मॉरीशस के राष्ट्रीय दिवस 12 मार्च पर विशेष : भारत मॉरीशस संबंध और राष्ट्रपति मुर्मू की मॉरीशस यात्रा

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12 मार्च मॉरीशस का राष्ट्रीय दिवस है। इसी दिन यह देश 1968 में ब्रिटेन से आजाद हुआ था। मुझे मेरे मॉरीशस प्रवास के समय मॉरीशस और भारत के संबंधों पर गहरी पकड़ रखने वाले श्री राजनारायण गति जी ने बताया था कि 12 मार्च को ही महात्मा गांधी ने अपना ऐतिहासिक दांडी मार्च आरंभ किया था। हमने इस स्मृति को सुरक्षित बनाए रखने के लिए अपना राष्ट्रीय दिवस 12 मार्च को घोषित किया था। श्री गति जी ने जब मुझे इसके बारे में बताया तो उनके चेहरे पर भारत के बारे में एक विशेष और समादृत भाषा का भाव था। मुझे भी यह जानकर अच्छा लगा कि मॉरीशस में भारत से जाने वाले लोगों की 7 वीं पीढ़ी भी किस प्रकार अपने मूल देश के बारे में सम्मान का भाव रखती है?
इस बार मॉरीशस के राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थिति रही हैं ।उन्होंने भारत की सहृदयता और मॉरीशस के प्रति गहरे सद्भाव का परिचय देते हुए मॉरीशस के राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर एक विशेष घोषणा करते हुए कहा कि भारत ने मॉरीशस में रह रहे भारतवंशियों को भारत की विदेशी नागरिकता (ओसीआइ) कार्ड देने के लिए विशेष प्रविधान को मंजूरी दी है। भारत की राष्ट्रपति ने कहा कि मॉरीशस के युवाओं को भारत से जोड़ने के लिए यह प्रयास किया गया है। निश्चय ही भारत के इस कदम से मॉरीशस के युवाओं को अपने पूर्वजों के मूल देश की पवित्र भूमि को समझने और यहां से जुड़ी यादों को सहेजने का अच्छा अवसर उपलब्ध होगा। हमें यह बात ध्यान रखनी चाहिए कि विदेश नीति के संबंध में सांस्कृतिक संबंध किन्हीं भी दो देशों को एक दूसरे के निकट लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मॉरीशस के 56 वें राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर भारत की राष्ट्रपति ने कहा कि भारत सरकार पवित्र गंगा तालाब परिसर का धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटक केंद्र के रूप में पुनर्विकास करने में मॉरीशस सरकार की मदद करेगी। दोनों देशों के संबंधों पर यदि विचार किया जाए तो यह बात बड़े गर्व के साथ कही जा सकती है कि जहां मॉरीशस के लोग अपने पूर्वजों के देश भारत के प्रति सद्भाव रखते हैं, वहीं भारत के लोग भी मॉरीशस को अपना छोटा भाई समझ कर उसके प्रति विशेष सहयोगात्मक दृष्टिकोण रखते हैं। उसके दर्द को अपना दर्द समझने , उसकी समस्या को अपनी समस्या समझने और उसके हर दुख दर्द में शामिल होना भारतीयों के लिए एक स्वाभाविक बात है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू तीन दिन की आधिकारिक यात्रा पर 11 मार्च को मॉरीशस पहुंचीं। मॉरीशस की आधिकारिक यात्रा पर पहुंचने वाली वह छठी भारतीय राष्ट्रपति हैं। मॉरीशस के राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति ने भारत के लोगों की भावना से वहां के राष्ट्रपति और जनसाधारण को अवगत कराया। इस अवसर पर भारत की राष्ट्रपति ने मॉरीशस के राष्ट्रपति पृथ्वीराज सिंह रूपन और प्रधानमंत्री प्रविंद कुमार जुगनॉथ के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं।
राष्ट्रपति मुर्मू की यह यात्रा भारत और मॉरीशस के सांस्कृतिक संबंधों को भी मजबूत करने में सहायता करेगी। उनकी यह यात्रा दीर्घकालिक और स्थायी संबंधों को रेखांकित करती है। मॉरीशस के 70% लोग भारतीय मूल के हैं । मुझे मेरे प्रवास के दौरान आर्य नेता डॉ उदय नारायण गंगू जी ने बताया था कि लोगों ने अपनी विरासत को सहेज कर रखा है। उन्हें अपने पूर्वजों के देश भारत पर गर्व होता है। भारत की प्रत्येक गतिविधि से वह बड़े आत्मीय भाव के साथ जुड़े रहने का प्रयास करते हैं। भारत और मॉरिशस ने 1948 में अपने राजनीतिक संबंध स्थापित किए थे। तब से आज तक दोनों के संबंध बहुत ही मधुर बने हुए हैं। वर्तमान समय में भी दोनों देशों के राजनीतिक नेतृत्व के बीच बहुत ही अच्छी समझ बनी हुई है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मॉरीशस को विशेष सम्मान और स्थान देते हैं। कोरोना काल में भी भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री मोदी ने मॉरीशस के प्रति वरीयता वाली नीति का पालन किया था। दोनों देश एशियाई महाद्वीप में प्रमुख व्यापारिक भागीदारी निभाते हैं। रणनीतिक दृष्टिकोण से मॉरीशस भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण देश रहा है।
