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धर्म-अध्यात्म

आत्मा के कल्याण की कौन इच्छा करता है?

आत्मा के कल्याण की कौन इच्छा करता है?
कौन हमारे मन में निवास करता है?
हमारी सम्पदा का स्वामी कौन है?
कौन परमात्मा को हृदय में धारण करता है?
किसकी सम्पदा परमात्मा की महिमा के साथ चमकती है?

उशिक्पावको वसुर्मानुषेषु वरेण्यो होताधायि विक्षु।
दमूना गृहपतिर्दम आँ अग्निर्भुवद्रयिपती रयीणाम् ।।
ऋग्वेद मन्त्र 1.60.4 (कुल मन्त्र 693)

(उशिक्) आत्मा के कल्याण की सच्ची कामना करता है (पावकः) अपने जीवन को पवित्र करता है (वसु) अपने आवास का प्रबन्ध करता है (मानुषेषु) मननशील मनुष्यों में (वरेण्यः) ग्रहण करने योग्य (होता) सभी पदार्थों को लाने वाला और देने वाला (अधायि) हृदय स्थान में (विक्षु) लोगों का (दमूनाः) सबके अन्दर मन रखने वाला (गृहपतिः) इस घर का संरक्षक (दमे) इस घर में (आ) अभवत् से पूर्व लगाकर) (अग्निः) सर्वोच्च ऊर्जा, परमात्मा (अभुवत्) आ भुवत्) रहता है (रयिपतिः) समस्त सम्पदाओं का स्वामी (रयीणाम्) सम्पदा की चमक बढ़ाता है।

व्याख्या:-
आत्मा के कल्याण की कौन इच्छा करता है?
कौन हमारे मन में निवास करता है?
हमारी सम्पदा का स्वामी कौन है?

परमात्मा सत्य रूप में आत्मा के कल्याण की इच्छा करता है, उसके लिए आवास का प्रबन्ध करता है और उसके जीवन को शुद्ध करता है। लोगों के लिए सब पदार्थों को लाने वाला और देने वाला मननशील मनुष्यों के हृदय आकाश में धारण करने के योग्य है। वह सब शरीरों के मन में है। सर्वोच्च ऊर्जा, परमात्मा इस घर में रहता है। वह सारी सम्पदाओं का स्वामी है और सभी सम्पदाओं की चमक बनाता है।

जीवन में सार्थकता: –
कौन परमात्मा को हृदय में धारण करता है?
किसकी सम्पदा परमात्मा की महिमा के साथ चमकती है?

परमात्मा सर्वविद्यमान है, अतः हमारे शरीर में भी विद्यमान है। वह हमारे शरीर और प्रत्येक पदार्थ का दाता है। परन्तु केवल मननशील मनुष्य ही अपने हृदय आकाश में उसे स्वीकार करते हैं। ऐसे महान् आत्माओं के लिए उनका मन ही परमात्मा है जो प्रत्येक कार्य के लिए उन्हें प्रेरित करता है और शक्ति प्रदान करता है। इस चेतना के साथ, ऐसे लोगों की सम्पदा परमात्मा की महिमा के साथ चमकती है।


अपने आध्यात्मिक दायित्व को समझें

आप वैदिक ज्ञान का नियमित स्वाध्याय कर रहे हैं, आपका यह आध्यात्मिक दायित्व बनता है कि इस ज्ञान को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचायें जिससे उन्हें भी नियमित रूप से वेद स्वाध्याय की प्रेरणा प्राप्त हो। वैदिक विवेक किसी एक विशेष मत, पंथ या समुदाय के लिए सीमित नहीं है। वेद में मानवता के उत्थान के लिए समस्त सत्य विज्ञान समाहित है।

आईये! ब्रह्माण्ड की सर्वोच्च शक्ति परमात्मा के साथ दिव्य एकता की यात्रा पर आगे बढ़ें। हम समस्त पवित्र आत्माओं के लिए परमात्मा के इस सर्वोच्च ज्ञान की महान यात्रा के लिए शुभकामनाएँ देते हैं।

टीम
पवित्र वेद स्वाध्याय एवं अनुसंधान कार्यक्रम
द वैदिक टेंपल, मराठा हल्ली, बेंगलुरू, कर्नाटक
वाट्सएप नम्बर-0091 9968357171

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