सेना के बारे में अफवाह की सच्चाई सामने आनी चाहिए

सैन्य तख्ता पलट संबंधी इँडियन एक्सप्रेस की खबर ने एक नया बवाल खड़ा कर दिया है। बवाल का एक पक्ष यह है कि भारतीय लोकतांत्रिक मूल्यों में साठ सालों से विश्वास करने वाली भारतीय सेना ने जनवरी माह में तख्ता पलट करने की कोशिश की थी। बवाल का दूसरा पक्ष यह है कि एक केंद्रीय मंत्री ने डिफेंस सौदागरों की मदद के लिए इँडियन एक्सप्रेस में खबर प्लांट करवायी। वे मंत्री किसी भी कीमत पर वीके सिंह को बरखास्त करवाने के इरादे से काम कर रहे थे। अब अहम सवाल दो दिनों में उठा है कि आखिर वह कैबिनेट मंत्री कौन है जिसने यह खबर प्लांट करवायी? बताया जा रहा है कि इस खबर को प्लांट करवाने के पीछे गृह मंत्री पी चिंदबरम की अहम भूमिका है, जिनके बेटे पर हाल ही में थल सेना में ट्रक खरीद घोटाले में शामिल होने का आऱोप सुब्रमण्यम स्वामी ने लगाया है। स्वामी ने दावा किया था कि अगर सीबीआई ने ईमानदारी से काम किया तो सेना में ट्रक खरीद घोटाले की तार पी चिंदबरम से जुड़ेगी, क्योंकि उनका बेटा भी इस खेल में शामिल है।
इंडियन एक्सप्रेस में भारतीय सेना दवारा तख्ता पलट की खबर प्लांट करवाए जाने के पीछे कैबिनेट मंत्री का हाथ संडे गार्जियन ने बताया था। इसके बाद ही उस कैबिनेट मंत्री के नाम की खोज-बीन शुरू हो गई थी। खबर को प्लांट करवाने के पीछे कौन से कैबिनेट मंत्री है, उसकी खोजबीन के बाद पता चला है कि इसका मुख्य सूत्रधार पी चिंदबरम है, जिन्हें इस खेल में कपिल सिब्बल का भी सहयोग मिला। हालांकि कुछ लोग  इस खबर को प्लांट करवाने में कपिल सिब्बल का सीधा हाथ बता रहे है, लेकिन दिल्ली के गलियारों में सक्रिय अहम लोग कुछ साक्ष्यों के आधार पर पी चिंदबरम को ही इस खबर के पीछे देख रहे है। इसका मुख्य कारण सेना में हुए ट्रक खरीद घोटाला है, जिसमें पी चिंदबरम के बेटे का नाम सामने आया है। हाल ही में सुब्रमण्यम स्वामी ने घोषणा की है कि ट्रक खरीद घोटाला मामले में पी चिदंबरम के बेटे का हाथ है। स्वामी ने जल्द ही  इस मामले में कई और खुलासा करने का दावा किया है। गौरतलब है कि इस ट्रक घोटाला मामले में जनरल वीके सिंह ने पैसे का ऑफर का आरोप लगाया था जिसके बाद रक्षा मंत्री एके एंटनी ने सीबीआई जांच की सिफारिश की थी।
दरअसल इस रक्षा सौदा घोटाले में भारी भरकम लोग शामिल है वो यहीं से साबित होता है कि दो साल पहले भी जब इसकी जानकारी रक्षा मंत्री तक आयी थी तो वो इसकी जांच करवाने में विफल हो गए थे। यहीं से शक की पूरी सुई पी चिदंबरम के उपर चली गई है। शेखऱ गुप्ता ने दो दिन पहले इंडियन एक्सप्रेस में एक पेज की रिपोर्ट में दावा किया था कि भारतीय सेना की दो टुकडिय़ां जनवरी माह में नई दिल्ली की तरफ कूच कर गई थी और इसकी जानकारी केंद्र सरकार को नहीं थी। लेकिन इस खबर के छपने के बाद ही इसे प्लांटेड खबर बताया गया और संडे गार्जियन अखबार ने इसमें एक कैबिनेट मंत्री का हाथ बताया था। अखबार का दावा था कि  उक्त कैबिनेट मंत्री का एक नजदीकी रिश्तेदार डिफेंस सौदों से जुड़ा है। बताया जाता है कि जिस ट्रक खरीद मामले में वीके सिंह को करोड़ों रुपये का ऑफर किया गया था, वही ट्रक खरीद घोटाला मामला कैबिनेट मंत्री को परेशान किए हुए है। अब तो इसकी सीबीआई जांच भी शुरू हो गई है। सुब्रमण्यम स्वामी के अनुसार इस ट्रक खरीद घोटाले में पी चिंदबरम के बेटे की अहम भूमिका है और सीबीआई अगर ईमानदारी से जांच करेगी तो सारा कुछ सामने आ जाएगा। मिली जानकारी के अनुसार वीके सिंह इस रक्षा सौदे के खेल में शामिल लोगों के नाम जानते है। वे दलालों के राह में रोड़ा भी बन हे थे। सूत्रों का दावा है कि इसी कारण पी चिंदबरम वीके सिंह से नाराज थे। वे वीके सिंह को किसी भी तरह से सेना से बाहर निकलवाने के चक्कर में थे। जानकार सूत्रों का कहना है कि सेना के नॉरमल मूवमेंट को तख्ता पल्ट का रूप देने की पूरी रचना पी चिंदबरम ने ही रची। क्योंकि जिस तरह से दिल्ली पुलिस ने बैरिकेट लगाए और सेना के मूवमेंट को धीमा किया वो प्रायोजित तख्ता पलट कहानी की भूमिका ही थी, जिसे जनवरी माह में रचा गया था। चुकिं दिल्ली पुलिस भी अप्रत्यक्ष रुप से पी चिंदबरम के अधीन ही काम करती है, इसलिए उनके इशारे पर  पुलिस ने जगह-जगह बैरिकेड लगाकर ट्रैफिक को स्लो किया। इसी दिल्ली पुलिस ने बाबा रामदेव के समर्थकों को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में पी चिंदबरम के इशारे पर पीटा था। बाद में सुप्रीम कोर्ट से लताड़ पड़ी तो दिल्ली पुलिस की नींद हराम हो गई। कुछ कुल मिलाकर वीके सिंह के खिलाफ खबर प्लांट करवाने संबंधी पूरी कहानी की प्लॉट जनवरी माह में तैयार की गई थी।
