मौत के ताबूत बने मिग-21 लड़ाकू विमानों पर रोक लगाकर वायुसेना ने सराहनीय फैसला लिया

images (28)

रमेश सर्राफ धमोरा

मौत के उड़ते ताबूत कहलाने वाले मिग-21 लड़ाकू विमान के आये दिन दुर्घटनाग्रस्त होते रहने के कारण उन्हें फ्लाइंग कॉफिन और विडो मेकर कहा जाने लगा है। इस कारण इनको स्थायी रूप से सेना से बाहर करने की मांग होती रही है।
भारतीय वायुसेना ने लड़ाकू विमान मिग-21 के पूरे बेड़े की उड़ान पर अस्थाई तौर पर रोक लगा दी है। लगातार हो रहे हादसों को देखते हुए एयरफोर्स ने यह फैसला लिया है। राजस्थान में सूरतगढ़ के पास 8 मई को एक नियमित प्रशिक्षण उड़ान के दौरान एक मिग-21 एयरक्राफ्ट क्रैश होकर आबादी क्षेत्र के मकानों पर गिर गया था। उस हादसे में 3 महिलाओं की जान चली गई थी। वायु सेना ने मिग-21 लड़ाकू विमानों के पूरे बेड़े को उड़ान भरने से तब तक के लिए रोक दिया है जब तक कि राजस्थान में हुए हादसे की जांच पूरी नहीं हो जाती है।

मौत के उड़ते ताबूत कहलाने वाले मिग-21 लड़ाकू विमान के आये दिन दुर्घटनाग्रस्त होते रहने के कारण उन्हें फ्लाइंग कॉफिन और विडो मेकर कहा जाने लगा है। इस कारण इनको स्थायी रूप से सेना से बाहर करने की मांग होती रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय वायुसेना के 400 से ज्यादा मिग-21 विमान पिछले 60 सालों में दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं। जिसमें 200 से अधिक पायलटों और 63 नागरिकों की जान जा चुकी है। अभी वायु सेना के पास मिग-21 बाइसन की तीन स्क्वाड्रन हैं। जिन्हें 2025 की शुरुआत में चरणबद्ध तरीके से वायु सेना से हटाया जाएगा।

मिग-21 को 1960 के दशक में भारतीय वायु सेना में शामिल किया गया था। एक जमाने में ये दुनिया के सबसे ताकतवर लड़ाकू विमानों में शामिल था। इसकी तेज रफ्तार और मारक क्षमता के आगे अमेरिका जैसे देश भी डरते थे। ये इकलौता ऐसा लड़ाकू विमान है जिसे दुनियाभर के 60 से ज्यादा देशों में इस्तेमाल किया गया है। अब तक इस लड़ाकू विमान की 11 हजार 496 यूनिट्स का निर्माण किया जा चुका है। मिग-21 विमानन इतिहास का पहला सुपरसोनिक जेट विमान है। सत्तर के दशक में यह दुनिया में सबसे ज्यादा बिकने वाला फाइटर प्लेन था।

मिग-21 वही फाइटर प्लेन है जिससे भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन ने पाकिस्तान के लड़ाकू विमान एफ-16 को मार गिराया था। हालांकि उनका मिग-21 विमान भी क्रेश कर गया था। इसके अलावा पाकिस्तान के साथ हुए 1971 और 1999 के कारगिल युद्ध में भी मिग-21 ने अहम भूमिका निभाई थी। मिग-21 बाइसन फाइटर जैट का इस्तेमाल अब केवल इंटरसेप्टर के रूप में किया जा रहा है। इनका उपयोग लड़ाकू जेट के रूप में सीमित भूमिका के साथ ज्यादातर प्रशिक्षण अभ्यास के लिए किया जाता है। ये विमान एयरक्राफ्ट शॉर्ट रेंज और मीडियम रेंज एयरक्राफ्ट मिसाइलों से हमला करने में सक्षम है। इस लड़ाकू विमान की स्पीड 2229 किलोमीटर प्रति घंटा की है।

मिग-21 लडाकू विमान को बनाने वाली सोवियत वायु सेना ने इसे 1985 में ही अपनी वायु सेना से हटा दिया था। 1985 के बाद बांग्लादेश और अफगानिस्तान ने भी इसे सेवा से हटा दिया था। भारत में भी 1990 के दशक के मध्य में इनकी सेवानिवृत्ति की अवधि पूरी हो गई थी। इसके बावजूद इनका उन्नयन किया जाता रहा है। अक्टूबर 2014 में तत्कालीन वायु सेना प्रमुख ने कहा था कि पुराने विमानों को सेवा से हटाने में देरी से भारत की सुरक्षा को खतरा है, क्योंकि वायु सेना बेड़े के कुछ विमान बहुत पुराने हो गये हैं।