मॉरीशस की कई विकास परियोजनाओं को पूर्ण करने में भारत ने मदद की है। पोर्ट लुईस के उत्तर में 1100 किलोमीटर दूर स्थित अगालेगा द्वीप समूह भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी स्थान पर मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रवीण जुगनोथ के साथ भारत के प्रधानमंत्री श्री मोदी ने एक नई हवाई पट्टी जेटी और 6 अन्य भारत सहायता प्राप्त विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया था। इस अवसर पर मॉरीशस के प्रधानमंत्री ने कहा था, ‘यह कार्यक्रम मॉरीशस और भारत के बीच उल्लेखनीय और अनुकरणीय साझेदारी के लिए एक और महान क्षण का प्रतीक है।’ मॉरीशस के लोग भारत के प्रधानमंत्री मोदी के द्वारा मॉरीशस पर विशेष ध्यान देने से बहुत अधिक गदगद हैं ।प्रधानमंत्री की इस आत्मीयता से उन्हें लगता है कि भारत उनके साथ हर पल खड़ा है। इसे वह भावनात्मक रूप में लेते हैं और समझते हैं कि भारत बड़े भाई की भूमिका निभाने के लिए मॉरीशस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर साथ है।
मॉरीशस के इतिहास में वह दिन आज भी स्वर्णिम अक्षरों में लिखा है जब भारत से 2 नवंबर 1834 को मजदूरों का पहला जत्था मॉरीशस पहुंचा था। इस दिवस को यहां के लोग आज भी प्रवासी दिवस के रूप में मनाते हैं। उस समय इतिहास के साथ बड़ा क्रूर उपहास किया गया था । जब भारत से मजदूरों को झूठ बोलकर गिरमिटिया मजदूर के रूप में मॉरीशस ले जाकर अंग्रेजों ने खड़ा कर दिया था। भारत के वे भोले भाले मजदूर लोग अचानक जहां ले जाकर खड़े किए गए थे वहां उनके लिए गन्ने के खेतों में काम करने के अतिरिक्त अन्य कोई काम नहीं था। अब उल्टे अपने देश वे लौट नहीं सकते थे और यहां से आगे भी कहीं नहीं जा सकते थे। कहने का अभिप्राय है कि यहीं रहकर काम करते-करते मर जाना उनकी नियति बन गई थी।
भारत के उन मजदूर लोगों की सद्भावना और संवेदना सदा भारत के साथ जुड़ी रही। भारत ने भी मॉरीशस के लोगों की उस पहली पीढ़ी की सद्भावना और संवेदना का पूरा ध्यान रखते हुए आगे आने वाली हर पीढ़ी के साथ भावनात्मक और संवेदनात्मक रूप से साथ खड़े रहने का व्रत निभाने का संकल्प लिया।
29 अक्टूबर से 15 नवंबर 1901 को दक्षिण अफ्रीका से भारत आते समय महात्मा गांधी मॉरीशस में कुछ समय के लिए रुक गए थे । इस घटना को भी यहां के लोग विशेष रूप से याद रखते हैं। महात्मा गांधी के प्रति यहां के लोगों में आज भी विशेष सम्मान का विशेष भाव है।
1968 में जब यह देश आजाद हुआ तो सर शिव सागर रामगुलाम यहां के पहले प्रधानमंत्री बने । उन्हें भारत ने भी सदा विशेष सम्मान और आदर प्रदान किया।सर शिवसागर रामगुलाम ने प्रधानमंत्री बनते ही अपने देश की विदेश नीति के माध्यम से यह स्पष्ट कर दिया कि वह भारत को महत्वपूर्ण स्थान देते हैं। मॉरीशस की विदेश नीति भारत के साथ जिस प्रकार के संबंधों को लेकर चलती है उसे भारत ने भी पूर्ण सम्मान दिया है। यही कारण है कि दोनों देश बिना किसी हिचकिचाहट के और बिना किसी प्रकार की विशेष औपचारिकताओं के भंवरजाल में फंसे
अपने संबंधों की डगर पर आगे बढ़ते जा रहे हैं। ना तो कहीं किसी संकोच को पांव पसारने का स्थान आज तक मिला है और ना ही किसी प्रकार का कोई संदेह दोनों देशों के बीच किसी प्रकार की दीवार खड़ी कर सका है । दोनों देश आत्मीय भाव से एक दूसरे का हाथ और हाथ पकड़े चले जा रहे हैं। इसी के चलते भारत मॉरीशस का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बन चुका है। भारत से मॉरीशस के लिए पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात भी बड़े पैमाने पर होता है।
