अब भारत को विभिन्न क्षेत्रों में अपने सूचकांक तैयार करना चाहिए

images (2)

वैश्विक स्तर पर विभिन्न देशों की भिन्न भिन्न क्षेत्रों में रेटिंग तय करने की दृष्टि से वित्तीय एवं विशिष्ट संस्थानों द्वारा सूचकांक तैयार किए जाते हैं। हाल ही के समय में इन विदेशी संस्थानों द्वारा जारी किए गए कई सूचकांकों में भारत की स्थिति को संभवत जान बूझकर गल्त दर्शाया गया है। इन सूचकांकों में पाकिस्तान, अफगानिस्तान एवं अफ्रीका के गरीब देशों की स्थिति को भारत से बेहतर बताया गया है। उदाहरण के लिए अभी हाल ही में पश्चिमी देशों द्वारा जारी किए गए तीन सूचकांकों की स्थिति देखिए। सबसे पहिले उदार (लिबरल) लोकतंत्र सूचकांक में भारत की रैकिंग को 104 बताया गया है और भारत के ऊपर निजेर देश को बताया गया है। इसी प्रकार, आनंद (हैपीनेस) सूचकांक में भी भारत का स्थान 126वां बताया गया है जबकि पाकिस्तान को 108वां स्थान मिला है, जहां अत्यधिक मुद्रा स्फीति के चलते वहां के नागरिक अत्यधिक त्रस्त हैं। एक अन्य, प्रेस की स्वतंत्रता नामक सूचकांक में भारत को 161वां स्थान मिला है जबकि इस सूचकांक में कुल मिलाकर 180 देशों को शामिल किया गया है और अफगानिस्तान को 152वां स्थान दिया गया है, अर्थात इस सर्वे के अनुसार, अफगानिस्तान में प्रेस की स्वतंत्रता भारत की तुलना में अच्छी पाई गई है। पश्चिमी देशों में स्थिति इन संस्थानों द्वारा इस प्रकार के सूचकांक तैयार किए जाकर पूरे विश्व को भ्रमित किए जाने का प्रयास हो रहा है।

इसी प्रकार, भारत में हाल ही में सम्पन्न हुए लोक सभा चुनावों पर भी पश्चिमी देशों ने कई प्रकार के सवाल खड़े करने के प्रयास किए थे। जैसे, इस भीषण गर्मी के मौसम में चुनाव क्यों कराए गए हैं, जिससे सामान्यजन वोट डालने के लिए घरों से बाहर ही नहीं निकले, ईवीएम मशीन में कोई खराबी तो नहीं है, आदि। परंतु, भारतीय मतदाताओं ने इन लोक सभा चुनावों में भारी संख्या में भाग लेकर पश्चिमी देशों को करारा जवाब दिया है। न ही, ईवीएम मशीन में किसी प्रकार की गड़बड़ी पाई गई और न ही गर्मी का प्रभाव चुनावों पर पड़ा। हालांकि सत्ताधारी दल को पिछले चुनाव की तुलना में कुछ कम स्थान जरूर प्राप्त हुए हैं परंतु देश में किसी भी प्रकार की कोई घटना घटित नहीं हुई है। विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में चुनाव सामान्यतः शांति के साथ सम्पन्न हो गए। साथ ही, विपक्षी दलों को पिछले चुनाव की तुलना में कुछ अधिक स्थान मिले हैं और उन्होंने भी चुनाव के परिणामों को स्वीकार कर लिया है। चुनाव की प्रक्रिया पर कोई सवाल खड़ा नहीं किया गया है। इस सबके बावजूद पश्चिमी देशों ने पश्चिमी लोकतंत्र सूचकांक में वर्ष 2014 में भारत को 27वां स्थान दिया था और वर्ष 2023 में भारत की रैंकिंग नीचे गिराकर 41वें स्थान पर बताई गई है। जबकि वास्तव में तो इस बीच देश में लोकतंत्र अधिक मजबूत ही हुआ है, परंतु पश्चिमी देशों द्वारा भारतीय लोकतंत्र को ही जैसे खतरे में बताया जा रहा है और एक तरह से भारतीय लोकतंत्र पर ही सवाल खड़े कर दिए गए हैं। दरअसल पश्चिमी देशों में कुछ शक्तियां भारत के हितों के विरुद्ध कार्य कर रही हैं एवं ये ताकतें विभिन्न सूचकांक तैयार करने वाली संस्थाओं को प्रभावित करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़तीं हैं।

