भारत में राजनीति जैसे पवित्र मिशन को जब से कुछ लोगों ने व्यवसाय बनाया है, तब से यह मिशन न होकर घृणास्पद पेशा बन गया है। राजनीति और भ्रष्टïाचार आजादी के बाद कुछ इस प्रकार घुले मिले हैं कि दोनों को अलग अलग करना ही असंभव हो गया है। जहां राजनीति होगी वहां लोग भ्रष्टïाचार को उसी प्रकार अनिवार्य मानने लगे हैं, जिस प्रकार जहां धुंआ होता है तो वहां आग को अनिवार्य माना जाता है। राजनीति की शुचिता भंग हो गयी है। गरीबों के नाम पर राजनीति करने वाले राजनीतिज्ञ उन्हीं की चमड़ी को उधेडऩे और फिर उसे भी नीलाम करने का ओच्छा धंधा कर रहे हैं और भरी संसद में राजनीतिज्ञों के प्रति घृणा को जन्म देने वाले कार्टूनों को हटाने के लिए सरकार को और सी.बी.एस.ई. को पानी पी-पीकर कोस रहे हैं।
उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री कु. मायावती नाम से ही नहीं काम से भी मायावती ही हैं। उन्होंने अपने चुनाव चिन्ह हाथी की मूर्तियां खड़ी करके व प्रदेश के खजाने को अपनी मूर्तियों पर व्यय करके एक इतिहास रचा है। गरीब और गरीबी का मजाक उड़ाते हुए बहन जी ने पत्थर की मूर्तियों को ही ये समझ लिया कि देर सवेर ये ही दूध देने लगेंगी और गरीबी प्रदेश से छूमंतर हो जाएगी।
अब प्रदेश के नये मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पूर्व मुख्यमंत्री पर आरोप लगाया है कि उनके शासन काल में हुए घोटालों की जांच चल रही है और प्रथम दृष्टïया ही ज्ञात हो रहा है कि एन.आर.एच.एम. घोटाला इको पाई घोटाला, नोएडा घोटाला, हाथी घोटाला आदि लगभग एक दर्जन हुए घोटालों में गरीब 40 हजार करोड़ रूपये की चपत पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रदेश की जनता को लगायी थी। एक प्रकार से इतनी बड़ी धनराशि से लगभग 40 हजार गांवों में बिजली, सड़क, स्कूल, अस्पताल आदि की सुविधायें दी जा सकती थीं। 40 हजार गांवों में विकास का पैसा एक मुख्यमंत्री अपने राजशाही के मायावी काल में गटक गयी और फिर भी स्वयं को गरीबों की मसीहा कहला रही हैं, इस स्थिति पर सचमुच लज्जा को भी लज्जा आ रही होगी। खबर ये भी आ रही है कि प्रदेश में लखनऊ में बने पार्कों के लिए खजूर के पेड़ कागजों में लगाये जा रहे हैं और उसके लिए करोड़ों का बजट भी पास हुआ लेकिन एक भी खजूर किसी पार्क में नहंी लगा। अब तक हमने कागजी शेर का मुहावरा सुना था लेकिन मायावती एक नये मुहावरे को जन्म दे गयीं:-कागजी खजूर। खजूर की ऊंचाई अब मायावती सरकार के कार्यों को नापेगी और उसे बताएगी कि जनता के दिये धन को यदि अपनी बपौती मानकर लोकतंत्र में राजशाही ढंग से खर्च करोगे तो उसका अंजाम क्या होगा? मायावती सरकार के कार्यकाल में शशांक शेखर की स्थिति बड़ी मजबूत रही थी। उन्होंने कई घपलों में अच्छी भूमिका निभाई थी। 31 मई 2007 को जारी एक आदेश ही एन.आर.एच.एम. घोटाले में पूर्व कैविनेट सचिव शशांक शेखर के लिए कठिनाई का कारण बनता जा रहा है। पांच वर्ष पुराना यह आदेश सीबीआई को मिल गया है। प्रदेश की नई सरकार पर बदले की कार्रवाई करने का आरोप बसपा सुप्रीमो की ओर से लग सकता है, लेकिन तथ्य ही होते हैं, उनकी जांच पड़ताल कानून और न्याय व्यवस्था करेगी। उस पड़ताल की छलनी से सत्य निकलकर सामने आ जाएगा। जनता की इच्छा है कि आगामी लोकसभा चुनावों से पूर्व ही सत्य सामने आ जाए। ताकि प्रदेश की गरीब जनता यह समझ ले कि उसकी गरीबी के साथ कितना क्रूर उपहास किया गया? स्वामी रामदेव जैसे भगवा धारी संतों के विषय में जो राजनीतिज्ञ ये कहते हैं कि भगवाधारियों का राजनीति से क्या मेल? वो लोग ये भी सोच लें कि राजनीतिज्ञों का भ्रष्टïाचार से क्या मेल है? राजनीति की गंदगी को साफ करने के लिए स्वयं रामदेव बनो और रामदेव को रामदेव बनने का मौका मत दो। स्वयं रामदेव बनो और सारी की सारी कीचड़ को धो डाला। मायावती यह समझ लें कि नारों से और गरीबों और दलितों की दुहाई देकर वह राजनीति में अधिक देर तक नहीं जम सकेंगीं। प्रदेश का दलित वर्ग अब सच को समझ चुका है।

Comment:

betbox giriş
betbox giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betnano giriş
rinabet giriş
rinabet giriş
rinabet giriş
ikimisli giriş
ikimisli giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
ikimisli giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
sekabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
romabet giriş
romabet giriş
İmajbet güncel
Safirbet resmi adres
Safirbet giriş
betnano giriş
sekabet giriş
sekabet giriş
nitrobahis giriş
nitrobahis giriş
winxbet giriş
yakabet giriş
jojobet giriş
jojobet giriş
batumslot giriş
batumslot
batumslot giriş