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रक्षामंत्री ए.के.एंटनी की सराहनीय और साहसिक पहल 50 साल में मिला शहादत को पहली बार सम्मान

भारतीय सैन्य नेतृत्व ने शनिवार को 1962 के भारत-चीन युद्ध की 50वीं बरसी मनाई। इस मौके पर पहली बार सेना ने अपने शहीद सैनिकों को नमन किया। रक्षा मंत्री एके एंटनी, तीनों सेना प्रमुख और देश के एकमात्र पांच सितारा सैन्य अधिकारी मार्शल अर्जुन सिंह ने अमर जवान ज्योति पर शहीदों को सलामी दी।
एंटनी ने देश को आश्वस्त किया कि आज का भारत वैसा नहीं है जैसा 1962 में था। हमारी सेनाएं देश की एक-एक इंच जमीन की रक्षा करने में सक्षम हैं। जनरल बिक्रम सिंह ने कुछ समय पहले कहा था कि हम 1962 की पुनरावृत्ति नहीं होने देंगे। इसके बाद वायुसेना प्रमुख एनएके ब्राउन ने कहा कि उस जंग में वायु सेना का इस्तेमाल करते तो नतीजा कुछ और होता।
अब दोस्ती का प्रयास: भारत-चीन इस वर्ष को मैत्री और सहयोग के वर्ष के रुप में मना रहे हैं। हालांकि युद्ध के फलस्वरूप उत्पन्न सीमा विवाद पर दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी है।
1962 की जंग: कूटनीतिक कौशल की हार
तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का कूटनीतिक कौशल देश को हार से नहीं बचा पाया। युद्ध का पहला संकेत 12 अक्टूबर 1962 को सामने आया। तब नेहरू श्रीलंका जा रहे थे। उन्होंने भारतीय सेना को पूर्वोत्तर सीमा पर तैनात होने को कहा। चीन के शीर्ष नेताओं माओत्से तुंग व चाऊ एन लाई ने इसे जंग का एलान समझा। 20 अक्टूबर को चीन की सेना ने नेफा में भारतीय चौकियों पर हमला बोल दिया। नेहरु का भारत-चीनी भाई-भाई का नारा दु:स्वप्न में बदल गया। इस युद्ध में भारतीय सेना ने करीब 7 हजार जवान शहीद हुए।
फिर हुई राजनीति: इस पराजय का दोष तत्कालीन रक्षा मंत्री वीके कृष्ण मेनन पर मढ़ा गया। 31 अक्टूबर को मेनन ने रक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। जिसे नेहरू ने अपने पास रखा।
लता की मार्मिक अभिव्यक्ति:इस युद्ध से भारतीय जनमानस पर हुए आघात की सबसे मार्मिक अभिव्यक्ति स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर के ऐ मेरे वतन के लोगों, जरा आंख में भर लो पानी..गीत में हुई। इसे सुनकर आज भी लोगों की आंखें नम हो जाती हैं।जब सूरज निकले तभी सबेरा:रक्षामंत्री ए.के.एंटनी ने देश के अमर शहीदों को 50 वर्ष बाद ही सही याद तो किया, इसे देखकर यही कहा जा सकता है जब सूरज निकले तभी सबेरा मानना चाहिए। शहादत, शहादत ही होती है। उसे कम करके नही आंका जा सकता। 1962 के हमारे दो हजार जवान शहीदों को याद करके राष्ट्र ने उनके अपने प्रति ऋण को चुकता करने का सराहनीय कार्य किया है। इसके लिए रक्षामंत्री की साहसिक पहल सचमुच सराहनीय है। कांग्रेस हार के गम में अपने शहीदों को नमन नही कर पायी, जिसे सारा  भूला रहा लेकिन अब इस गलती को ठीक कर लिया गया है।


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