्य का निर्णय आपके हाथ में है।

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