दिव्य लोग परमात्मा की पूजा और उनका आह्वान् क्यों करते हैं?

Screenshot_20240229_075011_WhatsApp

दिव्य लोग परमात्मा की पूजा और उनका आह्वान् क्यों करते हैं?
हमारी वृत्तियों का नाश कौन करता है?

आर्चन्नत्र मरुतः सस्मिन्नाजौविश्वेदेवासोअमदन्ननुत्वा।
वृत्रस्य यद्भृष्टिमता वधेननित्वमिन्द्रप्रत्यानंजघन्थ।।
ऋग्वेद 1.52.15

(आर्चन् – नि आर्चन्) सदैव एवं नियमित आपकी पूजा करता है और आपका आह्वान करता है (अत्र) यहाँ, इस जीवन में (मरुतः) दिव्य श्रद्धालु, कम बोलने वाले (सस्मिन्) सम्पूर्ण (आजौ) संग्राम, कठिनाईयाँ (विश्वे) सब (देवासः) दिव्य लोग (अमदन्) प्रसन्नता (अनु) अनुसरण करते हुए (त्वा) आपको (वृत्रस्य) मन की वृत्तियाँ, मन पर प्रभाव (यत्) वह (भृष्टिमता) धूर्त मन को मारकर (वधेन्) वज्र के साथ (नि – आर्चन् से पूर्व लगाया गया) (त्वम्) आप (इन्द्र) परमात्मा, इन्द्रियों का नियंत्रक (प्रति आनम्) मुख का लक्ष्य करके (जघन्थ) प्रहार।

व्याख्या :-

दिव्य लोग परमात्मा की पूजा और उनका आह्वान् क्यों करते हैं?

दिव्य लोग जो कम बोलते हैं वे सदैव और नियमित रूप से सभी संग्रामों में और कठिनाईयों में, यहाँ इसी जीवन में परमात्मा की पूजा और उनका आह्वान् करते हैं। सभी दिव्य लोग आपका अनुसरण करते हुए प्रसन्नता महसूस करते हैं। इन्द्र, परमात्मा सभी वृत्तियों के मुख पर लक्ष्य करते हुए प्रहार करता है, बेशक वह इन्द्रियों के नियंत्रक इन्द्र पुरुष के माध्यम से ही ऐसा करता है। इससे लगता है कि जैसे धूर्त मन को किसी हथियार से मार दिया गया हो।

जीवन में सार्थकता : –

हमारी वृत्तियों का नाश कौन करता है?

योग दर्शन का यह मुख्य ध्येय है कि मन की वृत्तियों को नियंत्रित किया जाये अर्थात् ‘योगः चित्त वृत्ति निरोधः‘। ऋग्वेद के प्रथम मण्डल का यह 52वाँ सूक्त ही योग दर्शन का मूल ध्येय है। यह वर्तमान मन्त्र दिव्य लोगों को स्पष्ट आश्वासन देता है कि सर्वोच्च इन्द्र, परमात्मा, अपने पक्के श्रद्धालुओं को भी अपनी इन्द्रियों का नियंत्रक बनाकर इन्द्र बना देता है और इस प्रकार वृत्तियों के मुख पर प्रहार करता है। अतः सभी दिव्य लोगां को मन में धारणा बना लेनी चाहिए कि सर्वोच्च इन्द्र का आह्वान करना ही एक मात्र मार्ग है जिससे हम स्वयं को इन्द्र बना सकें और इस प्रकार अपनी वृत्तियों का नाश करते हुए परमात्मा की अनुभूति के मार्ग पर प्रगति कर सकें।


अपने आध्यात्मिक दायित्व को समझें

आप वैदिक ज्ञान का नियमित स्वाध्याय कर रहे हैं, आपका यह आध्यात्मिक दायित्व बनता है कि इस ज्ञान को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचायें जिससे उन्हें भी नियमित रूप से वेद स्वाध्याय की प्रेरणा प्राप्त हो। वैदिक विवेक किसी एक विशेष मत, पंथ या समुदाय के लिए सीमित नहीं है। वेद में मानवता के उत्थान के लिए समस्त सत्य विज्ञान समाहित है।

यदि कोई महानुभाव पवित्र वेद स्वाध्याय एवं अनुसंधान कार्यक्रम से जुड़ना चाहते हैं तो वे अपना नाम, स्थान, वाट्सएप नम्बर तथा ईमेल 0091 9968357171 पर वाट्सएप या टेलीग्राम के माध्यम से लिखें।

अपने फोन मैं प्लेस्टोर से टेलीग्राम डाउनलोड करें जिससे आप पूर्व मंत्रो को भी प्राप्त कर सके।
https://t.me/vedas4

आईये! ब्रह्माण्ड की सर्वोच्च शक्ति परमात्मा के साथ दिव्य एकता की यात्रा पर आगे बढ़ें। हम समस्त पवित्र आत्माओं के लिए परमात्मा के इस सर्वोच्च ज्ञान की महान यात्रा के लिए शुभकामनाएँ देते हैं।

टीम
पवित्र वेद स्वाध्याय एवं अनुसंधान कार्यक्रम
वाट्सएप नम्बर-0091 9968357171

Comment:

betbox giriş
betbox giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betnano giriş
rinabet giriş
rinabet giriş
rinabet giriş
ikimisli giriş
ikimisli giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
ikimisli giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
sekabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
romabet giriş
romabet giriş
betnano giriş
sekabet giriş
sekabet giriş
nitrobahis giriş
nitrobahis giriş
winxbet giriş
yakabet giriş
jojobet giriş
jojobet giriş
batumslot giriş
batumslot
batumslot giriş
galabet giriş
galabet giriş
betplay giriş
betplay giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
galabet giriş
galabet giriş
galabet giriş
betamiral giriş
betamiral giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
galabet giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
Betgar güncel
Betgar giriş
Betgar giriş adresi