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आतंकवाद

हमें आतंक से भक्ति नहीं शक्ति बचाएगी !

ऐसा लगता है कि सेकुलर विचारों के दुष्प्रभाव के कारणों से हिन्दुओं में वैदिक सनातन धर्म पर निष्ठां उठती जा रही है . और वह अपने लाभ की आशा में मृतक व्यक्ति या उसकी लाश की पूजा करने लगे हैं , इसका उदाहरण शिरडी का साईँ बाबा है . इसके अंधभक्तों का दावा है ,कि साईं संत , सिद्ध पुरष , चमत्कारी , यहां तक भगवान का साक्षात अवतार है , इसकी पूजा से असाध्य रोग मिट जाते हैं , निर्धन धन कुबेर बन जाते हैं , निःसंतान की औलाद हो जाती है , साईं अपने भक्तों को हरेक संकट से बचा कर निर्भय कर सकता है . ऐसी ही झूठी सुनी सुनाई बातों को सही मानकर हिन्दू भेड़ों की तरह साईँ के भक्त बन जाते है . हम इन साईँ के चेलों से पूछना चाहते हैं क़ि

1 -यदि साईं की कृपा से हर रोग ठीक हो जाता है ,तो शिर्डी के सभी अस्पताल बंद क्यों नहीं कर दिए जाते ?
2-यदि साईं की कृपा से धन मिलता है ,तो शिर्डी में इतने भिखारी क्यों है ? या शिर्डी के सभी लोग करोड़पति क्यों नहीं है ?
3-यदि साईं की कृपा से संतान पैदा होती है ,तो शिर्डी और आसपास के क्षेत्र में एक भी निस्संतान नहीं होना चाहिए
4-साईं के चेले यह भी दावा करते हैं कि साईँ अपने भक्तों को हर प्रकार से संकटों से बचा कर निर्भय बना देता है , लेकिन उनके इस झूठ का भंडा इण्डिया टू डे ( India to day ) की दिनांक 9 नवम्बर 2014 की इस खबर ने फोड़ दिया , खबर के अनुसार वर्त्तमान में शिरडी के मंदिर और उसपर चढ़ावा के रूप में प्राप्त संपत्ति की रक्षा के लिए 730 प्राइवेट सुरक्षा गार्ड लगाए गए हैं . इसके अलावा महाराष्ट्र सरकार की तरफ से 50 पुलिस वाले नियुक्त किये गए हैं , जो छुपे हुए बम को खोज कर नष्ट करने में माहिर हैं . और मंदिर की रक्षा के लिए नियुक्त हैं , फिर भी मंदिर और उसकी संपत्ति की सुरक्षा के लिए हमेशा खतरा बना रहता है , ऐसे ही जब आतंकवादियों ने शिर्डी के मंदिर को बम से उड़ाने का धमकी भरा पत्र भेजा ,तो उसे पढ़ते ही साईँ भक्त भयभीत होकर सरकार से सुरक्षा के लिए प्रार्थना करने लगे . यह बात इस विडिओ से साबित होती है
TERROR ATTACK THREAT ON SHIRDI SAI TEMPLE

TERROR ATTACK THREAT ON SHIRDI SAI TEMPLE

यह बड़े ही आश्चर्य की बात है कि जिस साईँ बाबा के लाखों भक्त हैं वह गिने चुने आतंकियों की धमकी से सरकार के पैर पकड़ने लगे , क्या उनका साईँ बाबा अपने चमत्कार से आतंकवादियों का नाश नहीं कर सकता ?

इस से सिद्ध होता है कि ऐसी ही अंध भक्ति के कारण ही हिन्दू धर्म और हिन्दुओं का काफी नुकसान हुआ है , और बहुसंख्यक होने पर भी मुसलमान हिंदुओं पर अत्याचार करते आये हैं , जैसा की औरंगजेब के समकालीन हिंदी कवि भूषण ने अपनी किताब “शिवा बावनी ” में लिखा है ,

2- हिन्दुओं पर अत्याचार

भूषण रीतिकाल के ऐसे कवि हैं जिन्होंने रीतिकालीन शृंगार भावना के स्थान पर वीर रस की कविता लिखी। इन्होंने महाराजा शिवाजी और बुन्देला वीर छत्रसाल की प्रशंसा में काव्य रचना करते हुए तीन प्रमुख ग्रन्थ लिखे- शिवराज भूषण, शिवा बावनी और छत्रशाल दशक। शिवराज भूषण एक विशालकाय ग्रन्थ है जिसमें 385 पद्य हैं। शिवा बावनी में 52 कवितों में शिवाजी के शौर्य, पराक्रम आदि का ओजपूर्ण वर्णन है जबकि छत्रशाल दशक में केवल दस कवितों के अन्दर बुन्देला वीर छत्रसाल के शौर्य का वर्णन किया गया है।

“.देवल गिरावते फिरावते निशान अली,
ऐसे डूबे राव राने सबै गए लबकी।
गौरा गनपति आप औरन को देत ताप ,
अपने मुकाम सब मारि गए दबकी।।
पीर पयगम्बरा दिगम्बरा दिखाई देत,
सिद्ध की सिधाई गई, रही बात रब की।
कासी हूँ की कला गई मथुरा मसीत भई
शिवाजी न होतो तो सुनति होती सबकी।।”

उस समय हिन्दुओं की ऐसी दुर्दशा इस लिए हो गयी थी ,क्योंकि बड़े बड़े राजा हिन्दू होने के बावजूद सेकुलर हो गए थे ,और मुसलमान बादशाह के विरुद्ध मिलकर लड़ने की जगह उसका साथ देने को अधर्म नहीं मानते थे , जैसा आज के सेकुलर कर रहे हैं ,

3-शिवाजी हिन्दू धर्म के रक्षक
महाराज शिवाजी की प्रशंसा कवि भूषण ने इन शब्दों में की है ,
“बेद राखे बिदित, पुरान राखे सारयुत,
रामनाम राख्यो अति रसना सुघर मैं।
हिंदुन की चोटी, रोटी राखी हैं सिपाहिन की,
कांधे मैं जनेऊ राख्यो, माला राखी गर मैं॥
मीडि राखे मुगल, मरोडि राखे पातसाह,
बैरी पीसि राखे, बरदान राख्यो कर मैं।
राजन की हद्द राखी, तेग-बल सिवराज,
देव राखे देवल, स्वधर्म राख्यो घर मैं॥”

इन दौनों कविताओं को पढ़कर यही निष्कर्ष निकलता है कि जबतक हिन्दू खुद अपने शत्रुओं नष्ट करेंगे , कोई देवी ,देवता या साईँ हिन्दुओं की रक्षा नहीं कर सकेगा , धर्म और देश की रक्षा तलवार से ही हो सकती है , जैसे शिवाजी ने किया था , और भूषण ने भी कहा है ,
“राजन की हद्द राखी, तेग-बल सिवराज,
देव राखे देवल, स्वधर्म राख्यो घर मैं॥

इसलिए यदि हिन्दू अपना अहंकार , मतभेद , और स्वार्थ त्याग कर एकजुट होकर अपने धर्म और देश के शत्रुओं का मुकाबला वचन . धन और तन से करने का निर्णय कर लें ,तो उसी दिन से आतंकवादी हिन्दुओं से डरने लगेंगे . जैसे को तैसा यही शिवाजी की नीति थी
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brijnandan Sharma

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