नए लड़ाकू विमानों को शामिल करने में देरी के कारण भारतीय वायु सेना को मिग 21 विमानों को लंबे समय तक सेवा में रखना पड़ा। वायुसेना को भारत के आसमान की रक्षा के लिए एक निश्चित संख्या में स्क्वाड्रन ताकत बनाए रखने की कमी का सामना करना पड़ रहा है। स्वदेशी तेजस कार्यक्रम में देरी, राफेल सौदे को लेकर राजनीतिक विवाद और धीमी गति वाली खरीद प्रक्रिया के कारण ही मिग-21 को सामान्य से अधिक समय तक सेवा में रखना पड़ रहा है।

जुलाई 2022 में भारतीय वायु सेना ने शेष सभी मिग-21 लड़ाकू स्क्वाड्रन को चरणबद्ध तरीके से हटाने के लिए तीन साल की कार्य योजना तैयार की थी। जिसमें से एक स्क्वाड्रन सितंबर में सेवानिवृत्त होने वाली है। एक समय मिग-21 विमान अपने सभी संस्करणों के साथ भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों के बेड़े की रीढ़ बना था। वहीं वायुसेना में दुर्घटनाओं की संख्या भी मिग-21 विमानों में सबसे अधिक थी।

भारतीय वायु सेना मिग-21 लड़ाकू विमानों को मजबूरी में उड़ा रही थी। भारतीय वायु सेना को पाकिस्तान व चीन से दो मोर्चों पर युद्ध लड़ने के लिए लड़ाकू विमानों की 42 स्क्वाड्रन की जरूरत है। मगर भारत के पास अभी 32 स्क्वाड्रन ही मौजूद हैं। जिनमें भी तीन स्क्वाड्रन मिग-21 के शामिल हैं। भारतीय वायु सेना के पास लड़ाकू विमानों की कमी का मुख्य कारण लंबे समय से लड़ाकू विमानों की खरीद नहीं करना है। 2016 में फ्रांस से दो स्क्वाड्रन विमानों की खरीद की गई थी।

भारत में निर्मित स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस की 83 यूनिट खरीदने के हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को आर्डर दिए गए हैं। जिनकी आपूर्ति में अभी समय लगेगा। ऐसे में वायु सेना को तात्कालिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए लड़ाकू विमानों की जरूरत है। भारत ने 114 लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए वैश्विक स्तर पर बोलियां आमंत्रित की हैं। इन मल्टीरोल लड़ाकू विमानों की खरीद पर भारत सरकार करीबन एक लाख करोड़ रुपयों से अधिक की राशि खर्च करेगी। अमेरिकी, फ्रांसीसी और स्वीडिश विमान निर्माता कंपनियां इस सौदे को हासिल करने के लिए दौड़ में शामिल हैं। अगले साल से स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस वायु सेना को मिलने शुरू हो जाएंगे। जिससे उम्मीद है कि आने वाले चार-पांच वर्षों में भारतीय वायु सेना के पास 40 से अधिक स्क्वाड्रन हो जाएंगी।

हमारे देश में वायु सेना के लिए विमानों व हेलीकॉप्टरों में खरीद की प्रक्रिया धीमी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पूर्व में घोषणा की थी कि विभिन्न दुर्घटनाओं में क्षतिग्रस्त हुए 12 सुखोई 30 एमकेआई लड़ाकू विमान और 21 मिग 29 विमानों को जल्दी ही खरीद कर वायुसेना को दिया जाएगा ताकि वायुसेना के बेड़े में उनकी संख्या पूर्ववत हो जाए। मगर यह सौदा भी अभी बातचीत के स्तर पर ही चल रहा है। यदि समय पर उक्त सौदा पूरा हो जाता तो भारतीय वायु सेना को 33 लड़ाकू विमान और मिल जाते।

मिग-21 लड़ाकू विमानों की उड़ानों पर रोक लगाकर वायु सेना ने एक सराहनीय फैसला लिया है। आए दिन मिग-21 लड़ाकू विमानों के दुर्घटनाग्रस्त होने से जहां पायलटों की तो जान जा ही रही थी उसके साथ ही आमजन की भी हानि होने की संभावना बनी रहती थी। जिस तरह से राजस्थान के सूरतगढ़ के पास एक गांव में मकान पर मिग-21 विमान गिरा जिससे 3 महिलाओं की मौत हो गई थी। वह तो गनीमत थी कि पायलट ने घनी आबादी से दूर विमान को ले जाने का प्रयास किया था। जिसकी बदौलत बड़ी दुर्घटना होने से रह गई थी। ऐसी दुर्घटनाओं के चलते जहां तक संभव हो मिग-21 को जमीन पर ही रखा जाए तो देश व सेना के लिए अच्छा होगा।

-रमेश सर्राफ धमोरा

(लेखक राजस्थान सरकार से मान्यता प्राप्त स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

Comment:

betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
holiganbet güncel giriş
holiganbet güncel
holiganbet giriş
bettilt giriş
betpark giriş
klasbahis giriş
klasbahis giriş
holiganbet güncel
imajbet güncel
holiganbet güncel giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
bettilt giriş
betpark giriş
casinolevant giriş
casinolevant giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betyap güncel
betpark giriş
betpark giriş
betyap giriş
betpark giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
vaycasino giriş
bettilt giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
casinolevant giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpuan giriş
betpuan giriş
sahabet girş
sahabet girş