कुछ समय पूर्व एक अंतरराष्ट्रीय संस्थान ने वैश्विक भुखमरी सूचकांक जारी किया था। इस सूचकांक में यह बताया गया था कि भारत की तुलना में श्रीलंका, म्यांमार, पाकिस्तान, एथीयोपिया, नेपाल, भूटान आदि देशों में भुखमरी की स्थिति बेहतर है। अर्थात, सर्वे में शामिल किए गए 121 देशों की सूची में श्रीलंका का स्थान 64वां, म्यांमार का 71वां, बांग्लादेश का 84वां, पाकिस्तान का 99वां, एथीयोपिया का 104वां एवं भारत का 107वां स्थान बताया गया था। जबकि पूरा विश्व जानता है कि व श्रीलंका, पाकिस्तान एवं म्यांमार जैसे देशों में खाद्य पदार्थों की भारी कमी है जिसके चलते इन देशों के नागरिकों के लिए दो जून की रोटी जुटाना भी बहुत मुश्किल हो रहा है। जबकि, भारत कई देशों को आज खाद्य सामग्री उपलब्ध करा रहा है। फिर किस प्रकार उक्त सूचकांक बनाकर वैश्विक स्तर पर जारी किए जा रहे हैं। ऐसा आभास हो रहा है कि भारत की आर्थिक तरक्की को विश्व के कई देश अब सहन नहीं कर पा रहे हैं एवं भारत के बारे में इस प्रकार के सूचकांक जारी कर भारत की साख को वैश्विक स्तर पर प्रभावित किए जाने का प्रयास किया जा रहा है।

युद्ध की विभीषिका झेल रहे एथीयोपिया में नागरिक अपनी भूख मिटाने के लिए घास जैसे भारी पदार्थों को खाकर अपना जीवन गुजारने को मजबूर हैं। इन विपरीत परिस्थितियों के बीच जीवन यापन करने वाले नागरिकों को भुखमरी के मामले में भारत के नागरिकों से बेहतर स्थिति में बताया गया है। वहीं दूसरी ओर भारत में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के अंतर्गत 80 करोड़ नागरिकों को केंद्र सरकार द्वारा प्रतिमाह 5 किलो मुफ्त अनाज उपलब्ध कराया जा रहा है ताकि इन लोगों को खाने पीने सम्बंधी किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं हो। फिर भी भारत के नागरिकों को भुखमरी सूचकांक में ईथीयोपिया के नागरिकों की तुलना में इतना नीचे बताया गया है। अब कौन इस प्रकार के सूचकांकों पर विश्वास करेगा। यह भी बताया जा रहा है कि इस सूचकांक को आंकने के लिए भारत के 140 करोड़ नागरिकों में से केवल 3000 नागरिकों को ही इस सर्वे में शामिल किया गया था। इस प्रकार सर्वे का सैम्पल बनाते समय भारत जैसे विशाल देश के लिए अपर्याप्त संख्या का उपयोग किया गया है।

वैश्विक स्तर पर विभिन्न देशों की सावरेन क्रेडिट रेटिंग पर कार्य कर रही संस्था स्टैंडर्ड एंड पूअर ने हाल ही में भारतीय अर्थव्यवस्था का आंकलन करते हुए भारत के सम्बंध में अपने दृष्टिकोण को सकारात्मक किया है एवं कहा है कि वह भारत की सावरेन क्रेडिट रेटिंग को अपग्रेड करने के उद्देश्य से भारत के आर्थिक विकास सम्बंधी विभिन्न पैमानों का, आधारभूत ढांचे को विकसित करने एवं भारत के राजकोषीय घाटे को कम करने से सम्बंधित आंकड़ों एवं प्रयासों का गम्भीरता से लगातार अध्ययन एवं विश्लेषण कर रहा है। आगे आने वाले दो वर्षों के दौरान यदि उक्त तीनों क्षेत्रों में लगातार सुधार दिखाई देता है तो भारत की सावरेन क्रेडिट रेटिंग को अपग्रेड किया जा सकता है। वर्तमान में भारत की सावरेन क्रेडिट रेटिंग BBB- है, जो निवेश के लिए सबसे कम रेटिंग की श्रेणी में गिनी जाती है।

