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कविता

कौन है ऐसा जगत में,

गीत

कौन है ऐसा जगत में,
जो न करता काम अपने!

सूर्य अपना अक्ष पकड़े,
सर्वदा गतिमान रहता।
और ऊर्जा की उदधि को,
सर्व हित में दान करता।
ग्रीन हाउस हम बनाकर,
फिर लगे दिन-रात तपने।
कौन है………………..।।

चाँद, तारे, व्योम, धरती,
सब जुटे निज काम में हैं।
साधु, विज्ञानी, गृही जन,
कर्मरत अठ याम में हैं।
सब चराचर हैं लगे बस,
साध्य सम्मत जाप जपने।
कौन है…………………।।

शेर, हाथी, कीट, पंछी,
नीम, पीपल,आम,झाड़ी।
जैव संरचना सभी से,
शैल, सागर, रेत, खाड़ी।
नींद में भी नींद आकर,
नित दिखाती ढेर सपने।
कौन है………………..।।

डॉ अवधेश कुमार अवध
साहित्यकार व अभियंता
संपर्क 8787573644

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