भारत ने 2011 में तटीय निगरानी रडार प्रणाली की स्थापना करके मॉरीशस को विशेष सुरक्षा कवच प्रदान करते हुए उसकी तटीय निगरानी क्षमताओं को बढ़ाने में मदद की है। जब सारे विश्व में कोविड-19 हाहाकार मचा रहा था तब भारत ने मॉरीशस के लिए1 लाख टीकों की सप्लाई करके इस देश को विशेष राहत पहुंचाई थी। भारत मॉरीशस संबंधों की विशेषज्ञों का कहना है कि मॉरीशस भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश इक्विटी प्रवाह का सबसे बड़ा स्रोत भी रहा है। कई भारतीय सहायता प्राप्त परियोजनाओं में उपाध्याय प्रशिक्षण केंद्र, जवाहरलाल नेहरू अस्पताल और सुब्रमण्यम भारती आई सेंटर शामिल हैं।
पिछले एक दशक में प्रधानमंत्री मोदी के रहते कई परियोजनाओं को भारत ने मॉरीशस में लागू किया है।
मई 2016 में, भारत ने 5 परियोजनाओं को निष्पादित करने के लिए विशेष आर्थिक पैकेज (एसईपी) के रूप में मॉरीशस को 353 मिलियन डॉलर का अनुदान दिया था। 2021 में विदेश मंत्री एस. जयशंकर की यात्रा के दौरान ‘व्यापक आर्थिक सहयोग और साझेदारी समझौता’ नामक मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूती देने के इरादे से प्रेरित होकर 2015 और 2019 में मॉरीशस का दौरा किया था। इसके बाद 2022 में जुगनॉथ ने भारत का दौरा किया था। 2019 में, प्रधानमंत्री मोदी और पीएम जुगनॉथ ने संयुक्त रूप से वर्चुअल मोड में मॉरीशस में मेट्रो एक्सप्रेस परियोजना और नए ईएनटी अस्पताल का उद्घाटन किया। जुलाई 2020 में मॉरीशस के सर्वोच्च न्यायालय के भवन का भी दोनों प्रधानमंत्रियों ने वर्चुअली उद्घाटन किया था। 2023 में, भारत और मॉरीशस ने राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने का उत्सव भी मनाया था।
प्रधानमंत्री मोदी जिस प्रकार मॉरीशस को महत्वपूर्ण स्थान देकर आगे बढ़ रहे हैं वह उनकी विदेश नीति के उस महत्वपूर्ण नियामक तत्व की ओर संकेत करती है जिसमें भावनात्मक रूप से अपने साथ जुड़े देश को प्राथमिकता दिया जाना उचित माना गया है। दोनों देश वैचारिक धरातल पर एकता के सूत्र में बंधे हुए हैं । दोनों का साहित्य एक है, दोनों के पूर्वज एक हैं, दोनों के धर्म ग्रंथ एक हैं, दोनों की राजनीतिक सोच और मान्यताएं एक हैं। कई बिंदुओं पर दोनों की प्राथमिकताएं भी एक है। ऐसे में एकत्व के भाव को समत्व में समायोजित करना भारत मॉरीशस विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण पक्ष है। बस यही वह पक्ष है जो दोनों देशों को सद्भावपूर्ण विदेश नीति के माध्यम से समायोजित कर एक सूत्र में पिरो देता है। दो देशों की विदेश नीतियों के संदर्भ में एकत्व से समन्वयात्मकता के इस बिंदु पर पहुंच जाना कदापि संभव नहीं माना जाता, पर भारत मॉरिशस संबंधों ने इस असंभव को संभव कर दिखाया है। सारी दुनिया को यह बता दिया है कि यदि सोच अच्छी हो तो विदेश नीतियां संदेहों के भंवर जाल में अटक कर खड़ी नहीं हो जाती हैं बल्कि वह निसंकोच आगे बढ़ती चली जाती हैं।
भारत के प्रति विशेष सद्भाव दिखाते हुए मॉरीशस ने सुरक्षा परिषद में भारत की स्थाई सीट का सदा समर्थन किया है।
भारत की राष्ट्रपति मुर्मू मॉरीशस की अपनी यात्रा को पूर्ण कर स्वदेश लौट आई हैं । इस दौरान उन्होंने मॉरीशस के राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर भारत के जिस सद्भाव को मॉरीशस के लोगों के अंतर्मन में नवीनता देने का काम किया है उससे संबंधों का पुनः नवीनीकरण करने में सफलता प्राप्त हुई है। दोनों देशों के लोगों के पारस्परिक आत्मिक लगाव को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि यदि आज सुंदर है तो भविष्य भी समुज्ज्वल ही होगा।

डॉ राकेश कुमार आर्य
(लेखक सुप्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता हैं।)

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