क्या भारत कभी विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन पाएगा

images (59)

प्रसिद्ध अर्थशास्त्री एवं इतिहासकार श्री एंग्स मेडिसिन के अनुसार वर्ष 1820 तक भारत विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था, 1820 आते आते चीन भारत से आगे निकल गया था। 1820 से 1870 के बीच चीन एवं भारत विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में पूरे विश्व में सबसे आगे थे। वर्ष 1870 से 1900 के बीच ब्रिटेन विश्व की सबसे तेज गति से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्था बन गया परंतु ब्रिटेन पर यह ताज अधिक समय तक नहीं टिक सका क्योंकि इसके तुरंत बाद अमेरिका विश्व में सबसे तेज गति से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्था बन गया था। इसके बाद तो आर्थिक प्रगति के मामले में अमेरिका एवं यूरोपीयन देश लगातार आगे बढ़ते रहे, विकसित अर्थव्यवस्थाएं बने और एशिया के देशों (विशेष रूप से भारत एवं चीन) का वर्चस्व वैश्विक अर्थव्यवस्था में लगभग समाप्त सा हो गया था। परंतु, अब एक बार पुनः समय चक्र बदल रहा है एवं अमेरिका एवं यूरोपीयन देशों की अर्थव्यस्थाएं आर्थिक विकास के मामले में ढलान पर दिखाई दे रही हैं एवं एशिया के देश, विशेष रूप से भारत एवं चीन, पुनः तेज गति से आर्थिक प्रगति करते हुए वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपना दबदबा कायम करते नजर आ रहे हैं।

आज अमेरिकी अर्थव्यस्था का आकार लगभग 25 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर का है और चीन की अर्थव्यवस्था का आकार लगभग 18 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर का है। ऐसी सम्भावना व्यक्त की जा रही है कि वर्ष 2035 से 2040 के बीच चीन विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा एवं अमेरिका दूसरे नम्बर पर आ जाएगा और भारत तीसरे नम्बर पर आ जाएगा। परंतु, इसके बाद क्या भारत अमेरिकी अर्थव्यवस्था को पीछे छोड़ते हुए दूसरे नम्बर पर आ पाएगा। इस तरह की चर्चाएं आजकल आर्थिक जगत में होने लगी हैं। आज से लगभग 10 वर्ष पूर्व भारतीय अर्थव्यवस्था का विश्व में 11वां स्थान था जो आज 3.70 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर के सकल घरेलू उत्पाद के आकार के साथ विश्व में 5वें स्थान पर आ गई है। ऐसी सम्भावना व्यक्त की जा रही है कि वर्ष 2026 में भारतीय अर्थव्यवस्था जर्मनी अर्थव्यवस्था से आगे निकलकर विश्व में चौथे स्थान पर आ जाएगी। इसी प्रकार वर्ष 2027 में जापानी अर्थव्यवस्था को भी पीछे छोड़ते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व में तीसरे स्थान पर आ जाएगी। गोल्ड्मन सच्स के अनुसार, अगले चार वर्षों के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार 5 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक हो जाएगा। इसी प्रकार, ब्लूम्बर्ग के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था आगामी वर्षों में लगातार 6 प्रतिशत से अधिक की विकास दर हासिल करता रहेगा, और अमेरिका एवं चीन की आर्थिक विकास दर से आगे बना रहेगा। भारतीय अर्थव्यवस्था में आर्थिक विकास दर के तेज गति से आगे रहने के पीछे जो कारण बताए जा रहे हैं उनमें शामिल हैं – भारतीय जनसंख्या में वृद्धि होते रहना (अमेरिका एवं चीन में जनसंख्या वृद्धि दर लगातार कम हो रही है), इससे भारतीय घरेलू बाजार मजबूत बना रहेगा एवं उत्पादों की मांग भी भारत में तेज गति से आगे बढ़ती रहेगी। एक अनुमान के अनुसार, वर्ष 2050 तक भारत की आबादी बढ़ कर 170 करोड़ नागरिकों की हो जाएगी, इससे भारत अपने आप में विश्व का सबसे बड़ा बाजार बन जाएगा।

वर्ष 2024 में भारत में उपभोक्ता विश्वास सूचकांक 98.5 प्रतिशत तक पहुंच गया है। दूसरे, भारत में आधारभूत ढांचे को विकसित करने के लिए भी केंद्र एवं राज्य सरकारों द्वारा अत्यधिक मात्रा में पूंजी निवेश किया जा रहा है। भारत में आधारभूत ढांचे को विकसित श्रेणी में लाने के लिए केवल रोड ही नहीं बल्कि रेल्वे, एयरपोर्ट, ऊर्जा एवं जल व्यवस्था को विकसित करने के लिए भी भरपूर पूंजी निवेश किया जा रहा है।

भारत में आज भी श्रमिक लागत तुलनात्मक रूप से बहुत कम है, इससे कई विदेशी कम्पनियां अब चीन के स्थान पर भारत में अपनी विनिर्माण इकाईयों को स्थापित कर रही हैं इससे भारत के औद्योगिक विकास को गति मिल रही है। भारत ने भी कई उद्योग क्षेत्रों के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना लागू की है जिसका लाभ विश्व की कई बहुराष्ट्रीय कम्पनियां उठा रही हैं एवं अपनी औद्योगिक इकाईयां भारत में स्थापित कर रही हैं।