किसी भी देश की सावरेन क्रेडिट रेटिंग को यदि अपग्रेड किया जाता है तो इससे उस देश में विदेशी निवेश बढ़ने लगते हैं क्योंकि निवेशकों का इन देशों में पूंजी निवेश तुलनात्मक रूप से सुरक्षित माना जाता है। साथ ही, अच्छी सावरेन क्रेडिट रेटिंग प्राप्त देशों की कम्पनियों को अन्य देशों में पूंजी उगाहना न केवल आसान होता है बल्कि इस प्रकार लिए जाने वाले ऋण पर ब्याज की राशि भी कम देनी होती है। किसी भी देश की जितनी अच्छी सावरेन क्रेडिट रेटिंग होती है उस देश की कम्पनियों को कम से कम ब्याज दरों पर ऋण उगाहने में आसानी होती है। परंतु, भारत की सावरेन क्रेडिट रेटिंग को अपग्रेड करने के लिए स्टैंडर्ड एंड पूअर को दो वर्षों का समय क्यों चाहिए? जब इन समस्त क्षेत्रों में लगातार सुधार होते साफ दिख रहा है।

साथ ही, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई विदेशी संस्थान (विश्व बैंक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, आदि) आगे आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक प्रगति को लेकर बहुत उत्साहित हैं एवं आर्थिक प्रगति के साथ साथ राजकोषीय घाटे को कम करने हेतु भारत सरकार द्वारा लगातार किए जा रहे प्रयासों की भी सराहना करते रहते हैं। फिर भी, स्टैंडर्ड एंड पूअर को भारत की सावरेन क्रेडिट रेटिंग को अपग्रेड करने के लिय दो वर्षों का अतिरिक्त समय चाहिए।

वैश्विक पटल पर पश्चिमी देशों के विभिन्न संस्थानों द्वारा भारत के प्रति ईर्ष्या का भाव रखने के चलते, अब समय आ गया है कि भारत विभिन्न पैमानों पर अपनी रेटिंग तय करने के लिए अपने सूचकांक विकसित करने पर विचार करे क्योंकि वैश्विक स्तर पर पश्चिमी देशों द्वारा जितने भी सूचकांक तैयार किए जा रहे हैं उसमें भारत के संदर्भ में वस्तुस्थिति का सही वर्णन नहीं किया जा रहा है।

प्रहलाद सबनानी

सेवा निवृत्त उप महाप्रबंधक

Comment:

Latest Posts

hititbet giriş
betgaranti giriş
hititbet giriş
hititbet güncel giriş
hititbet giriş
Hititbet Giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
tuzla cilt bakım merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet
hititbet giriş
Tuzla Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Tuzla İpek Kirpik
hititbet giriş
hititbet
betgaranti giriş
Hititbet Giriş
Hititbet
Hititbet Güncel Giriş
Hititbet Yeni Giriş
Hititbet Resmi Gİriş
betyap giriş
hititbet giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
hititbet
hititbet giriş
hititbet giriş
betgaranti giriş
betgaranti
betgaranti güncel giriş
xslot giriş
xslot giriş
xslot giriş
xslot giriş
betkom giriş
hitbet giriş
hitbet giriş
betbox giriş
betbox giriş
betpas giriş
betpas giriş
betkom giriş
betpas giriş
betpark giriş
betpark giriş
hititbet
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
hititbet
betgaranti giriş
betgaranti güncel giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betgaranti güncel giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
xslot giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
vdcasino
vdcasino
vdcasino
vdcasino
hititbet giriş
kolaybet giriş
betkom giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
meritbet giriş
meritbet giriş
meritbet giriş
meritbet giriş
betnano
betnano
betnano