हमें परमात्मा की प्रशंसा और महिमा किस प्रकार करनी चाहिए?

Screenshot_20240716_215235_WhatsApp

परमात्मा की प्रशंसा और महिमागान के क्या परिणाम होते हैं?
परमात्मा की प्रशंसा और महिमा के लिए मूल लक्षण क्या हैं?
गौरवशाली सम्पदा क्या है?

तं त्वा वयं पतिमग्ने रयीणां प्र शंसामो मतिभिर्गोतमासः।
आशुं न वाजम्भरं मर्जयन्तः प्रातर्मक्षू धियावसुर्जगम्यात् ।।
ऋग्वेद मन्त्र 1.60.5 (कुल मन्त्र 694)

(तम्) उसको (त्वा) आप (वयम्) हम (पतिम्) स्वामी और संरक्षक (अग्ने) सर्वोच्च ऊर्जा, परमात्मा (रयीणाम्) सभी सम्पदाओं का (प्रशंसामः) प्रशंसा तथा महिमा (मतिभिः) बुद्धि के साथ, विद्वानों के साथ
(गोतमासः) हमारी इन्द्रियों को पवित्र और तीव्र करके (आशुम्) अश्व (न) जैसे (वाजम्भरम्) हमें शक्ति और गति से पूर्ण करता है (मर्जयन्तः) हमें पवित्र करता है (प्रातः) प्रातःकाल में (मक्षु) अत्यन्त शीघ्र (धियावसुः) दिव्य ज्ञान में जीने वाले लोग, विद्वत् कार्यों से प्राप्त सम्पदा (जगम्यात्) प्राप्त हो।

व्याख्या:-
हमें परमात्मा की प्रशंसा और महिमा किस प्रकार करनी चाहिए?
परमात्मा की प्रशंसा और महिमागान के क्या परिणाम होते हैं?

सर्वोच्च ऊर्जा, परमात्मा, सभी सम्पदाओं का स्वामी और संरक्षक, उस आपकी प्रशंसा और महिमा अपनी इन्द्रियों को शुद्ध करके और तीव्र करके अपनी बुद्धियों के साथ और विद्वानों के साथ करते हैं। शुद्धता से आप हमारे अन्दर शक्ति और अश्वों जैसी गति परिपूर्ण करते हो। हम प्रातःकाल शीघ्रता के साथ अपने बौद्धिक कार्यों से तथा दिव्य ज्ञान में जीने वाले लोगों से सम्पदा प्राप्त करें।

जीवन में सार्थकता: –
परमात्मा की प्रशंसा और महिमा के लिए मूल लक्षण क्या हैं?
गौरवशाली सम्पदा क्या है?

स्वयं को शुद्ध करना और अपनी इन्द्रियों की चमक बढ़ाना, परमात्मा की प्रशंसा और महिमा के लिए मूल लक्षण हैं:- अशुद्ध लोग परमात्मा के साथ सम्पर्क नहीं बना सकते। अशुद्ध लोग तो अच्छे स्वास्थ्य अर्थात् शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य का आनन्द भी नहीं ले पाते।
अच्छे स्वास्थ्य के बिना या सम्पदा प्राप्त ही नहीं होती या सम्पदा का कोई आनन्द नहीं मिलता। सम्पदा केवल प्रकृति की भौतिक वस्तुएं ही नहीं हैं। इसमें मानसिक और आध्यात्मिक उपलब्धियाँ भी शामिल हैं। सभी सम्पदाएं परमात्मा के ही कारण हैं और केवल इसी चेतन सम्बद्धता के साथ हमारी सम्पत्ति गौरवशाली बनती है जो सबके कल्याण के लिए लाभदायक होती है।


अपने आध्यात्मिक दायित्व को समझें

आप वैदिक ज्ञान का नियमित स्वाध्याय कर रहे हैं, आपका यह आध्यात्मिक दायित्व बनता है कि इस ज्ञान को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचायें जिससे उन्हें भी नियमित रूप से वेद स्वाध्याय की प्रेरणा प्राप्त हो। वैदिक विवेक किसी एक विशेष मत, पंथ या समुदाय के लिए सीमित नहीं है। वेद में मानवता के उत्थान के लिए समस्त सत्य विज्ञान समाहित है।

यदि कोई महानुभाव पवित्र वेद स्वाध्याय एवं अनुसंधान कार्यक्रम से जुड़ना चाहते हैं तो वे अपना नाम, स्थान, वाट्सएप नम्बर तथा ईमेल 0091 9968357171 पर वाट्सएप या टेलीग्राम के माध्यम से लिखें।

अपने फोन मैं प्लेस्टोर से टेलीग्राम डाउनलोड करें जिससे आप पूर्व मंत्रो को भी प्राप्त कर सके।
https://t.me/vedas4

आईये! ब्रह्माण्ड की सर्वोच्च शक्ति परमात्मा के साथ दिव्य एकता की यात्रा पर आगे बढ़ें। हम समस्त पवित्र आत्माओं के लिए परमात्मा के इस सर्वोच्च ज्ञान की महान यात्रा के लिए शुभकामनाएँ देते हैं।

टीम
पवित्र वेद स्वाध्याय एवं अनुसंधान कार्यक्रम
द वैदिक टेंपल, मराठा हल्ली, बेंगलुरू, कर्नाटक
वाट्सएप नम्बर-0091 9968357171

Comment:

Kuponbet Giriş
betgaranti giriş
Teknik Seo
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
savoybetting giriş
ikimisli giriş
romabet giriş
betebet giriş
betpipo giriş
limanbet giriş
betebet giriş
betnano giriş
betebet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
ikimisli giriş
rekorbet giriş
betlike giriş
ikimisli giriş
romabet giriş
romabet giriş
betpipo giriş
betpipo giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
romabet giriş
romabet giriş
vaycasino giriş
nesinecasino giriş
nesinecasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpipo giriş
Betgaranti
betebet giriş
betebet giriş
nesinecasino giriş
savoybetting giriş
savoybetting giriş
rekorbet giriş