तीसरे भारत में आज 140 करोड़ की जनसंख्या में से 100 करोड़ से अधिक नागरिक युवा एवं कार्य कर सकने वाले नागरिकों की श्रेणी में शामिल हैं। इतनी बड़ी मात्रा में श्रमिकों की उपलब्धि किसी भी अन्य देश में नहीं है। अन्य विकसित देशों, चीन सहित, में कार्य कर सकने वाले नागरिकों की संख्या लगातार कम हो रही है क्योंकि इन देशों में प्रौढ़ नागरिकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। किसी भी देश में युवा जनसंख्या का अधिक होने से न केवल श्रमिक के रूप में इनकी उपलब्धि आसान बनी रहती है बल्कि इनके माध्यम से देश में उत्पादों की मांग में भी वृद्धि दर्ज होती है तथा युवा जनसंख्या की उत्पादकता भी अधिक होती है जिससे उत्पादन लागत कम हो सकती है। साथ ही, युवाओं द्वारा नवाचार भी अधिक मात्रा में किया जा सकता है। यह सब कारण हैं जो भारतीय अर्थव्यवस्था को पूरे विश्व में एक चमकता सितारा बनाने में सहायक हो रहे हैं।

हाल ही के समय में वैश्विक स्तर पर आर्थिक क्षेत्र का परिदृश्य तेजी से बदला भी है। अभी तक वैश्विक अर्थव्यवस्था में विकसित देशों का दबदबा बना रहता आया है। परंतु, अब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के एक अनुमान के अनुसार वर्ष 2024 में भारत सहित एशियाई देशों के वैश्विक अर्थव्यवस्था में 60 प्रतिशत का योगदान होने की प्रबल सम्भावना बन रही है। एशियाई देशों में चीन एवं भारत मुख्य भूमिकाएं निभाते नजर आ रहे हैं। प्राचीन काल में वैश्विक अर्थव्यस्था में भारत का योगदान लगभग 32 प्रतिशत से भी अधिक रहता आया है। वर्ष 1947 में जब भारत ने राजनैतिक स्वतंत्रता प्राप्त की थी उस समय वैश्विक अर्थव्यस्था में भारत का योगदान लगभग 3 प्रतिशत तक नीचे पहुंच गया था क्योंकि भारतीय अर्थव्यवस्था को पहिले अरब से आए आक्राताओं एवं बाद में अंग्रेजों ने बहुत नुक्सान पहुंचाया था एवं भारत को जमकर लूटा था। वर्ष 1947 के बाद के लगभग 70 वर्षों में भी वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारतीय अर्थव्यवस्था के योगदान में कुछ बहुत अधिक परिवर्तन नहीं आ पाया था। परंतु, पिछले 10 वर्षों के दौरान देश में लगातार मजबूत होते लोकतंत्र के चलते एवं आर्थिक क्षेत्र में लिए गए कई पारदर्शी निर्णयों के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था को तो जैसे पंख लग गए हैं। आज भारत इस स्थिति में पहुंच गया है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में वर्ष 2024 में अपने योगदान को लगभग 18 प्रतिशत के आसपास एवं एशिया के अन्य देशों यथा चीन, जापान एवं अन्य देशों के साथ मिलकर वैश्विक अर्थव्यवस्था में एशियाई देशों के योगदान को 60 प्रतिशत तक ले जाने में सफल होता दिखाई दे रहा है।

भारत आज अमेरिका, चीन, जर्मनी एवं जापान के बाद विश्व की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। साथ ही, भारत आज पूरे विश्व में सबसे तेज गति से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्था है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में तो भारत की आर्थिक विकास दर 8.2 प्रतिशत की रही है और यह वित्तीय वर्ष 2023-24 की समस्त तिमाहियों में लगातार तेज गति से बढ़ती रही है। पहली तीन तिमाहियों में भारत की आर्थिक विकास दर 8 प्रतिशत से अधिक रही है, अक्टोबर-दिसम्बर 2023 को समाप्त तिमाही में तो आर्थिक विकास दर 8.4 प्रतिशत की रही है। इस विकास दर के साथ भारत के वर्ष 2025 तक जापान की अर्थव्यवस्था को पीछे छोड़ते हुए विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाने की प्रबल सम्भावना बनती दिखाई दे रही है। केवल 10 वर्ष पूर्व ही भारत विश्व की 11वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था और वर्ष 2013 में मोर्गन स्टैनली द्वारा किए गए एक सर्वे के अनुसार भारत विश्व के उन 5 बड़े देशों (दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील, इंडोनेशिया, टर्की एवं भारत) में शामिल था जिनकी अर्थव्यवस्थाएं नाजुक हालत में मानी जाती थीं। अब आगे आने वाले कालचक्र में वैश्विक स्तर पर आर्थिक क्षेत्र में परिस्थितियां लगातार भारत के पक्ष में होती दिखाई दे रही हैं, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था का वैश्विक अर्थव्यवस्था में योगदान लगातार बढ़ते जाने की प्रबल संभावनाएं बनती नजर आ रही हैं।

प्रहलाद सबनानी

सेवा निवृत्त उप महाप्रबंधक,

Comment:

Latest Posts

hititbet giriş
hititbet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
hititbet giriş
hititbet güncel giriş
hititbet giriş
vdcasino giriş
vdcasino güncel giriş
vdcasino giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hitit medya
Hititbet Giriş
Hititbet Giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
tuzla cilt bakım merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet
hititbet güncel adres
hititbet 2026
hititbet giriş
hititbet giriş
Tuzla Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
solobet giriş
hititbet giriş
kralbet
otobet giriş
xslot giriş
xslot giriş
xslot giriş
xslot giriş
xslot giriş
otobet giriş
otobet giriş
otobet giriş
betyap giriş
betyap giriş
maksibet giriş
maksibet giriş
maksibet giriş
maksibet giriş
maksibet giriş
maksibet giriş
betnano
betnano
betnano
kralbet
kralbet
kralbet
setrabet
setrabet
kralbet
betpark giriş
hititbet
hititbet
Tuzla Cilt Bakım
İstanbul Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet Giriş
Hititbet Giriş
betgaranti giriş
betpark giriş