वैसे इस पूरे खेल में कपिल सिब्बल का भी सहयोग माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि कपिल सिब्बल ने ही जनरल दवारा प्रधानमंत्री को भेजी गई चि_ी लीक की थी। बताया जाता है कि जनरल ने प्रधानमंत्री को सैन्य तैयारी से संबंधित जो चि_ी लिखी थी, उसे अखबारों को लीक करवाने में कपिल सिब्बल का हाथ था। इसमें जनरल की भूमिका पाक-साफ थी। लेकिन चिट्टी लीक करवा कर जनरल को बरखास्त करवाने की तैयारी की गई थी। क्योंकि इस चि_ी लीक किए जाने से सरकार और जनरल के बीच खटास तो आ ही गए थे। लेकिन सैन्य तख्ता पलट वाली खबर के बाद तो इन्हें पूरी उम्मीद थी कि जनरल बरखास्त कर दिए जाएंगे और इसमें विपक्षी भाजपा समेत अन्य राजनीतिक दलों का भी समर्थन मिलेगा। लेकिन इस मसले पर भाजपा विभाजित हो गई। बाद में भाजपा ने नुकसान की भरपाई करते हुए जनरल का साथ दे दिया। यही खबर प्लांट करने वाली पूरी योजना फेल हो गई।
जनरल वीके सिंह को पहले ही पता था कि सेना की क्रेडिबिलिटी को खत्म करने के लिए इंडियन एक्सप्रेस एक खबर प्लांट करने वाला है। उन्हें यह पता था कि दिल्ली की तरफ सामान्य सैन्य अभ्यास के लिए बढ़ी दो टुकडिय़ों को सैन्य तख्ता पलट का रूप दे दिया जाएगा। वीके सिंह को इसकी भनक लग गई थी कि सेना की दो इकाइयों द्बारा जनवरी में दिल्ली के पास किए गए सैन्य अभ्यास को तख्ता पलट का प्रयास बताया जाएगा। खबर प्लांट की तैयारी हो गई थी, इसकी पूरी खबर जनरल वीके सिंह के पास थी। उन्हें पता था कि देश के सबसे क्रेडिबिलिटी वाला अखबार इंडियन एक्सप्रेस इस काम को अंजाम देगा। खबर को प्लांट किए जाने का अंदेशा एक अंग्रेजी मैगजिन को दिए इंटरव्यू में जनरल सिंह ने जताया था। मार्च में ही एक अंग्रेजी पत्रिका द वीक को दिए उनके इंटरव्यू से जानकारी मिलती है कि वीके सिंह को सारे कुचक्र की जानकारी थी।
जनरल सिंह ने 13 मार्च को ‘द वीक ‘ पत्रिका को दिए इंटरव्यू में कहा था ‘मान लीजिए, हमारी एक कोर या डिवीजन या ब्रिगेड अभ्यास कर रही है तो कोई कहेगा कि ओह….उन्होंने अभ्यास किया। यह अभ्यास नहीं था, वे कुछ और करना चाहते थे।’ उन्होंने इंटरव्यू में कहा ‘अब आप इससे एक खबर बनाएंगे। इन दिनों कई लोग गलत मकसद से खबरें बनाना चाहते है।’ वास्तव में जनरल सिंह का यह ब्यान एक अहम ब्यान है। यह ब्यान इंडियन एक्सप्रेस के 4 अप्रैल के उस खबर के मद्देनजर अहम है जिसमें इंडियन एक्सप्रेस ने बताया था कि सेना की दो इकाइयां नई दिल्ली की तरफ उस दिन (16 जनवरी को) असामान्य तरीके से कूच कर गई थी, जिस दिन जनरल सिंह ने अपने उम्र विवाद को लेकर एक अर्जी सुप्रीम कोर्ट में लगायी थी। जनरल सिंह ने द वीक पत्रिका को दिए इंटरव्यू में आलोचनात्मक लहजे में कहा था कि आज के जमाने में खराब खबर ही अच्छी खबर है, वहीं अच्छी खबर का महत्व ही नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी को कोई संदेह है तो उसे आना चाहिए और हमारा सामना करना चाहिए। वे ऐसा नहीं करेंगे, क्योंकि वे जानते हैं कि वे गलत हैं। उस इंटरव्यू में जनरल सिंह ने यह भी कहा था कि सेना पेशेवर काम कर रही है। लेकिन वर्दी और बिना वर्दी वाले दोनों तरह के लोग हैं, कुछ सरकारी सेवक हैं जिनके अपने निहित स्वार्थ हैं। वे सभी खराब चीजों को हवा देना शुरू कर देते हैं। गौरतलब है कि जनरल सिंह इस समय काठमांडू में है। वहां से ही उन्होंने ब्यान जारी कर खबर को मूर्खतापूर्ण बताया है। साथ ही इस तरह के प्रयास करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग भी जनरल ने की है।

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